फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ASI says Waqf making claims on its monuments, opposition members criticise some of its claims

Waqf Bill: एएसआई के अधीन स्मारकों को अपना बता रहे वक्फ बोर्ड, ASI ने JPC को सौंपी 120 स्मारकों की सूची

Fri, 06 Sep 2024 11:37 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Fri, 06 Sep 2024 11:37 PM IST
सार

वक्फ (संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संसदीय समिति को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शुक्रवार को 120 से अधिक स्मारकों की सूची पेश की। एएसआई ने कहा कि स्मारक उनके संरक्षण में हैं, लेकिन विभिन्न राज्य वक्फ बोर्ड स्मारकों पर अपना दावा करते हैं।

विज्ञापन
ASI says Waqf making claims on its monuments, opposition members criticise some of its claims
वक्फ संशोधन बिल पर संसदीय समिति के सामने पेश हुआ एएसआई - फोटो : ANI

विस्तार

एएसआई और वक्फ बोर्ड के बीच स्मारकों के स्वामित्व को लेकर विवाद छिड़ा है। वक्फ (संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संसदीय समिति को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शुक्रवार को 120 से अधिक स्मारकों की सूची पेश की। एएसआई ने कहा कि स्मारक उनके संरक्षण में हैं, लेकिन विभिन्न राज्य वक्फ बोर्ड स्मारकों पर अपना दावा करते हैं। विपक्षी सदस्यों ने एएसआई की दलील की आलोचना की कि मुस्लिम निकाय किसी भी संपत्ति पर अपना दावा कर सकते हैं। बताया जाता है कि बैठक के पहले सत्र में विपक्ष और भाजपा के कुछ सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। इस दौरान एएसआई को दोनों पक्षों की ओर से तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन


विपक्षी सदस्यों ने संस्कृति मंत्रालय पर समिति सदस्यों को गुमराह करने का आरोप लगाया। साथ ही गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया। इसमें दावा किया जाता है कि वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति पर स्वामित्व घोषित कर सकता है। एएसआई संस्कृति मंत्रालय के अधीन काम करता है। एएसआई ने अपनी प्रस्तुति में 53 स्मारकों की सूची दी, जिन पर वक्फ अपना दावा करता है। इनमें से कुछ को देश की आजादी से पहले का इतिहास रखने वाले एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किए जाने के लगभग एक सदी बाद वक्फ की संपत्ति घोषित किया गया।
विज्ञापन


सूची में महाराष्ट्र के अहमदनगर स्थित निजाम शासक अहमद शाह की कब्र को शामिल किया गया। इसे एएसआई ने 1909 में संरक्षित स्मारक घोषित किया था, जबकि 2006 में इसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया। जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया और इंटरफेथ कोलिशन फॉर पीस का प्रतिनिधित्व सैयद जफर महमूद ने किया। दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एवं एएमयू के पूर्व कुलपति जमीर उद्दीन शाह तथा पैकियम सैमुअल भी संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष पेश हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन


तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड भी समिति के सामने पेश हुआ। सूत्रों ने कहा कि तीनों निकायों ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ है। एएसआई ने कहा कि विभिन्न वक्फ निकायों ने उसके स्मारकों पर अतिक्रमण किया है और मदरसा-शौचालय जैसे निर्माण किए हैं। इसका कुछ विपक्षी सदस्यों ने विरोध किया कि और कहा कि ये सुविधाएं मुसलमानों के इबादत स्थलों में मौजूद होनी चाहिए।

बताया जाता है कि एक विपक्षी सांसद ने एएसआई पर आरोप लगाया कि अकेले दिल्ली में 172 वक्फ संपत्तियों पर उसका कब्जा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सर्वेक्षण निकाय का अधिनियम उसे किसी भी स्मारक के धार्मिक चरित्र को बदलने की अनुमति नहीं देता। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि हिंदू धार्मिक स्थानों के मामले में एएसआई का रवैया कुछ और है।


भाजपा सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में संसद की संयुक्त समिति की बैठक में भाग लेने वाले सांसदों में भाजपा के निशिकांत दुबे, बृजलाल, तेजस्वी सूर्या और संजय जायसवाल, कांग्रेस के गौरव गोगोई, मोहम्मद जावेद, सैयद नसीर हुसैन और इमरान मसूद, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह मौजूद रहे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed