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नास्तिक सम्मेलन के आयोजक ने सभी धर्मों के ग्रंथों को बताया उपन्यास और काल्पनिक कहानी

Fri, 14 Oct 2016 04:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वृंदावन
ब्यूरो/अमर उजाला, वृंदावन Updated Fri, 14 Oct 2016 04:22 AM IST
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Atheist conference organizer says religious books is fictional texts

धर्मनगरी में होने वाले शुक्रवार से होने वाले दो दिवसीय नास्तिक सम्मेलन विवादों में घिर गया है। कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए आयोजित की पत्रकार वार्ता में सम्मेलन के आयोजक स्वामी बालेंदु ने हिंदू, मुस्लिम, ईसाई व  अन्य धर्मों के ग्रंथों पर विवादित टिप्पणी की और उन्हें उपन्यास व मनोरंजन का साधन बताया।

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संतों और धर्मगुरुओं पर भी उन्होंने धन बटोरकर अपने आराम के लिए मंदिर, मठों और आश्रमों का निर्माण कराने का आरोप लगाया। उनकी विवादित टिप्पणियों से संतों और धर्मगुरुओं में जबरदस्त आक्रोश है और उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर कार्यक्रम का विरोध भी किया है। 
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स्वामी बालेंदु ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि ईश्वर से बड़ा असत्य कोई और अंधविश्वास नहीं है। जैसे सिनेमाघरों में फिल्म देखकर भाव उत्पन्न होते हैं, वैसे ही धर्म ग्रंथों में लिखित पात्रों का चरित्र पढ़कर ईश्वर के प्रति भाव उत्पन्न होता है। वास्तव ये झूठ और काल्पनिक कथाएं हैं। उन्होंने कहा कि पत्थर की मूर्ति पर दूध-माला चढ़ाना आस्था नहीं बल्कि अंधविश्वास है। हम लोग मूर्ति को कपड़े पहनाते हैं, भोजन कराकर श्रृंगार करते हैं और गरीबों के लिए कुछ नहीं करते। 

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किसी भी धर्म के ग्रंथ और शास्त्रों पर बयान देने का अधिकार किसी को नहीं

Atheist conference organizer says religious books is fictional texts
उन्होंने बताया कि 14 और 15 को नास्तिकवाद पर होने वाले सम्मेलन में18 राज्यों से करीब 1000 लोग भाग लेने आ रहे हैं। पूर्णेंदु और यशेंदु ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य समाज को अंधविश्वास से दूर ले जाना है। विज्ञान और धर्म दोनों अलग-अलग हैं, धर्म को अपनी वास्तविकता सिद्ध करने के लिए विज्ञान की जरूरत पड़ती है, जबकि विज्ञान को नहीं। आज लोग तार्किक और विवेकसम्मत विचारों के इर्द-गिर्द गोलबंद हो रहे हैं, इस सम्मेलन के माध्यम से ऐसे लोगों को  एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है।


-वृंदावन मथुरा दरवाजा इमाम जामा मस्जिद के मोहम्मद उमर कादरी ने कहा कि यह देश में उन्माद फैलाने वाला बयान है। कुरान के बारे में वह जानते क्या हैं। आस्था और विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वाले बालेंदू का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। 

वृंदावन किशोरपुरा गुरुद्वारा गुरुनानक टीला के  व्यवस्थापक भूपेंद्र सिंह का कहना है किसी भी धर्म के ग्रंथ और शास्त्रों पर अनर्गल बयान देने का अधिकार किसी को नहीं है। आस्था और भक्ति स्वतंत्र भाव से की जाती है, किसी से जबरन नहीं कराई जाती। 

नहीं होने देंगे सम्मेलन, संतों ने किया एलान

Atheist conference organizer says religious books is fictional texts

स्वामी बालेंदू के सभी धर्मों पर दिए गए विवादित बयान पर धर्म नगरी में भारी उबाल है। संतों, हिंदूवादियों और स्थानीय लोगों ने बालेंदू और उनके भाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है। इस संबंध में संतों ने एक तहरीर थाना वृंदावन में दी है। 

चतु: संप्रदाय विरक्त वैष्णव परिषद के श्रीमहंत फूलडोल बिहारीदास, जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी नवल गिरी महाराज संतों के साथ नास्तिक सम्मेलन के आयोजन स्थल पर पहुंचे और विरोध किया। उन्होंने कहा कि जो लोग हमारे धर्म और ईश्वर के अस्तित्व को ही नकारने की बात कर रहे हैं ऐसे लोगों को धर्मनगरी वृंदावन में कोई आयोजन नहीं  करने दिया जाएगा। संतों ने डीएम नितिन बंसल, सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ को फोन कर नास्तिक सम्मेलन को रोकने की मांग की। अधिकारियों ने इसकी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है। 

महामंडलेश्वर एवं गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज और स्वामी महेशानंद सरस्वती ने कहा कि सामाजिक परिप्रेक्ष्य में इस आयोजन को संत समाज किसी भी  कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। ईश्वर की प्रमाणिकता का सबसे बड़ा जीवों का शरीर है। जो ईश्वरीय चेतना से चल रहा है। ईश्वरीय चेतना निकलने के बाद कोई भी विज्ञान या कोई अन्य मृत शरीर को जीवित नहीं कर सकता है। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी, धर्म रक्षा संघ के अध्यक्ष सौरभ गौड़, आचार्य बद्रीश, देवेंद्र शर्मा,हिंदूवादी नेता रमेश पुजारी ने बालेंदू और उनके भाईयों को गिरफ्तार करने की मांग की है।

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