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आजादी का अमृत महोत्सव : डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 95 साल की बहू इंदिरा गोपाल का एक उदास एकांतवास

दयाशंकर शुक्ल सागर दयाशंकर शुक्ल सागर
Updated Sun, 21 Nov 2021 06:17 AM IST
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सार
इंदिरा गोपाल की शादी सर्वपल्ली के बेटे और प्रसिद्ध इतिहासकार एस. गोपाल से हुई थी। वे ऑक्सफोर्ड और जेएनयू में शिक्षक रहे। 2002 में उनका देहांत हो गया। इंदिरा अकेली थीं, जिन्होंने सबसे लंबा वक्त सर्वपल्ली राधाकृष्णन के साथ गुजारा।
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Azadi Ka Amrit Mahotsav : Dr Sarvepalli Radhakrishnans 95 year old daughter-in-law Indira Gopal, Know all About Her
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की बहू इंदिरा गोपाल। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मायलापुर : चेन्नई की चमकदार मेट्रोपोलिटन सिटी में सर्वपल्ली राधाकृष्णन का घर खोजना इतना मुश्किल हो जाएगा ये कतई नहीं सोचा था। चेन्नई के बौद्धिक जगत के कई मित्र सर्वपल्ली की बहू, इंदिरा गोपाल का सम्पर्क नंबर खोजने में नाकाम रहे। सिर्फ ये पता चला कि मायलापुर में, जहां उनका बंगला है, उस स्ट्रीट का नाम 'डॉ. राधाकृष्णन सलाई' है। 'सलाई' तमिल शब्द है जिसका मतलब है 'रोड'। ये बेहद पॉश इलाका है।



हम यू-टर्न लेकर फिर वापस इस रोड की दूसरी ओर आए और पता पूछते-पूछते पेड़ों के झुरमुट के पीछे एक सफेद रंग की इमारत के पास आकर रुक गए। पुराने से लोहे के गेट पर 'गिरिजा' लिखा है। हम सही पते पर थे, क्योंकि गिरिजा सर्वपल्ली की बड़ी बेटी का नाम है। शाम ढल चुकी है। बंगले के कोने वाले हिस्से में केयरटेकर का पूरा परिवार रहता है। केयरटेकर मस्तान बताता है -' ये मैडम के आराम का वक्त है।'


नर्स अगली दोपहर मुलाकात का वक्त तय कर देती है। दोपहर को मैं फिर उस ऐतिहासिक बंगले में दाखिल होता हूं, जहां सर्वपल्ली की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा गुजरा था। कलकत्ता विवि में उनका वेतन 500 से बढ़कर 1000 रु. हो गया। इसके बाद वे 1938 में बीएचयू के कुलपति बने। नर्स मुझे सर्वपल्ली के निजी कमरे में ले जाती है, जहां इंदिरा गोपाल कूल्हे की हड्डी टूट जाने के कारण तीन साल से नर्सिंग केयर बेड पर हैं।

दरवाजे के ठीक सामने वे तकिए के सहारे बैठीं मेरा इंतजार कर रही हैं। उनके सारे बाल सफेद हो चुके हैं। सफेद रंग का सूती गाउन, गले में पतली सोने की चेन, गोरे से माथे पर छोटी-सी लाल रंग की बिंदी, काले फ्रेम का चश्मा और उसमें झांकती चमकीली आंखें। आवाज धीमी लेकिन स्पष्ट। 'वेलकम मिस्टर शुक्ला।' वे सौम्य मुस्कान व गर्मजोशी से अपना झुरियों से भरा कोमल हाथ आगे बढ़ा देती हैं।

'तो आप 94 की हो गईं?' 'नहीं 95 की।' वे मुस्कुराते हुए तथ्य दुरुस्त करती हैं। उनकी शादी सर्वपल्ली के बेटे और प्रसिद्ध इतिहासकार एस. गोपाल से हुई थी। वे ऑक्सफोर्ड और जेएनयू में शिक्षक रहे। 2002 में उनका देहांत हो गया। इंदिरा अकेली थीं जिन्होंने सबसे लम्बा वक्त सर्वपल्ली राधाकृष्णन के साथ गुजारा। सर्वपल्ली के देश के पहले उपराष्ट्रपति बनने के बाद वे दिल्ली आ गईं।

सर्वपल्ली को राष्ट्रपति का दूसरा टर्म मिलना तय था। लेकिन 26 जनवरी 1967 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति के देश के नाम संबोधन में सर्वपल्ली ने देश के संसाधनों के दुरुपयोग की बात उठाकर पीएम इंदिरा को नाराज कर दिया। वो इंदिरा, जिन्होंने  भारत रत्न मिलने पर कभी अपने बधाई संदेश में लिखा था-'हम सबने आपको कई सालों से भारत के एक सच्चे 'रत्न' की तरह माना है।

अब ये केवल इसकी आधिकारिक घोषणा हुई है।' 'भारत रत्न' को दूसरा कार्यकाल नहीं मिला। निराश सर्वपल्ली 1967 में अपने इसी चेन्नई वाले घर लौट आए और अंतिम आठ साल उनके जीवन के बेहद एकांत, उदास, निराशा और यातना से भरे थे। देश की इस सबसे मुखर आवाज ने पहले अपनी वाणी खोई।

फिर उनके दार्शनिक दिमाग ने उनका संग छोड़ दिया और 17 अप्रैल 1975 को दिल की धड़कन रुकने के साथ उनकी जिंदगी की नाव अनंत यात्रा पर निकल गई। लेकिन इंदिरा गोपाल के मन में पुराने दिनों की कोई कड़वाहट नहीं है। वह याद करती हैं कि कैसे नेहरू और इंदिरा उनके घर खाने पर आते थे। '...और नेहरू, वे तो बिलकुल बच्चे थे।

खाने की मेज पर बैठने से पहले ही मिठाई निकाल कर खाने लगते।' वे करीब एक घंटे तक बतियाती रहीं। फिर व्हीलचेयर पर इंदिरा अपना घर दिखाती हैं। घर के बरामदे में, आंगन में, कमरों में सर्वपल्ली की हर छोटी-छोटी चीजें करीने से रखी हुई हैं।

उनका चश्मा, पेन, चाबियां, पेंटिंग, कैंची, उनकी नमकदानी, उनका ब्लैक एंड व्हाइट टीवी, ढेर सारी किताबें, डायरियां, उनका बड़ा-सा झूला, गांधी और टैगोर के साथ उनकी फोटो, पुराने फर्नीचर सब पर धूल की परत बिछ गई है। इंदिरा बीस साल से तन्हा जिंदगी गुजार रही हैं। 'ये अकेलापन आपको परेशान नहीं करता?' 'हां, मैंने दोस्त नहीं बनाए। कम्बख्त जिंदगी ऐसी ही है।'

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