Digital India Act: 'ऑस्ट्रेलिया की कामयाबी से भारत में बन रहे डिजिटल इंडिया कानून को भी मजबूती मिलेगी'
Digital India Act: देश के 17 अग्रणी समाचार प्रकाशकों की डिजिटल इकाइयों के संगठन डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन के मंगलवार को हुए 'डीएनपीए डायलॉग' में फ्लेचर ने कहा कि डिजिटल बाजार क्षेत्र में भारत महाशक्ति बन चुका है।
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बड़ी टेक कंपनियों के एकाधिकार को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया में 2021 में न्यूज मीडिया बारगेनिंग कोड बना था। इस कानून को आकार देने में ऑस्ट्रेलिया के सांसद और पूर्व मंत्री पॉल फ्लेचर ने अहम भूमिका निभाई थी। फ्लेचर ने नया डिजिटल इंडिया कानून बनाने के लिए हो रहे प्रयासों की तारीफ की है और कहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया इसमें कामयाबी हासिल कर सकता है तो भारत भी ऐसा कर सकता है।
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन के मंगलवार को हुए कार्यक्रम 'डीएनपीए डायलॉग' में फ्लेचर ने कहा कि डिजिटल बाजार क्षेत्र में भारत महाशक्ति बन चुका है। जब 'बारगेनिंग डायनामिक्स' की बात होगी तो गूगल और फेसबुक जैसी टेक कंपनियों के मुकाबले भारत का पलड़ा भारी रहेगा।
बड़ी टेक कंपनियों और समाचार मीडिया समूहों के बीच आमदनी में साझेदारी से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा क्या होगा, इस पर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व संचार मंत्री फ्लेचर ने कहा, ''भारत तकनीक के मामले में महाशक्ति है। मैं भारत के डिजिटल बाजार की असाधारण व्यापकता को देखकर स्तब्ध हूं। जब भारत बड़ी टेक कंपनियों से बातचीत करेगा, तब कम आबादी वाले देशों की तुलना में उसकी बात का असर काफी अलग होगा।''
ऑस्ट्रेलिया में बड़ी टेक कंपनियों और समाचार संगठनों के बीच व्यावसायिक समझौते कराने में फ्लेचर के बनाए कानून की अहम भूमिका रही है। दो साल पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में न्यूज मीडिया बारगेनिंग कोड को आकार दिया था। इसके तहत ही अब ऑस्ट्रेलिया में कंपनियों और समाचार संगठनों के बीच समझौते किए जाते हैं।
'ऑस्ट्रेलिया की तुलना में ज्यादा असरदार होगा भारत का कानून'
फ्लेचर ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले भारत का डिजिटल बाजार काफी बड़ा है। अगर ऑस्ट्रेलिया जैसा कानून भारत में आ गया तो यह बड़ी वैश्विक टेक कंपनियों के आला अधिकारियों की मेज पर ऑस्ट्रेलिया के कानून की तुलना में काफी जल्दी पहुंचेगा। भारत में भी ऑस्ट्रेलिया जैसा ही कानून बनाया जा सकता है ताकि कंटेंट को प्रकाशित करने के मामले में यहां के समाचार संगठन गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों से आमदनी में बराबरी का हिस्सा ले सकें।
IT एक्ट की जगह लेगा डिजिटल इंडिया कानून
अभी समाचार संगठनों, छोटे प्रतिस्पर्धियों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं पर बड़ी टेक कंपनियां अपना प्रभुत्व रखती हैं। ऐसे में सरकार और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की कोशिश है कि इन्हें नियमन के दायरे में लाया जाए। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर के नेतृत्व में सरकार डिजिटल इंडिया कानून का मसौदा तैयार कर रही है। यह सूचना प्रौद्योगिकी कानून 2000 की जगह लेगा और टेक कंपनियों की एकाधिकारवादी नीतियों को रोकने का काम करेगा।
'मिलकर काम कर सकते हैं भारत-ऑस्ट्रेलिया'
फ्लेचर का कहना है कि चूंकि अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के मामले में भारत और ऑस्ट्रेलिया की सरकारें मिलकर काम करती हैं, ऐसे में अगर एकाधिकारवादी नीतियों को रोकने से जुड़े नियमों के लिए भी अगर दोनों देश मिलकर काम करें तो अच्छा होगा। भारत को असल में बारगेनिंग कोड जैसा कानून बनाने के लिए एक ठोस वजह की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया में यह वजह तब महसूस हुई, जब कोरोना काल के दौरान समाचार समूहों की विज्ञापन से जुड़ी कमाई में तेज गिरावट आई। इसके बाद हमें स्वेच्छिक नियमन की जगह अनिवार्य कानून लाना पड़ा।
'कानून की वजह से कंपनियों को देने पड़े 20 करोड़ डॉलर'
फ्लेचर ने कहा कि कानून का असर साफ देखा जा सकता है। हमने जो कानून बनाया, उसकी वजह से मीडिया समूहों और गूगल-फेसबुक के बीच कई व्यावसायिक समझौते हुए। ऑस्ट्रेलिया के प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता आयोग के पूर्व अध्यक्ष रॉय सिम्स की मानें तो इस कानून की वजह से गूगल और फेसबुक को न्यूज पब्लिशर्स को 20 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से ज्यादा का भुगतान करना पड़ा है। कानून इस तरह बना कि मध्यस्थता करने की नौबत ही नहीं आई।
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— Digital News Publishers Association (@publishers_news) July 18, 2023
'AI को कानून के दायरे में लाने पर विचार हो'
फ्लेचर ने कहा कि अब ऑस्ट्रेलिया के कानून का दायरा बढ़ाकर उसमें चैट जीपीटी जैसे कृत्रिम मेधा वाले प्लेटफॉर्म्स को भी शामिल करने की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि AI प्लेटफॉर्म्स का कारोबारी मॉडल इंटरनेट पर पहले से प्रकाशित कंटेट पर निर्भर है। भारत, कनाडा और अन्य देशों को भी इसके बारे में विचार करना चाहिए।
क्या है डीएनपीए?
डीएनपीए दिल्ली स्थित संगठन है। देश के 17 अग्रणी समाचार प्रकाशकों की डिजिटल इकाइयां इस संगठन का हिस्सा हैं। यह संगठन समय-समय पर डीएनपीए डायलॉग का आयोजन करता है। यह ऐसा निष्पक्ष निकाय है, जो डिजिटल परिवेश में समाचार संगठनों और बड़ी टेक कंपनियों के बीच समानता और निष्पक्षता को बढ़ावा देता है।