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अयोध्या मामला: हिंदू पक्ष ने दी दलील, जन्मस्थान भी न्यायिक इकाई दावा करने का हक

Tue, 01 Oct 2019 07:00 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 01 Oct 2019 07:00 AM IST
सार

भगवान राम के जन्मस्थान को भी 'न्यायिक इकाई' मानना चाहिए- हिंदू पक्ष
देवता ही नहीं जन्मस्थान भी स्वामित्व का दावा करने में सक्षम है

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Ayodhya dispute Hearing in SC Hindu party says Birthplace also the right to claim judicial unit
सुफ्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई के 34वें दिन हिंदू पक्ष ने कहा कि भगवान राम के जन्मस्थान को भी 'न्यायिक इकाई' मानना चाहिए। देवता ही नहीं जन्मस्थान भी स्वामित्व का दावा करने में सक्षम है। रामलला विराजमान की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील के. परासरन ने कहा मूर्ति स्वयं कोई न्यायिक व्यक्ति नहीं, लेकिन देवता के रूप में प्राणप्रतिष्ठा और सेवा मान्यता से मूर्ति न्यायिक व्यक्ति हो सकता है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।

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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच के समक्ष परासरन मुस्लिम पक्ष की उस दलील का जवाब दे रहे थे, जिसमें कहा गया था कि भगवान राम के जन्मस्थान को न्यायिक मान्यता नहीं दी जा सकती। परासरन ने कहा, अगर हिंदू उस जगह को भगवान का जन्मस्थान मानते हैं तो वे उसकी पूजा उस मान्यता के साथ करते हैं। ऐसे में वह स्थान न्यायिक इकाई हो जाता है।
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परासरन ने कोर्ट से कहा कि हिंदुओं की खास देवता में आस्था, मंदिरों और उनकी न्यायिक स्थिति पर फैसला संबंधित मामलों के आधार पर, हिंदू कानूनों के तहत उनके पूजा के अधिकार की रक्षा को ध्यान में रखकर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देवता की पहचान न्यायिक व्यक्ति के तौर पर इसलिए है ताकि पूजा करने वालों और देवता का अधिकार सुरक्षित रहे।

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मूर्ति होना या न होना महत्वपूर्ण नहीं 

हिंदू पक्षकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के. परासरन ने कहा कि विवादित जगह पर मूर्ति थी या नहीं, यह महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है। हिंदू मान्यताओं में परम ईश्वर एक ही है लेकिन लोग अलग-अलग रूप या आकार में और मंदिरों में पूजा करते हैं। कहीं मूर्तियों के साथ पूजा होती है तो कहीं बिना मूर्ति की। कहीं, साकार कहीं निराकार उपासना होती है। इन विविधताओं के बीच समानता यही है कि लोग देवता की पूजा करते हैं। परासरन ने कहा, पूजा का मकसद होता है देवत्व की पूजा। मूर्ति न होने के आधार पर जन्मस्थान पर सवाल उठाना उचित नहीं है। 

1885 का और मौजूदा वाद एक जैसा : सुन्नी वक्फ बोर्ड

वहीं, अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शेखर नाफडे ने कहा कि मौजूदा वाद और 1885 का वाद, एक जैसा है। अंतर सिर्फ इतना है कि 1885 में हिंदू पक्ष ने विवादित स्थल के एक हिस्से पर दावा ठोंका था, लेकिन अब पूरे विवादित स्थल पर मालिकाना हक मांग रहे हैं।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष नाफडे ने पूछा कि क्या 1885 में महंत रघुवर दास का वाद, सभी हिंदुओं का प्रतिनिधित्व कर रहा था या नहीं? अगर जवाब ‘हां’ में है तो हिंदू पक्ष दूसरा वाद दाखिल नहीं कर सकता। इस पर संविधान पीठ के सदस्य जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि दोनों मामलों की विषयवस्तु में अंतर साफ तौर पर देखा जा सकता है।

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