फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Atul Subhash's death case reaches Supreme Court, demand for review of law raised

Atul Subhash Case: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा अतुल सुभाष की मौत का मामला, कानून की समीक्षा की उठी मांग

Sat, 14 Dec 2024 07:19 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 14 Dec 2024 07:19 AM IST
सार

अतुल सुभाष की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा है। दाखिल जनहित याचिका में अतुल सुभाष मामले का जिक्र करते हुए कहा गया कि इस घटना ने वैवाहिक कलह, दहेज निषेध कानूनों के दुरुपयोग और पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ दी है।

विज्ञापन
Atul Subhash's death case reaches Supreme Court, demand for review of law raised
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बंगलूरू में आईटी पेशेवर अतुल सुभाष के आत्महत्या करने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दहेज और घरेलू हिंसा से जुड़े मौजूदा कानूनों की समीक्षा की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि कानूनों में सुधार के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाए ताकि इनका दुरुपयोग रोका जा सके। 
विज्ञापन


याचिका में वकील का तर्क
वकील विशाल तिवारी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि दहेज निषेध अधिनियम और आईपीसी की धारा 498ए का उद्देश्य विवाहित महिलाओं को दहेज की मांग और उत्पीड़न से बचाना था, लेकिन ये कानून महिलाओं के हाथ पतियों और उनके माता-पिता को परेशान करने का हथियार बन गए हैं। याचिका में अतुल सुभाष मामले का जिक्र करते हुए कहा गया कि इस घटना ने वैवाहिक कलह, दहेज निषेध कानूनों के दुरुपयोग और पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ दी है।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया कि मौजूदा दहेज कानून और घरेलू हिंसा अधिनियम की समीक्षा और सुधार का समय आ गया है। ताकि इनका दुरुपयोग रोककर निर्दोष पुरुषों को बचाया जा सके और दहेज कानून का असली उद्देश्य विफल न हो। याचिका में यह भी दावा किया गया कि इन कानूनों के तहत पुरुषों को गलत तरीके से फंसाए जाने के कारण महिलाओं के खिलाफ सच्ची घटनाओं को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उपहारों को रिकॉर्ड करने का निर्देश देने की भी उठाई मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों, वकीलों और विधि विशेषज्ञों की समिति बनाने के अलावा विवाह पंजीकरण के दौरान दिए गए सामान या उपहारों को रिकॉर्ड करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिका में 2010 के एक मामले में शीर्ष अदालत की टिप्पणियों पर अमल करने की भी मांग की गई, जिसमें न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए के दुरुपयोग को चिह्नित किया था।

न्याय और आपराधिक जांच प्रणाली पर भी उठे सवाल
याचिका में कहा गया है, दहेज के मामलों में पुरुषों को गलत तरीके से फंसाने की कई घटनाएं और मामले सामने आए हैं, जिसके कारण बहुत दुखद अंत हुआ है और इससे हमारी न्याय और आपराधिक जांच प्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। याचिकाकर्ता ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने कई मौकों पर ऐसे झूठे दहेज मामलों के खिलाफ चेतावनी जारी की और सरकार तथा विधानमंडल से इस मुद्दे पर गौर करने को कहा है लेकिन सरकार ने झूठे दहेज मामलों से निपटने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है।

निकिता के घर पुलिस ने चस्पा किया नोटिस
सॉफ्टवेयर इंजीनियर अतुल सुभाष आत्महत्या मामले की जांच के लिए जौनपुर पहुंची बंगलुरू पुलिस ने शुक्रवार को सबसे पहले डाक बंगला स्थित निकिता के ताऊ के आवास पर नोटिस चस्पा किया। इसके बाद ढालगर टोला स्थित निकिता के घर पर नोटिस चिपकाया गया। इसमें सभी को अगले तीन दिन में उपस्थित होने को कहा गया है।

अतुल के भाई ने निकिता और उसकी पर ठोका मुकदमा
अतुल सुभाष के भाई विकास ने बंगलुरू के मराठाहल्ली थाने में सोमवार को निकिता, उसकी मां निशा सिंघानिया, भाई अनुराग उर्फ गोलू सिंघानिया व ताऊ सुशील सिंघानिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की जांच के लिए बंगलुरू पुलिस की चार सदस्यीय टीम बृहस्पतिवार शाम करीब 7 बजे जौनपुर पहुंची थी। शहर कोतवाली थाने में सीओ सिटी आयुष श्रीवास्तव के साथ करीब दो घंटे तक विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की थी।

शुक्रवार सुबह 11 बजे कोतवाली पुलिस के साथ बंगलुरू पुलिस टीम ने सबसे पहले लाइन बाजार के डाक बंगले के पास स्थित निकिता के ताऊ सुशील सिंघानिया के घर के बाहर नोटिस चस्पा किया। फिर निकिता के आवास पर पहुंची। नोटिस में निकिता को अगले तीन दिन में मराठाहल्ली थाने में पेश होने को कहा गया है।

दीवानी न्यायालय में चल रहे मुकदमे से जुड़े साक्ष्य जुटाए
नोटिस चस्पा करने के बाद बंगलुरू पुलिस की टीम कोतवाली पहुंची और करीब 40 मिनट तक मंथन के बाद 12:20 बजे दीवानी न्यायालय पहुंची। टीम ने प्रशासनिक कक्ष में अतुल सुभाष मोदी पर दर्ज मुकदमे की पत्रावलियों के विषय में जानकारी ली। फिर सीजेएम कार्यालय में पत्रावलियों की नकल के लिए प्रार्थनापत्र दिया।


करीब दो घंटे बाद अनुमति मिलते ही दहेज उत्पीड़न के मुकदमे की नकल प्राप्त की। इसके बाद टीम परिवार न्यायालय की जज रीता कौशिक की कोर्ट पहुंची। कोर्ट के आदेश पर दहेज उत्पीड़न के मामले की प्राथमिकी, चार्जशीट, आरोपी रहे अतुल के अलावा पवन, अंजु व विकास की जमानत की कॉपी, केस डायरी, हाईकोर्ट का आदेश व अन्य दस्तावेज टीम को उपलब्ध कराए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed