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Badlapur: हिरासत में आरोपी की मौत का मामला; पुलिसकर्मियों को मिली राहत, मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट पर लगाई गई रोक

Wed, 26 Feb 2025 01:14 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 26 Feb 2025 01:14 PM IST
सार

Badlapur Case: बदलापुर स्कूल यौन उत्पीड़न मामले में आरोपित एक आरोपी की हिरासत में मौत के मामले में पुलिसकर्मियों को आंशिक राहत मिली है। एक सत्र न्यायालय ने उस मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट के निष्कर्षों को रोक दिया है, जिसमें आरोपित की कथित मुठभेड़ को संदिग्ध बताया गया था। 

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Badlapur case: Court keeps in abeyance findings indicting cops for 'encounter' of accused, News in hindi
बदलापुर केस - फोटो : PTI

विस्तार

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर में एक स्कूल में दो नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण मामले में आरोपी की हिरासत में मौत के मामले में पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट ने कुछ राहत दी है। एक सेशन कोर्ट ने 21 फरवरी को एक आदेश में मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट को रोक दिया है, जिसमें आरोपियों के कथित मुठभेड़ को लेकर संदेह जताया गया था। सेशन कोर्ट के जज डीआर देशपांडे ने कहा कि राज्य के क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) की तरफ से आरोपी की हिरासत में मौत की जांच स्वतंत्र रूप से जारी रहेगी। 
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क्या है पूरा मामला?
बता दें कि, आरोपी अक्षय शिंदे को अगस्त 2024 में बदलापुर स्कूल में दो नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 23 सितंबर 2024 को उसे पुलिस ने कथित मुठभेड़ में मार दिया, जबकि उसे तलोजा जेल से कलीमांन पूछताछ के लिए लाया गया था। इस मुठभेड़ को लेकर पुलिस ने दावा किया कि आरोपी अक्षय शिंदे ने एक पुलिसकर्मी का बंदूक छीनकर फायर किया था, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी गोलीबारी की।
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बता दें कि, स्कूल में दो बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटना से पूरे इलाके में आक्रोश देखा गया था। जानकारी के मुताबिक चार और छह साल की बच्चियों के साथ यह घटना 12 और 13 अगस्त को घटी थी। दरअसल, आरोपी अक्षय शिंदे को 1 अगस्त को टॉयलेट साफ करने के लिए अनुबंध के आधार पर स्कूल में भर्ती किया गया था।
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5 मार्च को होगी मामले की अगली सुनवाई
मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय शिंदे और अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था और उनकी तरफ से की गई गोलीबारी को अनावश्यक बताया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह मुठभेड़ फर्जी हो सकती है, जैसा आरोपित के परिवार ने दावा किया था। सत्र न्यायालय ने आदेश दिया कि मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट के निष्कर्षों को अगले आदेश तक रोक दिया जाए। हालांकि, सीआईडी की जांच जारी रहेगी। इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च को तय की है।



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