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दुखद: 12 साल के बच्चे को पहली बार मिली थी 'पहचान', लेकिन असम हिंसा ने छीन ली जिंदगी
Sat, 25 Sep 2021 07:51 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरांग
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sat, 25 Sep 2021 07:51 AM IST
सार
चार दिनों से चल रहे अभियान में अब तक 800 परिवारों को यहां से हटाया जा चुका है। 800 परिवारों को सरकारी जमीन से बेदखल करने के बाद पुनर्वास की मांग को लेकर जन विरोध शुरू हो गया है।
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असम हिंसा
- फोटो : ANI
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विस्तार
असम में हुई हिंसा में 12 साल का बच्चा भी अपनी जान गवां बैठा। वह अपनी जिंदगी का पहला पहचान पत्र लेने के लिए घर से पोस्ट ऑफिस के लिए निकला था। आधार कार्ड मिलने की खुशी इतनी थी कि सुबह-सुबह ही घर छोड़ दिया था। पोस्ट ऑफिस पहुंचा। जिंदगी का पहला पहचान पत्र तो मिला, लेकिन उसकी जिंदगी ही खत्म हो गई। शाम को जब उसका मृत शरीर घर पहुंचा तो उसकी जेब से वही आधार कार्ड मिला।
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दरअसल, असम के दरांग जिले में अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई थी। इसमें से एक 12 साल का बच्चा फरीद भी था। फरीद के पिता का कहना है कि वह काफी खुश था क्योंकि उसे पहला पहचान पत्र मिलने जा रहा था। बता दें, 12 वर्षीय फरीद भी उस इलाके में रहता था जहां सरकार की ओर से अतिक्रमण अभियान चलाया जा रहा था। फरीद के परिवार का कहना है कि उन्हें प्रशासन की ओर से कोई भी नोटिस नहीं मिला था।
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जेब में मिला आधार कार्ड, पिता बोले-पता नहीं क्यों मार दिया
फरीद के पिता खलीक अली का कहना है कि मेरे बेटे का शव शाम को घर पहुंचा। उसकी जेब में आधार कार्ड भी मिला है। पता नहीं उसे क्यों गोली मार दी गई। उसे दाहिनी छाती में गोली मारी गई थी।
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11 पुलिस के जवानों समेत 20 लोग हुए थे घायल
इस हिंसा में 11 पुलिसवालों समेत 20 लोग घायल हो गए थे। घायल 15 वर्षीय हसना बानों का कहना है कि मुझे हिंसा के बारे में पता चला तो मैं वहां देखने गई हुई थी। इतने में किसी ने मुझ पर पीछे से वार किया और मेरे बांए हाथ की हड्डी टूट गई, जिससे मैं वहीं बेहोश हो गई। इसके बाद मुझे कुछ स्थानीय लोगों ने घर पहुंचाया। बानों के पिता सईद अली का कहना है कि हम डर के मारे अपनी बेटी को अस्पताल नहीं ले गए। उसके हाथ का घर में इलाज किया।
दो लोगों की हुई थी मौत
असम में हुई इस हिंसा में 12 वर्षीय फरीद के अलावा 35 साल के मयनल हक की भी मौत हो गई थी। इसके बाद घटना पर न्यायिक जांच बिठा दी गई है। घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें एक फोटोग्राफर मयनल हक के मृत शरीर पर उछलता नजर आ रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद फोटोग्राफर को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम आ रहा सामने
असम में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हुई हिंसा के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि स्थिति अब सामान्य है। वहां से 60 लोगों को हटाया जाना है, लेकिन वहां 10 हजार लोग थे, जो उन्हें लाए थे। इसमें पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम सामने आ रहा है। लेकिन मैं न्यायिक जांच पूरी होने तक कुछ नहीं कह सकता।