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Assam: 'सरकार में यूसीसी लागू करने की हिम्मत नहीं है...', मुस्लिम विवाह कानून खत्म करने पर बरसे AIUDF विधायक
Sat, 24 Feb 2024 12:01 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 24 Feb 2024 12:01 PM IST
सार
AIUDF विधायक रफीकुल इस्लाम ने सरकार को लगभग चेतावनी देते हुए कहा है कि सरकार में समान नागरिक संहिता लागू करने की हिम्मत ही नहीं है, सरकार ऐसा नहीं कर सकती।
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Himanta Biswa Sarma
- फोटो : Social Media
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विस्तार
असम सरकार के मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण कानून खत्म करने के फैसले पर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एआईयूडीएफ के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल सरकार के इस फैसले की आलोचना कर चुके हैं। अब विधायक रफीकुल इस्लाम ने सरकार को लगभग चेतावनी देते हुए कहा है कि सरकार में समान नागरिक संहिता लागू करने की हिम्मत ही नहीं है, सरकार ऐसा नहीं कर सकती। असम सरकार ने शुक्रवार रात हुई कैबिनेट की बैठक में मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण कानून खत्म करने का फैसला किया। सरकार का कहना है कि इससे बाल विवाह को रोकने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार के मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने दावा किया है कि ये यूसीसी की दिशा में अहम कदम है।
'संविधान में मिले अधिकार को नहीं हटा सकती सरकार'
एआईयूडीएफ के विधायक डॉ. रफीकुल इस्लाम ने राज्य सरकार के मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण कानून खत्म करने के फैसले पर कहा कि 'इस सरकार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की हिम्मत ही नहीं है। वे ऐसा कर ही नहीं सकते। ये उत्तराखंड में जो लाए हैं, वह यूसीसी नहीं है। ये असम में भी यूसीसी लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वे असम में ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि असम में विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग रहते हैं। भाजपा समर्थक खुद इन प्रथाओं का पालन करते हैं। चुनाव आ रहे हैं...और ये सिर्फ मुस्लिमों को निशाना बनाने की रणनीति है। इसलिए ये मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण कानून हटा रहे हैं। असम कैबिनेट के पास अधिकार ही नहीं है कि वे संविधान में मिले अधिकार में संशोधन कर सकें।'
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कांग्रेस का आरोप- ये पक्षपातपूर्ण फैसला
कांग्रेस नेता राशिद मंडल ने सरकार के फैसले पर कहा कि 'मैं अभी तक इसे विस्तार से नहीं देख पाया हूं, लेकिन यह एक पक्षपातपूर्ण फैसला है। सरकार यूसीसी की बात कर रही है और बहुविवाह पर प्रतिबंध की बात कर रही है, लेकिन सरकार ऐसा करने में असफल रहेगी। चुनाव से पहले ये हिंदू मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में लामबंद करने की कोशिश कर रही है। सरकार का कहना है कि ये (मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण) कानून अंग्रेजी शासनकाल का है और इससे बाल विवाह पर रोक लगेगी, लेकिन ये तथ्य नहीं है। ये कानून सिर्फ मुस्लिमों की शादियों को पंजीकृत करने के लिए है और यह भारत के संविधान के अनुरूप है। यह मुस्लिमों का पर्सनल लॉ है, जिसे हटाया नहीं जा सकता। हम अपनी पार्टी के नेताओं से चर्चा के बाद इस मामले पर अपनी बात रखेंगे।'
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'संविधान में मिले अधिकार को नहीं हटा सकती सरकार'
एआईयूडीएफ के विधायक डॉ. रफीकुल इस्लाम ने राज्य सरकार के मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण कानून खत्म करने के फैसले पर कहा कि 'इस सरकार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की हिम्मत ही नहीं है। वे ऐसा कर ही नहीं सकते। ये उत्तराखंड में जो लाए हैं, वह यूसीसी नहीं है। ये असम में भी यूसीसी लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वे असम में ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि असम में विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग रहते हैं। भाजपा समर्थक खुद इन प्रथाओं का पालन करते हैं। चुनाव आ रहे हैं...और ये सिर्फ मुस्लिमों को निशाना बनाने की रणनीति है। इसलिए ये मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण कानून हटा रहे हैं। असम कैबिनेट के पास अधिकार ही नहीं है कि वे संविधान में मिले अधिकार में संशोधन कर सकें।'
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#WATCH | On Assam Government repealing the Assam Muslim Marriages & Divorces Registration Act, AIUDF MLA Dr. (Hafiz) Rafiqul Islam says, "This Government doesn't have the courage to bring UCC. They can't do it. What they brought in Uttarakhand, is not UCC either...They were… pic.twitter.com/gA3ELz5yPO
— ANI (@ANI) February 24, 2024
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कांग्रेस का आरोप- ये पक्षपातपूर्ण फैसला
कांग्रेस नेता राशिद मंडल ने सरकार के फैसले पर कहा कि 'मैं अभी तक इसे विस्तार से नहीं देख पाया हूं, लेकिन यह एक पक्षपातपूर्ण फैसला है। सरकार यूसीसी की बात कर रही है और बहुविवाह पर प्रतिबंध की बात कर रही है, लेकिन सरकार ऐसा करने में असफल रहेगी। चुनाव से पहले ये हिंदू मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में लामबंद करने की कोशिश कर रही है। सरकार का कहना है कि ये (मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण) कानून अंग्रेजी शासनकाल का है और इससे बाल विवाह पर रोक लगेगी, लेकिन ये तथ्य नहीं है। ये कानून सिर्फ मुस्लिमों की शादियों को पंजीकृत करने के लिए है और यह भारत के संविधान के अनुरूप है। यह मुस्लिमों का पर्सनल लॉ है, जिसे हटाया नहीं जा सकता। हम अपनी पार्टी के नेताओं से चर्चा के बाद इस मामले पर अपनी बात रखेंगे।'