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Bar Council of India: विवाह के मामले को विधायिका पर छोड़ देना चाहिए, मौलिक अवधारण में परिवर्तन विनाशकारी होगा
Mon, 24 Apr 2023 05:53 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 24 Apr 2023 05:53 AM IST
सार
बीसीआई ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा, इस संवेदनशील मामले में शीर्ष अदालत का कोई भी फैसला हमारे देश की भावी पीढ़ी के लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकता है।
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Same Sex Marriage
- फोटो : Social Media
विस्तार
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने समलैंगिक विवाह के मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर गंभीर चिंता जताई है। बीसीआई का कहना है कि अदालत की ओर से विवाह की मौलिक अवधारण में परिवर्तन करना विनाशकारी होगा और इस मामले को विधायिका पर ही छोड़ दिया जाना चाहिए।
बीसीआई ने रविवार को एक प्रस्ताव पारित कर कहा, इस संवेदनशील मामले में शीर्ष अदालत का कोई भी फैसला हमारे देश की भावी पीढ़ी के लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकता है। भारत दुनिया के सबसे सामाजिक-धार्मिक रूप से विविध देशों में से एक है जिसमें विभिन्न तरह की मान्यताएं हैं। इसलिए, कोई भी मामला जो मौलिक सामाजिक संरचना के साथ छेड़छाड़ की संभावना रखता है, एक ऐसा मामला जिसका हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वासों पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है, उसे आवश्यक रूप से विधायी प्रक्रिया के माध्यम से ही आना चाहिए।
इस प्रस्ताव को एक संयुक्त बैठक में स्वीकार किया गया जिसमें सभी राज्य बार काउंसिल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रस्ताव में कहा गया है, विधायिका की ओर से बनाए गए कानून सही मायने में लोकतांत्रिक होते हैं क्योंकि वे पूरी तरह से परामर्श प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद बनाए जाते हैं।
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बीसीआई ने रविवार को एक प्रस्ताव पारित कर कहा, इस संवेदनशील मामले में शीर्ष अदालत का कोई भी फैसला हमारे देश की भावी पीढ़ी के लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकता है। भारत दुनिया के सबसे सामाजिक-धार्मिक रूप से विविध देशों में से एक है जिसमें विभिन्न तरह की मान्यताएं हैं। इसलिए, कोई भी मामला जो मौलिक सामाजिक संरचना के साथ छेड़छाड़ की संभावना रखता है, एक ऐसा मामला जिसका हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वासों पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है, उसे आवश्यक रूप से विधायी प्रक्रिया के माध्यम से ही आना चाहिए।
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इस प्रस्ताव को एक संयुक्त बैठक में स्वीकार किया गया जिसमें सभी राज्य बार काउंसिल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रस्ताव में कहा गया है, विधायिका की ओर से बनाए गए कानून सही मायने में लोकतांत्रिक होते हैं क्योंकि वे पूरी तरह से परामर्श प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद बनाए जाते हैं।
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