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उत्तर प्रदेश एग्जिट पोल: तीन मुद्दे जिनकी वजह से दिखने लगा बहुमत का रास्ता, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सार
उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वाले जीडी शुक्ला कहते हैं कि डबल इंजन की सरकार के जो दावे थे और उन दावों का पब्लिक के बीच में जो असर था वही रुझानों में स्पष्ट दिख रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोबारा बनाने का पूरा जनादेश बता रहे हैं। हालांकि, एग्जिट पोल के आंकड़े अलग-अलग हैं, लेकिन सभी एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी ही आगे है, जबकि समाजवादी पार्टी दूसरे नंबर पर और बसपा-कांग्रेस सबसे निचले पायदान पर दिख रही हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति को करीब से समझने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरीके के आंकड़े एग्जिट पोल में सामने आ रहे हैं वह स्पष्ट तौर पर इशारा कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश की जनता ने महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर, राशन के मुद्दे पर और डबल इंजन की सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित होकर ही बंपर जीत के रुझान दिए हैं।
सोमवार को उत्तर प्रदेश के सातवें चरण के मतदान होने के साथ ही चुनावों के रुझान सामने आने लगे। उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वाले जीडी शुक्ला कहते हैं कि डबल इंजन की सरकार के जो दावे थे और उन दावों का पब्लिक के बीच में जो असर था वही रुझानों में स्पष्ट दिख रहा है। शुक्ला कहते हैं कि जिस तरीके से वोट प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी का बढ़ता हुआ दिख रहा है वह इशारा करता है कि उत्तर प्रदेश में प्रदेश और केंद्र सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ राशन और महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था ने ही भारतीय जनता पार्टी को वापस सत्ता में बंपर तरीके से लाने का रुझान दिखाया है।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि जिन मुद्दों को लेकर शुरुआती दौर में कयास लगाए जा रहे थे कि समाजवादी पार्टी उन के माध्यम से लीड करेगी वह आज एग्जिट पोल में बिल्कुल नदारद दिखे। उसकी वजह बताते हुए सिंह कहते हैं कि अगर यह एग्जिट पोल वास्तव में नतीजों में परिवर्तित होते हैं तो यह माना जाएगा कि डबल इंजन सरकार ने मजबूत तरीके से न सिर्फ काम किया बल्कि हर जाति धर्म और समुदाय के लोगों को अपने साथ जोड़ा है। सिंह कहते हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिस तरह एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आ रहे हैं वह यह बताने के लिए काफी है कि राष्ट्रीय स्तर पर छाए रहे किसान आंदोलन का भी कोई असर देखने को नहीं मिला है। हालांकि सिंह का कहना है कि 10 तारीख को ही पता चलेगा कि एग्जिट पोल के आंकड़े कितने सही हैं।
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चुनावी रुझानों का सर्वे करने वाली एक कंपनी से जुड़े अमोल त्यागी कहते हैं कि पहले और दूसरे चरण में जो सर्वे उन्होंने किया उसमें न सिर्फ किसानों का मुद्दा गायब था बल्कि बहुत से ऐसे इलाके थे जिसमें यह माना जा रहा था कि केंद्र की योजनाओं का लाभ लेने वाले लोग भारतीय जनता पार्टी को तमाम समीकरणों के चलते वोट नहीं करेंगे। त्यागी कहते हैं लेकिन ऐसा उनको अपने सर्वे में बिल्कुल नहीं दिखा। यही वजह है कि रुझान अलग कहानी कह रहे हैं। त्यागी कहते हैं इसी तरह उत्तर प्रदेश में चुनावों से पहले सबसे ज्यादा राजनीति लखीमपुर में हुई थी पर इसका असर भी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बिल्कुल नहीं पड़ा।
चौथे चरण में तो उनके सर्वे भारतीय जनता पार्टी को बंपर तरीके से जिता रहे हैं। वो कहते हैं कि गरीबों को मिलने वाला राशन, महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के साथ-साथ डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने खुलकर भाजपा को न सिर्फ समर्थन दिया बल्कि वोट भी किया।
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सोमवार को उत्तर प्रदेश के सातवें चरण के मतदान होने के साथ ही चुनावों के रुझान सामने आने लगे। उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वाले जीडी शुक्ला कहते हैं कि डबल इंजन की सरकार के जो दावे थे और उन दावों का पब्लिक के बीच में जो असर था वही रुझानों में स्पष्ट दिख रहा है। शुक्ला कहते हैं कि जिस तरीके से वोट प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी का बढ़ता हुआ दिख रहा है वह इशारा करता है कि उत्तर प्रदेश में प्रदेश और केंद्र सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ राशन और महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था ने ही भारतीय जनता पार्टी को वापस सत्ता में बंपर तरीके से लाने का रुझान दिखाया है।
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उत्तर प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि जिन मुद्दों को लेकर शुरुआती दौर में कयास लगाए जा रहे थे कि समाजवादी पार्टी उन के माध्यम से लीड करेगी वह आज एग्जिट पोल में बिल्कुल नदारद दिखे। उसकी वजह बताते हुए सिंह कहते हैं कि अगर यह एग्जिट पोल वास्तव में नतीजों में परिवर्तित होते हैं तो यह माना जाएगा कि डबल इंजन सरकार ने मजबूत तरीके से न सिर्फ काम किया बल्कि हर जाति धर्म और समुदाय के लोगों को अपने साथ जोड़ा है। सिंह कहते हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिस तरह एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आ रहे हैं वह यह बताने के लिए काफी है कि राष्ट्रीय स्तर पर छाए रहे किसान आंदोलन का भी कोई असर देखने को नहीं मिला है। हालांकि सिंह का कहना है कि 10 तारीख को ही पता चलेगा कि एग्जिट पोल के आंकड़े कितने सही हैं।
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चुनावी रुझानों का सर्वे करने वाली एक कंपनी से जुड़े अमोल त्यागी कहते हैं कि पहले और दूसरे चरण में जो सर्वे उन्होंने किया उसमें न सिर्फ किसानों का मुद्दा गायब था बल्कि बहुत से ऐसे इलाके थे जिसमें यह माना जा रहा था कि केंद्र की योजनाओं का लाभ लेने वाले लोग भारतीय जनता पार्टी को तमाम समीकरणों के चलते वोट नहीं करेंगे। त्यागी कहते हैं लेकिन ऐसा उनको अपने सर्वे में बिल्कुल नहीं दिखा। यही वजह है कि रुझान अलग कहानी कह रहे हैं। त्यागी कहते हैं इसी तरह उत्तर प्रदेश में चुनावों से पहले सबसे ज्यादा राजनीति लखीमपुर में हुई थी पर इसका असर भी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बिल्कुल नहीं पड़ा।
चौथे चरण में तो उनके सर्वे भारतीय जनता पार्टी को बंपर तरीके से जिता रहे हैं। वो कहते हैं कि गरीबों को मिलने वाला राशन, महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के साथ-साथ डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने खुलकर भाजपा को न सिर्फ समर्थन दिया बल्कि वोट भी किया।