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क्या भारत से संबंध सुधारना चाह रहे PM रहमान?: शीर्ष बांग्लादेशी खुफिया अफसर को गोपनीय दौरे पर भेजा, जानिए मकसद
Wed, 11 Mar 2026 09:25 AM IST
Shivam Garg
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shivam Garg
Updated Wed, 11 Mar 2026 09:25 AM IST
सार
India-Bangladesh Relations: क्या तारिक रहमान की नई सरकार भारत के साथ रिश्तों को सुधार पाएगी? बांग्लादेश के इंटेलिजेंस चीफ मेजर-जनरल कैसर राशिद चौधरी ने दिल्ली का दौरा किया, जहां सुरक्षा और खुफिया सहयोग को लेकर अहम बैठकें हुईं। अब सवाल यह है, क्या सीमा और आतंकवाद पर भी असर दिखेगा?
India-Bangladesh Relations: क्या तारिक रहमान की नई सरकार भारत के साथ रिश्तों को सुधार पाएगी? बांग्लादेश के इंटेलिजेंस चीफ मेजर-जनरल कैसर राशिद चौधरी ने दिल्ली का दौरा किया, जहां सुरक्षा और खुफिया सहयोग को लेकर अहम बैठकें हुईं। अब सवाल यह है, क्या सीमा और आतंकवाद पर भी असर दिखेगा?
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भारत-बांग्लादेश संबंध
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
बांग्लादेश की नई सरकार के सत्ता में आने के बाद तारिक रहमान ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, 1 मार्च से 3 मार्च तक बांग्लादेश की शीर्ष रक्षा खुफिया एजेंसी DGFI के प्रमुख मेजर-जनरल कैसर राशिद चौधरी ने दिल्ली का दौरा किया। यह तारिक रहमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद किसी शीर्ष अधिकारी की पहली भारत यात्रा थी।
दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठकें
एक रिपोर्ट के अनुसार, डीजीएफआई प्रमुख ने अपनी यात्रा के दौरान RAW प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। 2 मार्च को आयोजित एक निजी रात्रिभोज में दोनों देशों के खुफिया प्रमुखों ने साझा खुफिया जानकारी और सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने पर विस्तार से चर्चा की।
सुरक्षा सहयोग का पहला परिणाम
भारत लंबे समय से बांग्लादेश की धरती पर हो रही भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंतित रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था में गिरावट आई थी। तारिक रहमान सरकार इस गिरावट को सुधारने और सुरक्षा संबंध मजबूत करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम कर रही है। इस सुरक्षा सहयोग का पहला बड़ा परिणाम पश्चिम बंगाल में देखा गया, जब राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बांग्लादेश के राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के दो मुख्य आरोपियों को उत्तर 24 परगना के बनगांव इलाके से गिरफ्तार किया।
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हादी हत्याकांड और कूटनीतिक प्रयास
हादी को दिसंबर 2025 में ढाका में गोली मारी गई थी, जिसके बाद सिंगापुर में उनकी मौत हुई। आरोपियों की पहचान फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई। बांग्लादेश सरकार ने आरोपियों तक काउंसुलर एक्सेस मांगी है और भारत से सहयोग की उम्मीद जताई है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शामा ओबैद इस्लाम ने कहा कि सरकार हादी हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी स्थापित नियमों का पालन करेगी और आरोपियों को वापस लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास करेगी।
सीमा सुरक्षा और भविष्य का सहयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर-जनरल कैसर राशिद का दिल्ली दौरा और उसके तुरंत बाद हादी हत्यारों की भारत में गिरफ्तारी यह संकेत देते हैं कि तारिक रहमान सरकार भारत के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को नई दिशा देने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और खुफिया साझेदारी में यह सहयोग कितना प्रभावी साबित होता है।
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दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठकें
एक रिपोर्ट के अनुसार, डीजीएफआई प्रमुख ने अपनी यात्रा के दौरान RAW प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। 2 मार्च को आयोजित एक निजी रात्रिभोज में दोनों देशों के खुफिया प्रमुखों ने साझा खुफिया जानकारी और सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने पर विस्तार से चर्चा की।
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सुरक्षा सहयोग का पहला परिणाम
भारत लंबे समय से बांग्लादेश की धरती पर हो रही भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंतित रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था में गिरावट आई थी। तारिक रहमान सरकार इस गिरावट को सुधारने और सुरक्षा संबंध मजबूत करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम कर रही है। इस सुरक्षा सहयोग का पहला बड़ा परिणाम पश्चिम बंगाल में देखा गया, जब राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बांग्लादेश के राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के दो मुख्य आरोपियों को उत्तर 24 परगना के बनगांव इलाके से गिरफ्तार किया।
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हादी हत्याकांड और कूटनीतिक प्रयास
हादी को दिसंबर 2025 में ढाका में गोली मारी गई थी, जिसके बाद सिंगापुर में उनकी मौत हुई। आरोपियों की पहचान फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई। बांग्लादेश सरकार ने आरोपियों तक काउंसुलर एक्सेस मांगी है और भारत से सहयोग की उम्मीद जताई है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शामा ओबैद इस्लाम ने कहा कि सरकार हादी हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी स्थापित नियमों का पालन करेगी और आरोपियों को वापस लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास करेगी।
सीमा सुरक्षा और भविष्य का सहयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर-जनरल कैसर राशिद का दिल्ली दौरा और उसके तुरंत बाद हादी हत्यारों की भारत में गिरफ्तारी यह संकेत देते हैं कि तारिक रहमान सरकार भारत के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को नई दिशा देने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और खुफिया साझेदारी में यह सहयोग कितना प्रभावी साबित होता है।