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Bengal: चुनावी हार के बाद टीएमसी में अंदरूनी हलचल, सीएम शुभेंदु से रितब्रत-संदीपन की मुलाकात पर चर्चाएं तेज

Wed, 27 May 2026 01:09 AM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Pavan Updated Wed, 27 May 2026 01:09 AM IST
सार

इस मुलाकात के बाद रितब्रत बनर्जी ने कहा कि उन्होंने सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से शिष्टाचार के तौर पर मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वे रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाते रहेंगे। जब उनसे पूछा गया कि अचानक मंगलवार को ही मिलने क्यों पहुंचे, तो उन्होंने कहा कि पहले मौका नहीं मिल पाया था। वहीं संदीपन साहा ने भी कहा कि यह सिर्फ संयोग था।

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Bengal: Assembly encounter with Suvendu fuels fresh chatter around TMC's outspoken MLAs
शुभेंदु अधिकारी, सीएम, पश्चिम बंगाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो विधायकों रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा की विधानसभा में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात ने नए राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब चुनावी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और अंदरूनी चर्चा की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। मंगलवार को दोनों विधायक विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस से मिलने पहुंचे थे। उसी समय मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी वहां मौजूद थे। आधिकारिक तौर पर इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
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दरअसल, कुछ दिन पहले भी रितब्रत बनर्जी की दिल्ली के पुराने बंग भवन में शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं को बातचीत और मुस्कुराते हुए देखा गया था, जिसके बाद से ही बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें लगाई जा रही थीं। रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर खुलकर अपनी राय रखने वाले नेताओं में शामिल रहे हैं। चुनाव में पार्टी की हार के बाद हुई एक बंद कमरे की बैठक में दोनों नेताओं ने संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठाए थे। बताया गया कि उन्होंने प्रचार अभियान और नेतृत्व के फैसलों पर भी नाराजगी जताई थी।
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इसी वजह से विधानसभा में हुई ताजा मुलाकात को सामान्य घटना नहीं माना जा रहा। हालांकि बाहर आने के बाद दोनों नेताओं ने किसी भी राजनीतिक महत्व से इनकार किया। रितब्रत बनर्जी ने कहा कि उन्होंने सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से शिष्टाचार के तौर पर मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वे रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाते रहेंगे। जब उनसे पूछा गया कि अचानक मंगलवार को ही मिलने क्यों पहुंचे, तो उन्होंने कहा कि पहले मौका नहीं मिल पाया था। वहीं संदीपन साहा ने भी कहा कि यह सिर्फ संयोग था। उन्होंने कहा कि वे नए विधायक के तौर पर अध्यक्ष से मिलने गए थे और संयोग से मुख्यमंत्री वहां मौजूद थे। उन्होंने यह भी कहा कि वह पहले शुभेंदु अधिकारी के साथ राजनीति कर चुके हैं, लेकिन इस मुलाकात का कोई और मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में इस तरह की मुलाकातें अक्सर बड़े संकेत देती हैं, खासकर तब जब संबंधित नेता अपनी ही पार्टी से असहज दिखाई दे रहे हों।


रितब्रत बनर्जी ने यह भी खुलासा किया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विपक्षी विधायकों को प्रशासनिक समीक्षा बैठकों में शामिल करने की बात दोबारा उठाई। उन्होंने कहा कि राजनीति और प्रशासन अलग-अलग चीजें हैं और अगर विपक्षी जनप्रतिनिधियों को विकास संबंधी बैठकों में बुलाया जाता है तो उन्हें जरूर जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर 15 साल में कोई काम नहीं हुआ तो अब उसे सुधारने में क्या दिक्कत है?' इस बयान को भी राजनीतिक हलकों में खास संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। रितब्रत बनर्जी ने अपने पुराने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह पहले वामपंथी सांसद थे तब उन्हें प्रशासनिक बैठकों में नहीं बुलाया जाता था, लेकिन बाद में टीएमसी सांसद रहने के दौरान उन्होंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया।

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उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां डीएमके और एआईएडीएमके राजनीतिक विरोधी होने के बावजूद राज्य के हितों के लिए एकजुट हो जाते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाना सही नहीं होता। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उनके ये बयान टीएमसी के भीतर चल रही बहस और असंतोष की ओर इशारा कर रहे हैं। इसी बीच वरिष्ठ टीएमसी नेता कुनाल घोष ने भी हाल में पार्टी के भीतर ज्यादा खुली चर्चा और मजबूत राजनीतिक संवाद की जरूरत बताई थी। फिलहाल टीएमसी की ओर से इस पूरे मामले को सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर चल रही हलचल के बीच इस मुलाकात ने बंगाल की राजनीति को एक नया चर्चा का विषय जरूर दे दिया है।
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