बैंक का पैसा 'डकारने' वालों के चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक
शराब व्यवसायी विजय माल्या के बैंकों के पैसे डकार कर विदेश भागने के मामले ने संसद को ऐसी घटनाओं पर सोचने पर मजबूर कर दिया है। आगे से ऐसे मामलों पर लगाम कसने के लिए संसद की एथिक्स कमेटी ने कुछ कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार भाजपा सांसद भूपेन्द्र यादव की अध्यक्षता में बनी दिवाला और दिवालियापन समिति ने इस संबंध में कुछ सिफारिशें की हैं।
जैसे चुनाव के माध्यम से या किसी स्थानीय प्राधिकारी में किसी भी सार्वजनिक पद के लिए चुने जाने वाले व्यक्ति को दिवालिया होने पर अपने कुर्सी से हाथ धोना पड़ सकता है।
अगर ये सिफारिशें मान ली जाती हैं और संसद के मौजूदा सत्र में इस बिल पर मोहर लग जाती है तो आने वाले समय में बैंकों का पैसा डकारने वाला व्यक्ति स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा और संसद तक का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो जाएगा।
माल्या मामले के बाद नियमों को सख्त करने की तैयारी
हालांकि संविधान के अनुच्छेद 102 (c) में बैंक से दिवालिया व्यक्तियों के लोकसभा और राज्यसभा चुनाव लड़ने पर अभी कोई रोक नहीं है। लेकिन कमेटी चाहती है कि अब इस दिशा में कोई सख्त कदम उठाए जाएं।
बता दें कि हाल के समय में विजय माल्या बैंकों के ऐसे सबसे बड़े डिफाल्टर बनकर सामने आए हैं जो संसद सदस्य भी हैं। वैसे भी पिछले कुछ समय में संसद और विधानसभाओं में व्यापारी और व्यवासायियों का प्रतिनिधित्व काफी बढ़ा है।
इनमें से काफी लोगों के खिलाफ बैंकों से जुड़े मामले सामने आते हैं, इसलिए कमेटी चाहती है कि जिस किसी व्यक्ति को बैंक की ओर से दिवालिया घोषित कर दिया जाए वह लोक सेवक या ट्रस्टी के रूप में नियुक्त होने के लिए भी अयोग्य घोषित हो।