दिवाला कानून से तीन लाख करोड़ के फंसे कर्ज के समाधान में मदद मिली
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दिवाला कानून लागू होने के बाद से दो साल में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 लाख करोड़ रुपये के फंसे कर्ज का समाधान करने में मदद मिली है। कॉरपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने शनिवार को बताया कि दिवाला व ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत अब तक 9,000 से ज्यादा मामले समाधान के लिए आए हैं। आईबीसी का करीब तीन लाख करोड़ रुपये की फंसी परिसंपत्तियों पर असर हुआ है, जिससे फंसे कर्ज का समाधान हुआ। इस राशि में समाधान योजना में हुई वसूली और एनसीएलटी के समक्ष आने से पहले निपटाए मामलों से प्राप्त राशि भी शामिल है।
कॉरपोरेट मामलों के सचिव ने कहा, 9 हजार से ज्यादा मामले समाधान के लिए आए
श्रीनिवास ने कहा कि 3,500 मामलों को एनसीएलटी में लाने से पहले ही सुलझा लिया गया। इससे 1.2 लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटारा हुआ। आईबीसी के तहत एनसीएलटी की अनुमति के बाद ही मामले को समाधान के लिए आगे बढ़ाया जाता है। करीब 1,300 मामलों को समाधान के लिए रखा गया।
इनमें करीब 400 मामलों में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 60 मामलों में समाधान योजना को मंजूरी मिल गई है, 240 मामलों में परिसमापन के आदेश दिए गए हैं, जबकि 126 मामलों में अपील की गई है। इन मामलों में जिनका समाधान हो गया उनसे अब तक 71,000 करोड़ रुपये की वसूली हुई है