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Dipta Ghosh: बीटेक की छात्रा अच्छी नौकरी छोड़ बनी कैब ड्राइवर, अनोखी है दीप्ता की कहानी
Fri, 05 May 2023 03:46 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
एएनआई, कोलकाता
एएनआई, कोलकाता
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 05 May 2023 03:46 AM IST
सार
दीप्ता ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक की। छह साल के करियर में कई अच्छी कंपनियों में उन्होंने नौकरी की।
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कैब ड्राइवर दीप्ता घोष
- फोटो : ANI
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विस्तार
आज की महिलाएं पुराने रीति रिवाजों और सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर न सिर्फ आगे बढ़ रही हैं। बल्कि खुद के दम पर सफलता के फलक को छू कर लोगों के लिए मिसाल कायम कर रही हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है कोलकाता की महिला उबर कैब ड्राइवर दीप्ता घोष की। इंजीनियर से कैब ड्राइवर बनी दीप्ता घोष रूढ़ियों को तोड़ रही हैं। पिता की मौत के बाद दीप्ता ने मां और छोटी बहन को छोड़कर दूर न जाने की वजह से अच्छी नौकरी तक छोड़ दी। दीप्ता ने कहा कि वह कोई और नौकरी या किसी कंपनी के लिए काम नहीं करना चाहती क्योंकि वह अपनी खुद की बॉस है।
पिता की मौत के बाद नौकरी छोड़ बनी ड्राइवर
दीप्ता ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक की। छह साल के करियर में कई अच्छी कंपनियों में उन्होंने नौकरी की। इस बीच उनका करियर भी ऊंचाइयां छू रहा था। 2020 में उनके पिता की मौत हो गई। दीप्ता के परिवार में उनकी मां और एक छोटी बहन हैं। दीप्ता के मुताबिक, सभी नौकरियां ऐसी थीं, जिनके लिए उन्हें कोलकाता से बाहर जाना पड़ता। वह अपनी मां और बहन को कोलकाता में अकेली नहीं छोड़ना चाहती थीं।
2021 में हासिल किया कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस
दीप्ता घोष ने 2021 में कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया। घोष के मुताबिक, कमर्शियल लाइसेंस मिलने पर मां ने कैब ड्राइविंग शुरू करने का सुझाव दिया। कैब ड्राईविंग में महारत हासिल करने के लिए उन्हें तीन माह का वक्त लगा। फिलहाल वह सप्ताह में छह दिन कैब चलाती हैं। रोजाना 6 से 7 घंटे ड्राइविंग करके लगभग 35,000 से 40,000 रुपये प्रति माह कमाती हैं। दीप्ता ने कहा कि वह कोई और नौकरी या किसी कंपनी के लिए काम नहीं करना चाहती क्योंकि वह अपनी खुद की बॉस है और डिवाइस को लॉग ऑफ करके ड्यूटी से जा सकती है।
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पिता की मौत के बाद नौकरी छोड़ बनी ड्राइवर
दीप्ता ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक की। छह साल के करियर में कई अच्छी कंपनियों में उन्होंने नौकरी की। इस बीच उनका करियर भी ऊंचाइयां छू रहा था। 2020 में उनके पिता की मौत हो गई। दीप्ता के परिवार में उनकी मां और एक छोटी बहन हैं। दीप्ता के मुताबिक, सभी नौकरियां ऐसी थीं, जिनके लिए उन्हें कोलकाता से बाहर जाना पड़ता। वह अपनी मां और बहन को कोलकाता में अकेली नहीं छोड़ना चाहती थीं।
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2021 में हासिल किया कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस
दीप्ता घोष ने 2021 में कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया। घोष के मुताबिक, कमर्शियल लाइसेंस मिलने पर मां ने कैब ड्राइविंग शुरू करने का सुझाव दिया। कैब ड्राईविंग में महारत हासिल करने के लिए उन्हें तीन माह का वक्त लगा। फिलहाल वह सप्ताह में छह दिन कैब चलाती हैं। रोजाना 6 से 7 घंटे ड्राइविंग करके लगभग 35,000 से 40,000 रुपये प्रति माह कमाती हैं। दीप्ता ने कहा कि वह कोई और नौकरी या किसी कंपनी के लिए काम नहीं करना चाहती क्योंकि वह अपनी खुद की बॉस है और डिवाइस को लॉग ऑफ करके ड्यूटी से जा सकती है।
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