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Rhino Poaching: 2022 में असम में नहीं हुआ एक भी गैंडे का शिकार, सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने दी जानकारी

Sun, 01 Jan 2023 06:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 01 Jan 2023 06:21 PM IST
सार

असम में पाए जाने वाले एक सींग वाले गैंडें पूरी दुनिया में जाने जाते है। इनको देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों  राज्य में आते हैं। वर्तमान में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 2,613 गैंडे रहते हैं।

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Assam CM Himanta Biswa Sarma said No incident of rhino poaching in 2022
गैंडा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

असम में प्रमुख रुप से पाए जाने वाले गैंडों को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने नए साल के पहले दिन बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि साल 2022 में पूरे राज्य में गैंडों के शिकार की कोई घटना नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अतीत में गैंडों का शिकार बड़े पैमाने पर होता था, लेकिन इसे रोकने के लिए व्यापक काम किया गया है। इसी का परिणाम है कि बीते साल एक भी ऐसी घटना नहीं हुई। 

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दरअसल, असम के सीएम हिमंता ने एक परंपरा का पालन करते हुए साल के पहले दिन पत्रकारों से बात की और बीते साल के बारे में भी चर्चा की। इस दौरान उन्होंने नए साल में होने वाले कामों को लेकर भी एक खाका खींचा। इसी दौरान उन्होंने असम में पाए जाने वाले गैंडों के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि गैंडों का अवैध शिकार अतीत में बड़े पैमाने पर होता था, जो अब कड़ी निगरानी और अधिकारियों द्वारा की जा रही अन्य सुरक्षा व्यवस्था के कारण काफी कम हो गया है।
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 एक सींग वाले गैंडों के लिए जाना जाता है असम
बता दें कि असम में पाए जाने वाले एक सींग वाले गैंडें पूरी दुनिया में जाने जाते है। इनको देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों  राज्य में आते हैं। वर्तमान में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 2,613 गैंडे रहते हैं। साथ ही नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, उनकी संख्या बढ़ रही है। 
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2021 में मात्र एक गैंडे का हुआ था शिकार
राष्ट्रीय उद्यान प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में अवैध शिकार के मामले बीते 21 साल में सबसे कम दर्ज किए गए थे। 2021 में एक गैंडे का शिकार किया गया था। वहीं, उससे पहले साल 2013 और 2014 में शिकारियों ने 27 गैंडों को मार दिया था।


काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान है 'गैंडे की भूमि' 
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, जिसे 'गैंडे की भूमि' भी कहा जाता है। दरअसल, यह उद्यान एक सींग वाले गैंडे के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में एक सींग वाले गैंडे की पूरी आबादी का 60 फीसदी से अधिक यहीं पर हैं। 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला यह उद्यान असम में स्थित है। यह असम का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान भी है। यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर घोषित किया गया है। घूमने के लिहाज से यह उद्यान बहुत ही शानदार है। यहां की हरियाली और तरह-तरह के पशु-पक्षी लोगों का मन मोह लेते हैं।


प्रतिबंधित उल्फा (आई) प्रमुख परेश बरुआ पर नैतिक रूप से दबाव बनाना होगा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को कहा कि संप्रभुता की मांग छोड़ने के लिए असम के लोगों को प्रतिबंधित उल्फा (आई) प्रमुख परेश बरुआ पर नैतिक रूप से दबाव बनाना होगा। सीएम ने कहा कि बरुआ सिर्फ संप्रभु असम की बात करते हैं। लोगों को उन्हें मांग छोड़ने के लिए राजी करना होगा ताकि इतिहास उन्हें विश्वासघाती न समझे। सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि सरकार के प्रयास जारी हैं। हमने वार्ता के लिए दरवाजे खुले रखे हैं। विरोध के बिंदु हैं और समझौते के भी बिंदु भी हैं। हमें आशावान रहना चाहिए।


उन्होंने कहा कि मैंने सीएम पद ग्रहण करते समाय जो शपथ ली थी, उससे पीछे नहीं हट सकता। मुझे लगता है कि वह भी अपनी मांग से पीछे नहीं हट सकते। क्योंकि उन्हें लगता है कि असम में उग्रवाद संबंधी हिंसा में लगभग 10000 लोगों के मारे जाने के बाद लोग उन्हें विश्वासघाती मानेंगे। ऐसे में यह बुद्धिजीवियों और विभिन्न संगठनों सहित लोगों की जिम्मेदारी है कि वे उनसे संप्रभुता की मांग छोड़ने का आग्रह करें।
 
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