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100 फीसदी बढ़ी अस्पताल में पैदा होने वाले बच्चों की संख्या
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Mar 2017 04:18 AM IST
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देश में स्वास्थ्य क्षेत्र से अच्छी खबर आई है। पिछले करीब नौ वर्षों में देश में अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में 100 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं लिंगानुपात भी 914 से बढ़कर 919 पर पहुंच गया है। यानी अब देश में एक हजार लड़कों पर 919 लड़कियां हैं।
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से मंगलवार को नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (एनएफएचएस) की रिपोर्ट जारी की गई। इसमें स्वास्थ्य सचिव सीके मिश्रा ने बताया कि हेल्थ सेक्टर में पिछले आठ से नौ वर्षों में बहुत तेजी से सुधार हुआ है। आने वाले वर्ष में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।
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स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट-2015-2016 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासति प्रदेशों को शामिल किया गया है। जिला स्तर पर भी सर्वे किया गया है। एनएफएचएस-3 की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में 38.7 फीसदी बच्चों का जन्म अस्पताल में होता था जबकि एनएफएचएस-4 में 78.9 फीसदी बच्चों का जन्म अस्पताल में हुआ है। सरकारी अस्पतालों में 34 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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एनएफएचएच-3 में जन्म लेने वाले प्रति हजार बच्चों के मुकाबले बच्चियों की संख्या 914 थी जो सर्वे रिपोर्ट चार में 919 पहुंच गई है। केरल में प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या सबसे ज्यादा 1047 है। मेघालय में प्रति हजार 1009 और छत्तीसगढ़ में प्रति हजार 977 रिकार्ड की गई है।
शिशु मृत्यु दर भी घटी
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एनएफएचएस-3 में जन्म लेने वाले एक हजार बच्चों में से 57 बच्चों की मौत हो जाती थी, जो एनएफएचएस-4 में घटकर 41 पहुंच गई है। इस दिशा में त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा में 20 फीसदी से ज्यादा बच्चों की मौत में गिरावट दर्ज की गई है। 1992-93 में हुए पहले एनएफएचएस में प्रति हजार जन्म लेने वाले बच्चों में 79 बच्चों की मौत हो जाती थी।
एनएफएचएस-चार की अन्य खास बातें
- देश में करीब 62 फीसदी बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया गया है, जो एनएफएचएस-3 में 44 फीसदी रिकार्ड किया गया था। मिशन इंद्रधनुष अभियान के बाद इस दिशा में प्रभावी सुधार होने की उम्मीद है। संपूर्ण टीकाकरण अभियान में यूपी ने 28 और पंजाब ने 29 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है।
- एनएफएचएस-3 में छह माह से 59 माह तक के 69 फीसदी बच्चे एनीमिया से पीड़ित थे जबकि एनएफएचएस-4 में यह प्रतिशत घटकर 58 फीसदी रह गया है। इस दिशा में असम ने सबसे बेहतर काम किया है, इसके बाद छत्तीसगढ़, मिजोरम और ओडिशा का स्थान आता है।
- परिवार नियोजन के लिए महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कांट्रासेप्टिव में दो फीसदी की कमी आई है जबकि पुरुषों में कंडोम के इस्तेमाल में वृद्धि दर्ज की गई है।
एनएफएचएस-चार की अन्य खास बातें
- देश में करीब 62 फीसदी बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया गया है, जो एनएफएचएस-3 में 44 फीसदी रिकार्ड किया गया था। मिशन इंद्रधनुष अभियान के बाद इस दिशा में प्रभावी सुधार होने की उम्मीद है। संपूर्ण टीकाकरण अभियान में यूपी ने 28 और पंजाब ने 29 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है।
- एनएफएचएस-3 में छह माह से 59 माह तक के 69 फीसदी बच्चे एनीमिया से पीड़ित थे जबकि एनएफएचएस-4 में यह प्रतिशत घटकर 58 फीसदी रह गया है। इस दिशा में असम ने सबसे बेहतर काम किया है, इसके बाद छत्तीसगढ़, मिजोरम और ओडिशा का स्थान आता है।
- परिवार नियोजन के लिए महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कांट्रासेप्टिव में दो फीसदी की कमी आई है जबकि पुरुषों में कंडोम के इस्तेमाल में वृद्धि दर्ज की गई है।