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Respiratory System: श्वसन तंत्र के संक्रमण से निजात दिलाएगी आयुष की एंटीबायोटिक, खांसी में भी मददगार है दवा
Mon, 05 Dec 2022 05:59 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 05 Dec 2022 05:59 AM IST
सार
इससे पहले भोपाल एम्स के डॉक्टरों ने फीफाट्रोल को वायरस, बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन का नियंत्रण करने में रामबाण बताते हुए सप्ताह भर के भीतर अच्छे परिणाम दिखाने का दावा किया था। वहीं, बीएचयू के शोधार्थियों ने इसे आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक उपनाम भी दिया था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आयुष एंटीबायोटिक फीफाट्रोल सात दिन में ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण से निजात दिलाएगी। एक चिकित्सा अध्ययन में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के शोधार्थियों ने देश के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर पंजीकृत रोगियों पर जांच के बाद पुष्टि की है कि फीफाट्रोल दवा ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण में अत्यंत लाभकारी है।
इससे पहले भोपाल एम्स के डॉक्टरों ने फीफाट्रोल को वायरस, बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन का नियंत्रण करने में रामबाण बताते हुए सप्ताह भर के भीतर अच्छे परिणाम दिखाने का दावा किया था। वहीं, बीएचयू के शोधार्थियों ने इसे आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक उपनाम भी दिया था। इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑफ आयुर्वेदा एंड योगा में प्रकाशित अध्ययन में शोधार्थियों ने बताया, फीफाट्रोल में शामिल पांच औषधियां सुदर्शन वटी, संजीवनी वटी, गोदांती भस्म, त्रिभुवन कीर्ति रस और मृत्युंजय रस न सिर्फ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने बल्कि वायरस, बैक्टीरिया व परजीवी संक्रमण के घातक प्रभावों को घटाने में कारगर हैं। इसमें 8 बूटियां तुलसी, कुटकी, चिरायता, मोथा, गिलोय, दारुहल्दी, करंज, अपामार्ग के भी विशेष औषधीय गुण हैं। अपामार्ग व करंज वायरस से होने वाले दुष्प्रभावों को निष्क्रिय करते हैं। कुटकी लिवर को ठीक करती है। तुलसी व गोदांती भस्म में एंटीवायरल गुण हैं।
203 मरीजों पर दवा का किया गया परीक्षण
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2019 से अप्रैल 2020 में उत्तराखंड के मदरहुड विश्वविद्यालय, गाजियाबाद स्थित आईएमटी और देहरादून स्थित उत्तरांचल आयुर्वेद कॉलेज के शोधार्थियों ने संयुक्त तौर पर अध्ययन किया। इस दौरान शोधार्थियों ने देशभर के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में 203 मरीजों पर फीफाट्रोल का परीक्षण किया। उपचार के दौरान पहले, चौथे और सातवें दिन मरीजों के विभिन्न पैरामीटर की जांच की गई। इन्हें दिन में दो बार फीफाट्रोल की खुराक दी गई। शोध में देखा गया है कि चौथे दिन मरीजों के लक्षणों में 69.5 फीसदी तथा सातवें दिन 90.36 फीसदी सुधार देखा गया।
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इससे पहले भोपाल एम्स के डॉक्टरों ने फीफाट्रोल को वायरस, बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन का नियंत्रण करने में रामबाण बताते हुए सप्ताह भर के भीतर अच्छे परिणाम दिखाने का दावा किया था। वहीं, बीएचयू के शोधार्थियों ने इसे आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक उपनाम भी दिया था। इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑफ आयुर्वेदा एंड योगा में प्रकाशित अध्ययन में शोधार्थियों ने बताया, फीफाट्रोल में शामिल पांच औषधियां सुदर्शन वटी, संजीवनी वटी, गोदांती भस्म, त्रिभुवन कीर्ति रस और मृत्युंजय रस न सिर्फ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने बल्कि वायरस, बैक्टीरिया व परजीवी संक्रमण के घातक प्रभावों को घटाने में कारगर हैं। इसमें 8 बूटियां तुलसी, कुटकी, चिरायता, मोथा, गिलोय, दारुहल्दी, करंज, अपामार्ग के भी विशेष औषधीय गुण हैं। अपामार्ग व करंज वायरस से होने वाले दुष्प्रभावों को निष्क्रिय करते हैं। कुटकी लिवर को ठीक करती है। तुलसी व गोदांती भस्म में एंटीवायरल गुण हैं।
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203 मरीजों पर दवा का किया गया परीक्षण
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2019 से अप्रैल 2020 में उत्तराखंड के मदरहुड विश्वविद्यालय, गाजियाबाद स्थित आईएमटी और देहरादून स्थित उत्तरांचल आयुर्वेद कॉलेज के शोधार्थियों ने संयुक्त तौर पर अध्ययन किया। इस दौरान शोधार्थियों ने देशभर के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में 203 मरीजों पर फीफाट्रोल का परीक्षण किया। उपचार के दौरान पहले, चौथे और सातवें दिन मरीजों के विभिन्न पैरामीटर की जांच की गई। इन्हें दिन में दो बार फीफाट्रोल की खुराक दी गई। शोध में देखा गया है कि चौथे दिन मरीजों के लक्षणों में 69.5 फीसदी तथा सातवें दिन 90.36 फीसदी सुधार देखा गया।
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