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आयुष्मान भारत योजना का बढ़ेगा दायरा, निजी क्षेत्र चलाएंगे सरकारी अस्पताल

Fri, 19 Oct 2018 06:56 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 19 Oct 2018 06:56 PM IST
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Ayushman Bharat Yojana: Government planning on PPP Model in government hospitals for treatment
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मोदी सरकार आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा योजना को और ज्यादा प्रभावशाली बनाने की योजना की विचार कर रही है। सरकार की योजना है कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए हृदय, कैंसर और फेफड़े संबंधी बीमारियों के इलाज के लिये सरकारी जिला अस्पतालों और निजी क्षेत्र के बीच भागीदारी को बढ़ाया जाए। 

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आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा योजना को क्रियान्वयन करने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि नीति आयोग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय मिल कर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) वाले मॉडल पर काम कर रहा है। सरकार की योजना है कि छोटे कस्बों में रहने वाले लोगों को ह्दयघात, कैंसर, डाइबिटीज और फेफड़े संबंधित स्ट्रॉक जैसी गैर-संक्रमणीय बीमारियों के इलाज के लिए शहरों के धक्के न खाने पड़ें और निजी क्षेत्र की मदद से वहीं के जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में ही उनका इलाज हो जाए। 
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक सरकार इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए चार पीपीपी मॉडल पर काम कर रही है। इनमें पहले म़ॉडल के तहत जिले के सरकारी अस्पतालों में बने भवनों में प्राइवेट पार्टनर 10 से 15 साल के अनुबंध के आधार पर वहां उपकरण और डॉक्टरों को तैनात कर देंगे। वहीं लाभार्थियों के इलाज पर आने वाले खर्च एक तय हिस्सा सरकार निजी कंपनी को देगी। 
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इसके अलावा दूसरा म़ॉडल के तहत लोग ऐसी बीमारियों का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में करा सकेंगे और इसके बदले सरकार उन्हें तय भुगतान करेगी। यह अनुबंध एक से तीन साल के लिए होगा और हेल्थ इंश्योरेंस की तरह काम करेगा। 

वहीं, तीसरे मॉडल में सरकार निजी पार्टनर को जगह देगी और वह वहां अस्पताल का निर्माण करेगा, सरकार उसके वित्तीय पोषण के लिए समय-समय पर पैसे जारी करती रहेगी। यह समझौता 30 साल के लिए होगा। 

जबकि चौथे म़ॉडल के तहत सरकारी अस्पतालों में ही निजी प्लेयर वहां बुनियादी ढांचे का निर्माण करेंगे और लाभार्थियों का खर्च सरकार उठाएगी, जबकि योजना के बाहर के लोगों से इलाज के बदले पैसे लिए जाएंगे। यह समझौता 15 साल के लिए होगा।

एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि पीपीपी माडल के तहत इलाज की कीमत वही होगी, जो फिलहाल आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा योजना या पीएमजेएवाई के तहत दिया जा रहा है। वहीं जिन राज्यों में बीमा पैकेज उपलब्ध नहीं, वे उस अवधि के लिये सीजीएचएस पैकेज दरों का उपयोग कर सकते हैं। 


सरकार के आंकड़ों बताते हैं कि भारत में कैंसर, हार्ट अटैक, अस्थमा और डायबिटीज जैसे गैर संक्रामक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और देश पर बीमारियों का जितना बोझ है उसका 55 प्रतिशत ऐसी ही बीमारियों की वजह से है। वहीं देश में होने वाली मौतों में भी इन बीमारियों का 62 प्रतिशत से ज्यादा योगदान है। डब्ल्यूएचओ की साल 2015 की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर साल 58 लाख लोगों की मौत इन्हीं गैर-संक्रामक बीमारियों के चलते होती है।

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