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Bengal: प. बंगाल में नए आपराधिक कानूनों की समीक्षा के लिए प्रस्ताव पारित, भाजपा बोली- सदन के समय की बर्बादी

Fri, 02 Aug 2024 12:41 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Fri, 02 Aug 2024 12:41 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल में नए आपराधिक कानूनों की समीक्षा के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है। जिसको लेकर भाजपा ने आलोचना करते हुए कहा है कि यह सदन के समय की बर्बादी है। 

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Bengal assembly passes resolution seeking review of new laws replacing IPC, CrPC
ममता बनर्जी - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा ने गुरुवार को आईपीसी और सीआरपीसी की जगह देश में लागू किए गए नए कानूनों को लेकर केंद्र सरकार से समीक्षा की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया।

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वहीं विपक्षी भाजपा के सदस्यों ने प्रस्ताव की आलोचना की है। भाजपा ने प्रस्ताव को लेकर कहा है कि यह सदन के समय की बर्बादी है, क्योंकि नए कानून पहले से ही लागू हो चुके हैं। साथ ही टीएमसी सदस्यों के उन दावों को खारिज कर दिया कि नए कानून "कठोर और जनविरोधी" थे।
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दो दिन चर्चा के बाद पारित किया प्रस्ताव
राज्य के कानून मंत्री मलय घटक और अन्य तृणमूल कांग्रेस सदस्यों द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर दो दिवसीय चर्चा के बाद इसे सदन ने ध्वनि मत से पारित कर दिया।

प्रस्ताव में केंद्र से पश्चिम बंगाल सरकार के माध्यम से नए कानूनों की समीक्षा करने का आग्रह किया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि सुशासन के हित में न्यायविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों के बीच सर्वसम्मति के विचार विकसित किए जा सकें और मौलिक अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा की जा सके।

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टीएमसी ने नए कानूनों को बताया जनविरोधी
सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए कानून मंत्री मलय घटक ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के कई न्यायविदों की तरफ से तीनों नए कानूनों की विस्तृत जांच में पाया गया है कि इनमें से कई प्रावधान पुराने तीन कानूनों के मूल प्रावधानों की तुलना में बहुत अधिक कठोर और जनविरोधी हैं। उन्होंने कहा कि तीनों विधेयक पिछले साल 20 दिसंबर को लोकसभा में 147 सांसदों को संसद से निलंबित किए जाने के बाद और अगले दिन राज्यसभा में बिना पर्याप्त चर्चा के पारित किए गए थे।


जुलाई महीने से देश में लागू हो गए तीन नए कानून
बता दें कि तीन नए आपराधिक कानून - भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम एक जुलाई से देश भर में लागू हो गए हैं, जिन्होंने क्रमशः भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है। 





 

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