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'भ्रष्टाचार से मेरा कोई लेना-देना नहीं, मुझे बदनाम किया': आशीष बनर्जी का कथित सुसाइड नोट आया सामने; क्या लिखा?
Sun, 16 Aug 2026 11:17 AM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 16 Aug 2026 11:17 AM IST
सार
पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्य आशीष बनर्जी की मौत के बाद उनका कथित सुसाइड नोट सामने आया है। इसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि उन्होंने जिंदगीभर काम के बदले किसी से पैसे नहीं लिए। अपने कथित सुसाइड नोट में उन्होंने और क्या-क्या लिखा? पढ़िए रिपोर्ट-
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आशीष बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी ने रविवार सुबह कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। वह बीरभूम जिले के रामपुरहाट में पार्टी कार्यालय में मृत पाए गए। उनका एक कथित सुसाइट नोट भी सामने आाया है। इसमें उन्होंने कहा, मेरा भ्रष्टाचार से कोई लेना-देना नहीं था। फिर भी मुझे बदनाम करने के लिए ये सारे पूरी तरह से झूठे आरोप लगाए गए।
आशीष बनर्जी ने कथित सुसाइड नोट में क्या लिखा?
उन्होंने लिखा, मैं छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़ा रहा हूं। बर्दवान विश्वविद्यालय में छात्र संसद का महासचिव भी रहा। लेकिन मैंने कभी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं किया। मैंने पूरी जिंदगी काम के बदले किसी से कोई पैसा नहीं लिया। उन्होंने लिखा, मेरे साथ काम करने वाले लोगों या मेरे संपर्क में रहने वाले लोगों से भी मैंने कभी कोई आर्थिक लाभ नहीं लिया। यहां तक कि मेरे जो लड़के मेरे साथ काम करते थे, उनसे मैंने एक मिठाई तक नहीं खाई। मैं कभी किसी आर्थिक भ्रष्टाचार से जुड़ा नहीं रहा।
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आशीष बनर्जी ने लिखा, टीआरडीए की आम बैठक के अलावा मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं थी। मैं निविदा समिति में नहीं था। किसी चेक पर हस्ताक्षर करने का अधिकार मेरे पास नहीं था। किसी योजना को मंजूरी देने या अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने में भी मेरी कोई भूमिका नहीं थी।
ये भी पढ़ें: TMC दफ्तर में मिला पूर्व डिप्टी स्पीकर का शव: ममता सरकार में संभाल चुके थे अहम विभाग; पांच बार जीता था चुनाव
उन्होंने लिखा, मेरे खिलाफ तरह-तरह की बातें की गईं और मुझे बदनाम करने की कोशिश की गई। इन सब चीजों से मुझे लगा कि शायद राजनीति में आना ही मेरी गलती थी। बनर्जी ने लिखा, मैं अपने लड़कों से भी कहना चाहता हूं कि वे राजनीति में न आएं। मैंने जीवनभर ईमानदारी से काम किया है और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा हूं। मेरी मृत्यु के लिए किसी को जिम्मेदार न माना जाए।
अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा?
टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आशीष बनर्जी के निधन पर कहा, पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व विधायक और पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी की दुखद मौत सिर्फ दिल तोड़ने वाली घटना नहीं है। यह उन सभी लोगों को सोचने पर मजबूर करती है, जो मानते हैं कि राजनीति और पत्रकारिता की भी कुछ सीमाएं होनी चाहिए।
उन्होंने लिखा, आशीष दा ने पूरी जिंदगी शिक्षक और जनसेवक के रूप में काम किया। उन्होंने कई दशक तक ईमानदारी, सम्मान और सादगी के साथ लोगों की सेवा की। वह एक सम्मानित व्यक्ति थे। रामपुरहाट और पूरे बीरभूम जिले के लिए गर्व की बात थे। उनके आखिरी नोट ने उनके खिलाफ चलाए गए कथित बदनाम करने के अभियान पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार बदनाम किया गया।
उन्होंने कहा, भाजपा और मीडिया के कुछ हिस्सों को इस बारे में सोचना चाहिए। ऐसी राजनीति के क्या नतीजे होते हैं, जिसमें आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। लोगों की छवि को सवालों के घेरे में खड़ा किया जाता है। सच सामने आने से पहले ही लोगों को जनता की नजरों में दोषी मान लिया जाता है।
उन्होंने आगे कहा, जिन लोगों ने इस बदनाम करने वाले अभियान में हिस्सा लिया, उन्हें अपने शब्दों और काम के इंसानी असर के बारे में सोचना चाहिए। राजनीतिक लड़ाइयां आती-जाती रहेंगी। लेकिन एक बार किसी की जान चली जाए, तो उसे वापस नहीं लाया जा सकता।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, बंगाल ने अपने सबसे सम्मानित लोगों में से एक को खो दिया है। उनके परिवार, छात्रों, चाहने वालों और शुभचिंतकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। भगवान इस बेहद दुख की घड़ी में उन्हें हिम्मत दे।
ममता सरकार में रहे विधानसभा उपाध्यक्ष
आशीष बनर्जी उस समय पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष थे, जब तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री थीं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पार्टी के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां संभाली थीं।
किस सीट से पांच बार रहे विधायक?
