आसाराम को गिरफ्तार करने वाले इस पुलिस अधिकारी को मिली थीं हजारों धमकियां, सुनाई आपबीती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नाबालिग से रेप केस मामले में आखिरकार आसाराम को सजा का ऐलान बुधवार को कर दिया गया। जोधपुर कोर्ट ने आसाराम को उम्र कैद की सजा दी है। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में शामिल रहे सीनियर पुलिस ऑफिसर अजय पाल लांबा को इस दौरान कई धमकी भरे पत्र और फोन कॉल्स के जरिए डराया जाता था।
लांबा ने बताया 'मुझे इस केस की जांच का जिम्मा 20 अगस्त 2013 को मिला था। उस समय में मैं जोधपुर के डीसीपी पद पर था। कई धमकियां मिलने के बाद भी मैंने हार नहीं मानी और अपना काम करता रहा।'
आसाराम की मध्यप्रदेश में गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभाने वाले 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी लांबा बताते हैं कि 'धमकी भरे खतों में मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी जाती थी। मैं अपने मोबाइल फोन पर अज्ञात लोगों की कॉल्स रिसीव नहीं करता था। इन धमकियों का सिलसिला तब खत्म हुआ जब मैं उदयपुर में शिफ्ट हो गया।'
बता दें कि लांबा फिलहाल जोधपुर में एंटी-करप्श ब्यूरो में पुलिस अधीक्षक हैं। उन्होंने आगे बताया '30 अगस्त 2013 को जब उनकी अगुवाई में 11 सदस्यों की एक टीम आसाराम को गिरफ्तार करने गई थी तो वहां बाबा के अनुयायियों से कई बार जूझना पड़ा और काफी मशक्कत के बाद आसाराम की गिरफ्तारी की गई। इस दौरान आसराम अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए कई हथकंडे अपना रहा था लेकिन हमने उसकी किसी भी योजना को सफल नहीं होने दिया।
गौरतलब है कि आसाराम को नाबालिग से रेप का दोषी करार दिया गया जिसके बाद उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। आसाराम एक नाबालिग लड़की से रेप के आरोप में करीब 5 साल से ज्यादा वक्त से जेल में बंद है।
इस मामले में आसाराम के साथ दो और लोगों को दोषी करार दिया गया है। जिन्हें 20-20 साल के कैद हुई है। इस मामले में कुल पांच लोग आरोपी थें, जिनमें दो लोगों को बरी कर दिया गया है। आसाराम रेप केस में फैसला सुनाने के लिए कोर्ट जेल में ही लगा और वहीं फैसला सुनाया गया।