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असम: भीड़ हिंसा मामले में अदालत का बड़ा फैसला, 20 दोषी करार; सबूतों के अभाव में 25 बरी
Tue, 21 Apr 2026 05:43 AM IST
Nirmal Kant
ब्यूरो, नगांव/गुवाहाटी।
ब्यूरो, नगांव/गुवाहाटी।
Published by: Nirmal Kant
Updated Tue, 21 Apr 2026 05:43 AM IST
सार
असम के नगांव जिला एवं सत्र न्यायालय ने अभि-नील मॉब लिंचिंग मामले में 45 आरोपियों में से 20 को दोषी करार दिया, जबकि 25 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया और सजा 24 अप्रैल को सुनाई जाएगी। यह मामला क्या है, पढ़िए रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
असम के बहुचर्चित अभि-नील मॉब लिंचिंग मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। नगांव जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार को 45 आरोपियों में से 20 को दोषी ठहराया, जबकि 25 अन्य को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा पर फैसला 24 अप्रैल को सुनाया जाएगा। फैसले के बाद परिजनों ने इस पर असंतोष जताया और हाईकोर्ट जाने की बात कही है।
यह मामला 8 जून 2018 का है, जब कार्बी आंगलोंग जिला के पांजुरी कछारी गांव (डोकमोका थाना क्षेत्र) में अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। दोनों युवक गुवाहाटी के रहने वाले थे और घूमने निकले थे। अभियोजन के अनुसार, उस समय सोशल मीडिया पर बच्चा चोर होने की अफवाह तेजी से फैली हुई थी। इसी शक के आधार पर ग्रामीणों की भीड़ ने दोनों युवकों पर हमला कर दिया। बताया गया कि युवकों ने अपनी पहचान बताई और जान की गुहार भी लगाई लेकिन भीड़ ने उनकी एक नहीं सुनी। घटना के वीडियो बाद में सामने आए, जिससे पूरे असम में आक्रोश फैल गया।
किन आरोपों में पाए दोषी पाए गए 20 लोग
अदालत ने सबूतों की जांच के बाद 20 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के साथ धारा 149 (सामूहिक मंशा) सहित गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा और सरकारी कर्मचारियों पर हमला जैसे विभिन्न आरोपों में दोषी पाया। 25 आरोपियों को बरी करते हुए अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। अदालत ने यह भी माना कि कुछ मामलों में शरारत और उकसावे जैसे आरोप पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं हुए।
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ये भी पढ़ें: तमिलनाडु में 18% प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले, एक चौथाई से अधिक हैं करोड़पति
नगांव सेंट्रल जेल के अधीक्षक को निर्देश
अदालत ने नगांव सेंट्रल जेल के अधीक्षक को निर्देश दिया है कि बरी किए गए आरोपियों को रिहा किया जाए, बशर्ते किसी अन्य मामले में वांछित न हों। इस पर नीलोत्पल दास के पिता ने नाराजगी जताई और कहा कि वे कानूनी सलाह लेकर गौहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। यह घटना उस समय राज्यभर में बड़े विरोध-प्रदर्शनों का कारण बनी थी। नागरिक संगठनों और आम लोगों ने अफवाहों से प्रेरित भीड़ हिंसा के खिलाफ कड़े कानून और सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
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यह मामला 8 जून 2018 का है, जब कार्बी आंगलोंग जिला के पांजुरी कछारी गांव (डोकमोका थाना क्षेत्र) में अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। दोनों युवक गुवाहाटी के रहने वाले थे और घूमने निकले थे। अभियोजन के अनुसार, उस समय सोशल मीडिया पर बच्चा चोर होने की अफवाह तेजी से फैली हुई थी। इसी शक के आधार पर ग्रामीणों की भीड़ ने दोनों युवकों पर हमला कर दिया। बताया गया कि युवकों ने अपनी पहचान बताई और जान की गुहार भी लगाई लेकिन भीड़ ने उनकी एक नहीं सुनी। घटना के वीडियो बाद में सामने आए, जिससे पूरे असम में आक्रोश फैल गया।
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किन आरोपों में पाए दोषी पाए गए 20 लोग
अदालत ने सबूतों की जांच के बाद 20 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के साथ धारा 149 (सामूहिक मंशा) सहित गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा और सरकारी कर्मचारियों पर हमला जैसे विभिन्न आरोपों में दोषी पाया। 25 आरोपियों को बरी करते हुए अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। अदालत ने यह भी माना कि कुछ मामलों में शरारत और उकसावे जैसे आरोप पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं हुए।
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नगांव सेंट्रल जेल के अधीक्षक को निर्देश
अदालत ने नगांव सेंट्रल जेल के अधीक्षक को निर्देश दिया है कि बरी किए गए आरोपियों को रिहा किया जाए, बशर्ते किसी अन्य मामले में वांछित न हों। इस पर नीलोत्पल दास के पिता ने नाराजगी जताई और कहा कि वे कानूनी सलाह लेकर गौहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। यह घटना उस समय राज्यभर में बड़े विरोध-प्रदर्शनों का कारण बनी थी। नागरिक संगठनों और आम लोगों ने अफवाहों से प्रेरित भीड़ हिंसा के खिलाफ कड़े कानून और सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
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