रामपुरहाट विधानसभा सीट से आशीष बनर्जी पांच बार विधायक चुने गए थे। हालांकि, इस साल की शुरुआत में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ध्रुबा साहा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
कहां रहता है आशीष बनर्जी का परिवार?
आशीष बनर्जी अपने परिवार के साथ रामपुरहाट के हत्तलापारा इलाके में रहते थे। उनके निधन की खबर फैलते ही तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों की बड़ी संख्या पार्टी कार्यालय के बाहर जुट गई। घटना के बाद इलाके में लोगों के बीच शोक और चर्चा का माहौल बन गया।
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आशीष बनर्जी ने कथित सुसाइड नोट में क्या लिखा?
उन्होंने लिखा, मैं छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़ा रहा हूं। बर्दवान विश्वविद्यालय में छात्र संसद का महासचिव भी रहा। लेकिन मैंने कभी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं किया। मैंने पूरी जिंदगी काम के बदले किसी से कोई पैसा नहीं लिया। उन्होंने लिखा, मेरे साथ काम करने वाले लोगों या मेरे संपर्क में रहने वाले लोगों से भी मैंने कभी कोई आर्थिक लाभ नहीं लिया। यहां तक कि मेरे जो लड़के मेरे साथ काम करते थे, उनसे मैंने एक मिठाई तक नहीं खाई। मैं कभी किसी आर्थिक भ्रष्टाचार से जुड़ा नहीं रहा।
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आशीष बनर्जी ने लिखा, टीआरडीए की आम बैठक के अलावा मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं थी। मैं निविदा समिति में नहीं था। किसी चेक पर हस्ताक्षर करने का अधिकार मेरे पास नहीं था। किसी योजना को मंजूरी देने या अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने में भी मेरी कोई भूमिका नहीं थी।
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उन्होंने लिखा, मेरे खिलाफ तरह-तरह की बातें की गईं और मुझे बदनाम करने की कोशिश की गई। इन सब चीजों से मुझे लगा कि शायद राजनीति में आना ही मेरी गलती थी। बनर्जी ने लिखा, मैं अपने लड़कों से भी कहना चाहता हूं कि वे राजनीति में न आएं। मैंने जीवनभर ईमानदारी से काम किया है और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा हूं। मेरी मृत्यु के लिए किसी को जिम्मेदार न माना जाए।
अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा?
टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आशीष बनर्जी के निधन पर कहा, पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व विधायक और पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी की दुखद मौत सिर्फ दिल तोड़ने वाली घटना नहीं है। यह उन सभी लोगों को सोचने पर मजबूर करती है, जो मानते हैं कि राजनीति और पत्रकारिता की भी कुछ सीमाएं होनी चाहिए।
उन्होंने लिखा, आशीष दा ने पूरी जिंदगी शिक्षक और जनसेवक के रूप में काम किया। उन्होंने कई दशक तक ईमानदारी, सम्मान और सादगी के साथ लोगों की सेवा की। वह एक सम्मानित व्यक्ति थे। रामपुरहाट और पूरे बीरभूम जिले के लिए गर्व की बात थे। उनके आखिरी नोट ने उनके खिलाफ चलाए गए कथित बदनाम करने के अभियान पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार बदनाम किया गया।
उन्होंने कहा, भाजपा और मीडिया के कुछ हिस्सों को इस बारे में सोचना चाहिए। ऐसी राजनीति के क्या नतीजे होते हैं, जिसमें आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। लोगों की छवि को सवालों के घेरे में खड़ा किया जाता है। सच सामने आने से पहले ही लोगों को जनता की नजरों में दोषी मान लिया जाता है।
उन्होंने आगे कहा, जिन लोगों ने इस बदनाम करने वाले अभियान में हिस्सा लिया, उन्हें अपने शब्दों और काम के इंसानी असर के बारे में सोचना चाहिए। राजनीतिक लड़ाइयां आती-जाती रहेंगी। लेकिन एक बार किसी की जान चली जाए, तो उसे वापस नहीं लाया जा सकता।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, बंगाल ने अपने सबसे सम्मानित लोगों में से एक को खो दिया है। उनके परिवार, छात्रों, चाहने वालों और शुभचिंतकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। भगवान इस बेहद दुख की घड़ी में उन्हें हिम्मत दे।
ममता सरकार में रहे विधानसभा उपाध्यक्ष
आशीष बनर्जी उस समय पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष थे, जब तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री थीं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पार्टी के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां संभाली थीं।
किस सीट से पांच बार रहे विधायक?
रामपुरहाट विधानसभा सीट से आशीष बनर्जी पांच बार विधायक चुने गए थे। हालांकि, इस साल की शुरुआत में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ध्रुबा साहा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
कहां रहता है आशीष बनर्जी का परिवार?
आशीष बनर्जी अपने परिवार के साथ रामपुरहाट के हत्तलापारा इलाके में रहते थे। उनके निधन की खबर फैलते ही तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों की बड़ी संख्या पार्टी कार्यालय के बाहर जुट गई। घटना के बाद इलाके में लोगों के बीच शोक और चर्चा का माहौल बन गया।