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फिलहाल हकीकत से कोसों दूर ई-वाहनों का प्रयोग, निवेश, छूट एवं ढांचागत व्यवस्थाओं में लानी होगी तेजी

Mon, 10 Sep 2018 04:24 AM IST
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली Updated Mon, 10 Sep 2018 04:24 AM IST
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At present, the use of e-vehicles miles away from reality
ई-व्हीकल
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग फिलहाल हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार को न सिर्फ एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर निवेश, ई-वाहनों की कीमतों में कमी और ढांचागत व्यवस्थाओं में तेजी लानी होगी। इसके बाद, एक से डेढ़ दशक में यह सपना साकार हो पाएगा।  
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विशेषज्ञों के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए देश में चार्जिंग प्वॉइंट की कमी है और इन्हें स्थापित करने में भारी खर्च आता है। वहीं, मध्यम ई-कारों की कीमतें 8 से 12 लाख रुपये के बीच हैं। जिन कारों की कीमतें कम हैं, उनमें महज दो लोग ही बैठ सकते हैं। ऐसे में इस मुहिम में मध्यम वर्ग को तब तक शामिल नहीं किया जा सकता, जब तक इन वाहनों को सस्ती दरों पर मुहैया नहीं कराया जाएगा।  
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चीन से आती है बैट्री 

कारों की भारी कीमतों की वजह यह है कि इनकी बैट्री फिलहाल देश में नहीं बनती और यह चीन से आती है। ऐसे में सरकार को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बैट्री और कारों के निर्माण को बढ़ावा देने के साथ ही बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा। साथ ही देशभर में पेट्रोल पंपों की तर्ज पर ई-वाहनों की चार्जिंग के लिए ढांचा खड़ा करना होगा। 
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चार्जिंग स्टेशन पर 50-60 लाख खर्च 

एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) के प्रबंध निदेशक (एमडी) सौरभ कुमार के मुताबिक, ई-वाहनों का चार्जिंग स्टेशन बनाने में करीब 50-60 लाख रुपये का निवेश होता है। इसमें सबसे ज्यादा खर्च चार्जर पर होता है, जिसकी कीमत करीब 25 लाख रुपये तक होती है। मेरा यह मानना है कि इस दिशा में सरकार जब तक कोई छूट नहीं तय करेगी, तब तक देश में इनका तेजी से स्थापित होना संभव नहीं है। ऑटो विशेषज्ञ पारुल सेठ के मुताबिक, सामान्य इलेक्ट्रॉनिक कारों की कीमत 8 से 12 लाख रुपये के बीच हैं, जबकि इससे महंगी कारें भी दुनिया के बाजार में मौजूद हैं। देश का मध्य वर्ग 5 लाख तक की कार ढूंढता है, जिनमें कम से कम चार लोग बैठ सकें। ऐसे में सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए।

 
देशभर में महज 700 चार्जिंग प्वाइंट 

देश में करीब 700 चार्जिंग प्वाइंट हैं। सर्वाधिक 500 दिल्ली-एनसीआर में हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और झारखंड में करीब 200 प्वाइंट हैं। दिल्ली में चार्जिंग केंद्र पीएमओ कार्यालय, नीति आयोग, सीजीओ कॉम्प्लेक्स सहित तमाम सरकारी दफ्तरों में हैं। चार्जिंग केंद्रों की ढांचागत व्यवस्था ईईएसएल द्वारा की गई है। गौरतलब है कि इन केंद्रों में तेज और धीमे चार्जर मौजूद हैं। नीति आयोग में लगे चार्जर से 20 से 25 मिनट में गाड़ियां चार्ज होकर 100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने लायक हो जाती हैं, लेकिन यह आम जनता के लिए नहीं हैं।
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