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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : लोकप्रिय शिक्षक, नाइटहुड-भारत रत्न और ब्रिटिश रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट की उपाधियों से नवाजे गए

दयाशंकर शुक्ल सागर दयाशंकर शुक्ल सागर
Updated Sun, 21 Nov 2021 06:28 AM IST
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सार
आज़ादी के अमृत महोत्सव के समय हम पीछे मुड़कर देखें कि देश को बनाने में जिन्होंने अपना जीवन दे दिया उनकी विरासत को हमने कितना सहेजा है? उनकी स्मृतियों से हम कितनी शक्ति लेते हैं? इस महत्त्वपूर्ण अभियान के तहत अमर उजाला ने अपने प्रतिनिधियों को देश भर में भेजा। इस कड़ी में पढ़िए सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जन्मस्थली से रिपोर्ट...
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Dr Sarvepalli Radhakrishnan: Popular teacher, awarded with Knighthood, Bharat Ratna and British Royal Order of Merit
मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज की एक पुरानी तस्वीर। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राधाकृष्णन को 1931 में नाइटहुड, 1954 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न और 1963 में 'ब्रिटिश रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट' की मानद उपाधि दी गई। वह 'हेल्पेज इंडिया' के संस्थापकों में से एक थे। हेल्पेज इंडिया भारत में वंचित बुजुर्गों के लिए एक गैर-लाभकारी संगठन है। 



राधाकृष्णन को साहित्य में नोबेल पुरस्कार के लिए 6 बार और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 11 बार नामांकित किया गया था। 1962 में, ग्रीस के राजा भारत की राजकीय यात्रा पर आए। सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने उनका स्वागत करते हुए कहा: "महामहिम, आप हमारे अतिथि के रूप में आने वाले ग्रीस के पहले राजा हैं। सिकंदर बिन बुलाए आया था।"


राधाकृष्णन अपने छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। 1921 में जब कलकत्ता विश्वविद्यालय में उन्हें किंग जॉर्ज 5 की चेयर मिली तो मैसूर विश्वविद्यालय के छात्रों ने उन्हें ऐसी अभूतपूर्व विदाई दी जो आज तक किसी शिक्षक को नहीं मिली थी। घोड़े हटाकर फूलों से सजी बग्घी को छात्र खुद खींच कर कैम्पस से रेलवे स्टेशन तक ले गए।

शिक्षक दिवस...
कुछ छात्रों ने उनसे आग्रह किया कि वे उन्हें अपना जन्मदिन मनाने की इजाजत दें। राधाकृष्णन ने कहा- यह मेरे लिए गर्व की बात होगी कि मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय 5 सितंबर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाए। बाद में नेहरू सरकार ने 1962 से उनके जन्मदिन को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाने का एलान कर दिया।

तार्किक थी गांधीजी से पहली मुठभेड़
गांधीजी मद्रास आए तो सर्वपल्ली उनसे मिलने पहुंचे। कोई बात चली तो गांधीजी ने उन्हें दूध न पीने की सलाह दी। उनका तर्क था कि दूध में गोमांस के तत्व पाए जाते हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि इस हिसाब से तो सभी मनुष्य नरभक्षी हुए, क्योंकि मां के दूध को भी इंसानी मांस का हिस्सा समझा जा सकता है। गांधी ने चिकित्सा सुविधाओं पर कहा कि डॉक्टरों की जरूरत बहुत कम है।

आप देखिए जंगल में हजारों वनवासी कैसे ठीक हो जाते हैं। इस पर राधाकृष्णन की टिप्पणी थी-और इलाज के अभाव में जंगल में हजारों वनवासियों की मृत्यु भी हो जाती है। तब गांधीजी ने उनसे पूछा "ये सब आप कैसे जानते हैं?' राधाकृष्णन का जवाब था- 'फिर आप कैसे जानते हैं?'

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