ED: असम में अफसर ने कमाए करोड़ों रुपये; अनपढ़ महिला के नाम खोला बैंक खाता, ठेकेदारों से जमा कराए पैसे
असम सरकार में लोक निर्माण विभाग (सड़क) के पूर्व कार्यकारी अभियंता मोहम्मद चामेद अली ने अपने पद का दुरुपयोग कर बेनामी संपत्ति बना ली। बेनामी संपत्ति को किस खाते में जमा कराए, इसके लिए उसने एक अनपढ़ महिला के नाम पर बैंक खाता खुलवाया। सड़क बनाने वाले ठेकेदारों से कहा कि वे उक्त खाते में पैसा जमा कराएं। उन्होंने ऐसा ही कहा। ईडी की जांच से पता चला है कि आरोपी ने एक जटिल तीन-चरणीय प्रक्रिया के माध्यम से अपराध की आय को व्यवस्थित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग किया। आरोपी की कुल ज्ञात आय 2.01 करोड़ रुपये थी, लेकिन उन्होंने 4.27 करोड़ रुपये का व्यय किया। मोहम्मद चामेद, करोड़ों रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित होने का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने असम सरकार के लोक निर्माण विभाग (सड़क) के पूर्व कार्यकारी अभियंता मोहम्मद चामेद अली और उनके परिवार के सदस्यों की लगभग 3.07 करोड़ रुपये मूल्य की अचल और चल संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। ईडी ने मुख्यमंत्री विशेष सतर्कता प्रकोष्ठ, असम पुलिस द्वारा मोहम्मद चामेद अली के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी।
मुख्यमंत्री विशेष सतर्कता प्रकोष्ठ द्वारा की गई जांच में पता चला कि मोहम्मद चामेद अली ने एक जनवरी 2000 से 28 फरवरी 2021 तक असम सरकार के पीडब्ल्यूडी (सड़क) के विभिन्न विभागों में सहायक अभियंता, सहायक कार्यकारी अभियंता और कार्यकारी अभियंता के रूप में अपनी सेवा अवधि के दौरान 3.07 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की। यह उनकी ज्ञात आय के स्रोतों का 152.96 प्रतिशत थी। जांच अवधि के दौरान आरोपी की कुल ज्ञात आय 2.01 करोड़ रुपये थी, लेकिन उन्होंने 4.27 करोड़ रुपये का व्यय किया। इसके चलते 2.26 करोड़ रुपये की बचत ऋणात्मक रही। कुल 3.07 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित हुई, जिसका वे कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके।
ईडी की जांच से पता चला है कि आरोपियों ने एक जटिल तीन-चरणीय प्रक्रिया के माध्यम से अपराध की आय को व्यवस्थित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग किया। पहले चरण में, 92.3 लाख रुपये की नकद राशि, छोटी सी किराने की दुकान चलाने वाली एक निरक्षर महिला के नाम पर जमा करा दी। यह राशि, संचालित बेनामी खाते के माध्यम से और परिवार के सदस्यों के खातों में अस्पष्ट नकद जमा के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में डाली गई। निरक्षर महिला के बैंक खातों में मोहम्मद चामेद अली से संबंधित ठेकेदारों ने पहले भी 41.3 लाख रुपये जमा कराए थे।
जांच में आगे पता चला कि दूसरे चरण में, ऑडिट ट्रेल को अस्पष्ट करने के लिए इन आय को पारिवारिक माध्यमों से भेजा गया था। मोहम्मद चामेद अली की पत्नी को उनके बहनोई, जो स्वयं भी पीडब्ल्यूडी ठेकेदार हैं, से कथित "उपहार" के रूप में 28.16 लाख रुपये मिले, जो कभी वापस नहीं किए गए। आरके इंडस्ट्रीज (एक रिश्तेदार के स्वामित्व वाली, जो स्वयं भी पीडब्ल्यूडी ठेकेदार है) से 17.3 लाख रुपये और अन्य राशि प्राप्त हुई। निरक्षर महिला के खाते से 4.15 लाख रुपये स्थानांतरित किए गए।
एकीकरण के चरण में, प्राप्त धनराशि को व्यवस्थित रूप से तीन स्तरीय स्वामित्व संरचना के माध्यम से उच्च मूल्य की अचल संपत्तियों में परिवर्तित किया गया। इसका उद्देश्य वास्तविक स्वामित्व को छिपाना था। संपत्तियां मोहम्मद चामेद अली के नाम पर, उनकी पत्नी के नाम पर और उनके बहनोई के नाम पर सीधे अधिग्रहित की गईं। इनके पक्ष में एक अपरिवर्तनीय पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित की गई थी। अस्थायी रूप से कुर्क की गई अचल संपत्तियों में 2.42 करोड़ रुपये मूल्य की पांच संपत्तियां शामिल हैं। चल संपत्तियों में 65 लाख रुपये की एलआईसी पॉलिसियां शामिल हैं, जिससे कुर्क की गई कुल संपत्ति का मूल्य 3.07 करोड़ रुपये हो जाता है।