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चुनाव आयोग के लिए चुनौती से कम नहीं मणिपुर चुनाव
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 21 Jan 2017 12:16 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में विधानसभा की महज 60 सीटों पर चुनाव कराना चुनाव आयोग के लिए एक कड़ी चुनौती बन गया है। इसकी वजह यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) का एक फैसला है। संगठन ने अपने ताजा फैसले में राज्य में सात नए जिलों के गठन के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला किया है।
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आयोग के सूत्रों का कहना है कि अगर हालत शीघ्र नहीं सुधरे तो 60 में से कम से कम 30 सीटों पर मतदान कराना मुश्किल होगा। राज्य में दो चरणों में चार और आठ मार्च को मतदान होना है। आयोग की सबसे बड़ी चिंता नेशनल हाइवे-2 के जरिए उन 30 विधानसभा क्षेत्रों में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम), चुनाव सामग्री और कर्मचारियों को सुरक्षित पहुंचाना है। राज्य की जीवन रेखा कही जाने वाली यह सड़क बीते लगभग 80 दिनों से यूएनसी की आर्थिक नाकेबंदी की चपेट में है।
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राज्य के हालात से चिंतित केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को दिल्ली में मणिपुर के मुख्यमंत्री ईबोबी सिंह से मुलाकात कर उनको नेशनल हाइवे-2 पर वाहनों की सुरक्षित आवाजाही शुरू करने को कहा। इसके बदले ईबोबी ने गृह मंत्री से यूएनसी पर अंकुश लगाने को कहा ताकि राज्य की हालत में सुधार आ सके। मुख्यमंत्री की दलील थी कि नए जिलों के गठन का विरोध कर यह नगा संगठन राज्य सरकार के विशेषाधिकार को चुनौती दे रहा है राज्य सरकार ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए केंद्र से अर्धसैनिक बलों की 40 और कंपनियां मांगी हैं। राज्य में पहले से ही 135 कंपनियां तैनात हैं। केंद्र ने इस मामले में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है।
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