Snake Bite: जिला अस्पतालों में सर्पदंश रोगियों के लिए आरक्षित होंगे बेड, मसौदा तैयार, 12 राज्यों पर अधिक जोर
केंद्र ने राज्यों से कहा है कि एंटी वेनम (एएसवी) को राज्य सरकार अपनी आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल करें। इनकी खरीद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से राष्ट्रीय नि:शुल्क दवा पहल के तहत होगी।
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देश के सभी जिला अस्पतालों में सर्पदंश रोगियों के लिए बिस्तर आरक्षित होंगे। साथ ही प्राथमिक और सामुदायिक स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों पर विष विरोधी दवा (एंटीवेनम) भी उपलब्ध होगी, जिसे आगामी दिनों में आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल किया जाएगा। राज्यों को दवा खरीदने में केंद्र की ओर से सहायता प्रदान की जाएगी।
ये फैसले राष्ट्रीय सर्पदंश जहर नियंत्रण कार्य योजना (एनएपीएसई) के तहत लिए गए हैं, जिसका मसौदा हाल ही में केंद्र सरकार के सेंटर फॉर वन हेल्थ ने तैयार किया है। इस कार्य योजना के जरिये राज्यों को साल 2030 तक सर्पदंश के मामलों पर नियंत्रण में लाने का लक्ष्य रखा गया है।
20 मिनट में सभी जांचें
मसौदे के अनुसार, सर्पदंश के मामलों के लिए एंबुलेंस सेवा उपलब्ध करानी होगी। अस्पताल पहुंचने के बाद 20 मिनट के भीतर रोगी की सभी जांच जैसे रक्त का थक्का जमने का परीक्षण, पीक फ्लो मीटर, मूत्र विश्लेषण, प्रोथ्रोम्बिन, प्लेटलेट, थक्का हटने का समय, यकृत और गुर्दे का कार्य परीक्षण होगा। जिला अस्पतालों में कम से कम एक वेंटिलेशन यूनिट वाला बिस्तर सर्पदंश के लिए आरक्षित करना होगा। जिन जिलों को संदिग्ध माना गया है वहां के अस्पतालों को सबसे ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा है। इसके अलावा आपातकालीन औषधियों की उपलब्धता और रेफरल सेवा भी उपलब्ध करानी होगी।
प्रतिकूल प्रभावों के लिए बनेगी समिति
केंद्र ने राज्यों से कहा है कि एंटी वेनम (एएसवी) को राज्य सरकार अपनी आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल करें। इनकी खरीद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से राष्ट्रीय नि:शुल्क दवा पहल के तहत होगी। एएसवी की खरीद विकेंद्रीकृत तरीके से की जा रही है, जिसे सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराना होगा। प्रतिकूल प्रभावों का पता करने के लिए हर जिले में समितियां बनाई जाएंगी।
19 साल की स्थिति का दिया हवाला
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में साल 2000 से 2019 तक सर्पदंश के 70 फीसदी मामले उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, गुजरात सहित 12 राज्यों में मिले। इनमें से अधिकतर मामले बारिश के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आए हैं, जबकि 26 करोड़ से ज्यादा भारतीय आबादी सर्पदंश के जोखिम वाले क्षेत्रों में रहती है। हर साल देश में औसतन 11 से 17 लाख तक सर्पदंश के मामले मिले हैं, जिनमें हर साल औसतन 58 हजार लोगों की मौत हुई है।
दुनिया में 1.37 लाख मौतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, सर्पदंश उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (एनटीडी) की श्रेणी में आता है। दुनियाभर में हर साल लगभग 1,37,880 लोग सांप के काटने के कारण मर जाते हैं। विश्व में इससे होने वाली मौतों का सबसे बड़ा हिस्सा भारत में है और ज्यादातर मामले ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाते हैं।