ऊपरी असम में गोगोई की राह आसान पर कांग्रेस का रथ फंसा
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असम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस चुनाव रथ के सारथी मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की अपने चुनाव क्षेत्र तीताबर में तो राह आसान दिखती है, लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का गढ़ रहे ऊपरी असम में इस बार कांग्रेस को भाजपा गठबंधन की कड़ी चुनौती मिल रही है और कई सीटों पर उसका रथ फंसता दिख रहा है।
ऊपरी असम के उत्तरी किनारे के लखीमपुर से धीमाजी तक केइला के की 20 सीटों पर भाजपा की बढ़त दिखाई देती है, वहीं दक्षिणी किनारे के जोरहाट से गोलाघाट जिलों की 15 सीटों पर कांग्रेस अपने परंपरागत जनाधार को बचाए रखने में कामयाब दिखती है।
लेकिन असम गण परिषद से गठबंधन करकेभाजपा ने यहां भी कांग्रेस के लिए कड़ी चुनौती पेश कर दी है। जोरहाट जिले की तीताबर विधानसभा सीट असम की नंबर एक वीआईपी सीट है, जहां से मुख्यमंत्री तरुण गोगोई चौथी बार मैदान में हैं।
वह लगातार तीन बार यहां से जीत चुके हैं। इस बार उन्हें उलझाने के लिए भाजपा ने अपने सांसद कामाख्या प्रसाद तासा को मैदान मेें उतारा है। कामाख्या खासी मेहनत भी कर रहे हैं और असम गण परिषद से समझौते के बाद भाजपा को यहां अगप केवोट मिलने की भी उम्मीद है।
इसलिए चुनाव प्रचार में लगे भाजपा कार्यकर्ता दावा करते हैं कि इस बार गोगोई की राह आसान नहीं है। लेकिन जैसे ही आम लोगों से बात होती है तो गोगोई की जीत को लेकर कोई शंका या संदेह नजर नहीं आता।
लोग कहते हैं कि भाजपा गठबंधन इस बार एक बड़ी ताकत केरूप में कांग्रेस के मुकाबले पूरे असम में है। इसलिए यहां भी भाजपा चुनाव मैदान में नजर आ रही है। लेकिन तरुण गोगोई तीताबर का गौरव हैं, इसलिए उनके हारने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
तीताबर में गोगोई के कामकाज की सराहना
तीताबर चार अली केएक नुक्कड़ पर खड़े आलम खान, अनिल गोगोई, मुहम्मद जुबैर कहते हैं कि लोग जानते हैं कि अगर कांग्रेस जीती तो तरुण गोगोई फिर मुख्यमंत्री बनेंगे, जबकि भाजपा के कामाख्या प्रसाद केलिए ऐसी कोई संभावना नहीं है।
फिर गोगोई ने इस क्षेत्र को जो मान सम्मान दिलाया है और जो काम किए हैं, उन्हें लोग कैसे भूल सकते हैं। आगे चलने पर वायुसेना के सेवानिवृत्त कर्मचारी जितेन बरुआ भी कहते हैं कि तरुण गोगोई की जीत तय है।
बरुआ केंद्र सरकार के कामकाज के प्रति नाखुशी जताते हुए कहते हैं कि दाल, दवा और दूसरे सामान जिस तरह महंगे हुए हैं, उससे भाजपा का बदलाव के नारे की पोल खुल जाती है। तीताबर में जहां भी जितने लोगों से भी बात हुई सब कहते हैं कि गोगोई की जीत की बढ़त तो कम हो सकती है, लेकिन उनके जीतने में किसी को संदेह नहीं है।
इलाके के चाय बागान के मजदूर हों, किसान हों, या दूसरे गरीब तबके के लोग सब गोगोई के कामकाज की सराहना करते हैं।
ऊपरी असम की 34 सीटों पर कांग्रेस को कड़ी चुनौती
पूरे ऊपरी असम में कांग्रेस के पक्ष में ऐसे हालात नहीं हैं। ऊपरी असम में कुल 34 सीटें आती हैं, जिनमें 2011 में कांग्रेस ने 28 जीतकर तीसरी बार अपनी सत्ता वापसी की थी। लेकिन इस बार भाजपा गठबंधन से उसे ज्यादातर सीटों पर कड़ी चुनौती मिल रही है।
ऊपरी असम केदक्षिणी किनारे की जोरहाट, गोलाघाट, तीताबर और नमुलिगढ़ सीटों पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिखती है। लेकिन अन्य सीटों पर भाजपा गठबंधन से उसे कड़ी टक्कर मिल रही है। जबकि उत्तरी किनारे के जिलों में भाजपा के पक्ष में माहौल दिख रहा है। जोरहाट केस्थानीय पत्रकार संतोष काबरा का आकलन है कि इस बार ऊपरी असम में कम से कम भाजपा गठबंधन की जीत 20 से 22 सीटों पर तय है।
अगर ऐसा होता है तो यहां कांग्रेस को 14 से 16 सीटों तक का नुकसान हो सकता है। लेकिन जोरहाट के चिना मढ़ा में कांग्रेस कार्यकर्ता अखिल बरुआ कहते हैं कि यह सही है कि इस बार कांग्रेस केलिये यह चुनाव एकतरफा नहीं है और विपक्ष खासा मजबूत है।
फिर भी कांग्रेस अपनी ज्यादातर सीटें बचा ले जाएगी। जहां तक पोस्टर बैनर चुनाव कार्यालय कार्यकर्ताओं की हलचल और दूसरे प्रचार अभियान का सवाल है तो इस क्षेत्र में कांग्रेस किसी भी तरह भाजपा गठबंधन से आगे ही दिखती है। लेकिन लगातार दो दिन हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन सभाओं से भाजपा उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा है।