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Assam: सरमा सरकार बड़ा फैसला, मुस्लिम विवाह-तलाक से जुड़ा पुराने कानून को निष्प्रभावी करने वाला विधेयक पारित
Thu, 29 Aug 2024 04:25 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Thu, 29 Aug 2024 04:25 PM IST
सार
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य केवल बाल विवाह को समाप्त करना नहीं, बल्कि काजी व्यवस्था से छुटकारा पाना भी है।
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असम विधानसभा
- फोटो : ANI
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विस्तार
असम विधानसभा ने गुरुवार को एक विधेयक पारित किया है। इसमें मुस्लिमों के विवाह और तलाक पंजीकरण से संबंधित एक कानून को निष्प्रभावी किया गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस विधेयक के पारित होने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आज के दिन को ऐतिहासिक बताया और कहा कि उनका अगला लक्ष्य बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाना है।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई के हमारे प्रयास में आज का दिन ऐतिहासिक है। असम विधानसभा ने असम अनिवार्य मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण विधेयक 2024 पारित कर दिया है। इस अधिनियम के तहत विवाह को सरकार के साथ पंजीकृत करना अनिवार्य होगा। अब लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष की विवाह की कानूनी उम्र का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। इस विधेयक का समर्थन करने वाले सभी विधायकों का मैं समर्थन करता हूं। यह विधेयक राजनीति से ऊपर है। इसका उद्देश्य लड़कियों को सम्मान देना है। हमारा अगला लक्ष्य बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाना है।"
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राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री जोगेन मोहन ने 22 अगस्त को विधानसभा में असम निरसन विधेयक, 2024 पेश किया था, जिसमें असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 और असम निरसन अध्यादेश 2024 को रद्द करने का प्रावधान है।
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काजी व्यवस्था से छुटकारा पाना उद्देश्य
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य केवल बाल विवाह को समाप्त करना नहीं, बल्कि काजी व्यवस्था से छुटकारा पाना भी है। हम मुस्लिम विवाह और तलाक के पंजीकरण को सरकारी तंत्र के तहत लाना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सभी विवाहों का पंजीकरण सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किया जाना चाहिए, लेकिन राज्य इस उद्देश्य के लिए काजी जैसे निजी निकाय का समर्थन नहीं कर सकता है।
उन्होंने कहा कि सभी विवाहों का पंजीकरण उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार करना होगा, लेकिन राज्य सरकार इस उद्देश्य के लिए काजियों की तरह अलग से किसी निजी इकाई का समर्थन नहीं कर सकती।
विपक्षियों ने की निंदा
विपक्षी दलों ने इस फैसले की निंदा करते हुए इसे मुस्लिमों के साथ भेदभाव वाला तथा चुनावी साल में मतदाताओं के ध्रुवीकरण वाला बताया। असम सरकार ने मंगलवार को असम मुस्लिम विवाह और तलाक अनिवार्य पंजीकरण विधेयक, 2024 पेश किया था।
क्या बोले मोहन?
मोहन ने निरसन विधेयक के उद्देश्य पर कहा कि 21 साल से कम उम्र (पुरुष के मामले में) और 18 साल (महिला के मामले में) के विवाह के पंजीकरण की गुंजाइश बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए शायद ही कोई प्रावधान था और इसकी वजह से अदालत में बड़ी संख्या में मामले आए।
उन्होंने आगे कहा कि अधिकृत लाइसेंसधारी (मुस्लिम विवाह रजिस्ट्रार) के साथ-साथ नागरिकों द्वारा कम उम्र या नाबालिग विवाह और पार्टियों की सहमति के बिना जबरन विवाह की गुंजाइश है। इसके अलावा, विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य नहीं था और पंजीकरण तंत्र अनौपचारिक था, जिसमें मानदंडों का पालन न करने की बहुत गुंजाइश थी।
मंत्री ने कहा, 'यह आजादी से पहले ब्रिटिश भारत सरकार द्वारा असम प्रांत में मुस्लिमों की धार्मिक और सामाजिक व्यवस्थाओं के लिए अपनाया गया था।'
मंगलवार को पेश हुआ था अनिवार्य पंजीकरण विधेयक
असम सरकार ने मंगलवार को मुस्लिम विवाह और तलाक अनिवार्य पंजीकरण विधेयक, 2024 पेश किया था। पिछले महीने, कैबिनेट ने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम और 1935 के नियमों को समाप्त करने के लिए निरसन विधेयक को मंजूरी दे दी थी, जो विशिष्ट परिस्थितियों में कम उम्र में विवाह की अनुमति देता है।
असम मंत्रिमंडल ने राज्य में बाल विवाह के सामाजिक खतरे को समाप्त करने के लिए 23 फरवरी को अधिनियम को निरस्त करने के फैसले को मंजूरी दी थी। विपक्षी दलों ने फैसले की निंदा करते हुए कहा था कि यह मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण है जो चुनावी वर्ष में मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए लाया गया है।