खास खबर: देशभर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज पर डॉक्टरों-कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा तोहफा
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देशभर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टरों से लेकर अन्य कर्मचारियों तक के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना आयुष्मान भारत के जरिए सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज करने वालों को इंसेंटिव देने का निर्णय लिया है। अमर उजाला को मिली जानकारी के तहत यह इंसेंटिव प्रति डॉक्टर सालाना एक से तीन लाख रुपये तक हो सकता है।
सरकार ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर क्षमता से कई गुना ज्यादा मरीजों का इलाज करने वाले इन डॉक्टरों को अलग से सम्मान देने की योजना बनाई है। आयुष्मान भारत के तहत जितने भी मरीजों का सरकारी अस्पताल में उपचार किया जाएगा, अस्पताल उस इलाज की राशि के लिए क्लेम करेगा।
इसके लिए अस्पताल में बाकायदा अलग से कमेटी होगी, जो कि पूरी क्लेम प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार होगी। इस तरह से साल में क्लेम के जरिए आने वाला धन एकत्रित किया जाएगा। इसी का 25 फीसदी हिस्सा डॉक्टरों और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ को बतौर इंसेंटिव मिलेगा। जबकि शेष 75 फीसदी धन को उक्त अस्पताल की इमारत और गुणवत्ता पर खर्च किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस बारे में आयुष्मान भारत की गाइड लाइन में नए नियमों का समावेश कर दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि देश के जिला अस्पताल से लेकर एम्स तक में करीब 10 लाख डॉक्टर और 25 लाख पैरा मेडिकल स्टाफ है। इन सभी को आयुष्मान भारत के प्रति दिलचस्पी बढ़ाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। इंसेंटिव की बात करें तो डॉक्टर सालाना तीन लाख और पैरा मेडिकल स्टाफ करीब डेढ़ लाख तक क्लेम हासिल कर सकता है।
आयुष्मान मित्र को भी मिलेगा वेतन
इतना ही नहीं, हर अस्पताल में मरीजों को दिशा निर्देश देने और उनकी इलाज से जुड़ी परेशानी दूर करने के लिए सरकार ने आयुष्मान मित्र की तैनाती का निर्णय लिया है। इन आयुष्मान मित्रों को अस्पताल की ओर से ही वेतन दिया जाएगा।
जिला-राज्य स्तर पर दे सकेंगे शिकायत
सरकार ने मरीजों को भी बड़ी राहत देते हुए अस्पताल में इलाज न मिलने पर राज्य और जिला स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज कराने का प्रावधान किया है। जिला स्तर पर बनने वाली कमेटी डीजीआरसी का चेयरमैन जिला मजिस्ट्रेट को बनाया जाएगा। साथ ही राज्य स्तर की कमेटी में राज्य का सीईओ चेयरमैन होगा। 15 दिन के अंदर शिकायत का निपटारा होगा। समाधान न होने की दिशा में राष्ट्रीय कमेटी संज्ञान लेगी। इस पूरी प्रक्रिया की दिल्ली से मानीटरिंग की जाएगी।