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दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से होगा इलाज, हुआ ये खास करार

Mon, 15 Feb 2021 08:04 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 15 Feb 2021 08:04 PM IST
सार

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष विभाग ने सोमवार को किया करार
  • रीजनल ट्रेडीशनल मेडिसिन प्रोग्राम की हुई शुरुआत

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Ayush Ministry and World health organization sign a agreement to explore new opportunities for Ayurveda in south asian countries
आयुर्वेद - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

अगले कुछ सालों में दक्षिण-पूर्व एशिया के सभी मुल्कों में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से इलाज करने के लिए और पुरातन चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय के बीच एक एक्सचेंज प्रोग्राम की शुरुआत की गई है। इस करार के तहत स्थानीय पारंपरिक चिकित्सा कार्यक्रम शुरू किया गया है। जिसमें पुरातन चिकित्सा पद्धति को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मान्यता देते हुए दक्षिण-पूर्व एशियाई मुल्कों में इलाज के लिए बढ़ावा देने पर एक सहमित पत्र पर हस्ताक्षर भी किये।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की साउथ ईस्ट एशिया सेंटर की रीजनल डायरेक्टर डॉ पूनम खेत्रपाल ने बताया कि भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इसे और बड़ा आयाम देने के लिहाज से ही यह एक करार किया जा रहा है। आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर इस करार को आगे बढ़ाया जाएगा। डॉ खेत्रपाल ने कहा नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयुष विभाग के विशेषज्ञों की प्रोग्राम को आगे बढ़ाने के लिहाज से बड़ी भूमिका होगी।
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डॉ पूनम ने कहा नेशनल हेल्थ केयर सिस्टम में आयुष विभाग की पुरातन चिकित्सा पद्धतियों से न सिर्फ इलाज किया जाएगा, बल्कि कई तरह के शोध भी किये जाएंगे। विश्व स्वास्थ संगठन की क्षेत्रीय निदेशक कहती हैं भारतीय चिकित्सा पद्धति बहुत ही प्रसिद्ध है इसका ज्यादा से ज्यादा लोगों तक फायदा पहुंचना चाहिए। साउथ ईस्ट एशिया में इंडोनेशिया, वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, म्यांमार, कंबोडिया मलेशिया, लाओस और ब्रूनेई जैसे देशों में आयुष विभाग के अंतर्गत आने वाली चिकित्सा पद्धतियों से इलाज को बढ़ावा दिया जाएगा।
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आयुष मंत्रालय के सचिव राकेश कटोच कहते हैं विश्व स्वास्थ संगठन के साथ मिलकर रीजनल ट्रेडिशनल मेडिसिन एक्शन प्लान तैयार करने में विभाग की बड़ी भूमिका होगी। इससे हमारी चिकित्सा पद्धति को दुनिया भर में और ज्यादा मान्यता मिलेगी।


कोविड-19 के दौरान भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति कितनी कारगर हुई उसे लेकर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय संयुक्त शोध करेंगे। कोरोना काल मे लोगों ने भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति से तमाम तरह के उपायों को अपनाकर अपने शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत किया।

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