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निशाने पर दिल्ली-पंजाब: क्यों केजरीवाल को करना पड़ा नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट? 'आप' ने बताया नया इतिहास, तो भाजपा ने बताया प्रचार

Tue, 26 Apr 2022 07:45 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 26 Apr 2022 07:45 PM IST
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सार
पिछले दिनों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के उच्च अधिकारियों के साथ दिल्ली में बैठक की थी। इस बैठक के बाद यह प्रश्न उठाया गया था कि पंजाब के मुख्य सचिव किसी दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री के सामने एक अधिकारी के रूप में कैसे उपस्थित हो सकते हैं। विपक्षी दलों ने इसे पंजाब को 'ठेके' पर देने की कोशिश करार दिया था...
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Arvind Kejriwal signed a knowledge sharing agreement with Punjab, BJP called it PR exercise
सीएम भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के साथ एक 'नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट' किया है। इसके अंतर्गत दिल्ली और पंजाब दोनों राज्य आपस में शिक्षा और स्वास्थ्य पर सूचनाओं का नई तकनीकी का ज्ञान साझा करेंगे। केजरीवाल ने कहा है कि इससे पंजाब के लोगों को भी दिल्ली की तरह बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। लेकिन जानकारों के मुताबिक यह समझौता उस संवैधानिक पेंच से बचने के लिए किया गया है, जो उनके पंजाब के अधिकारियों के साथ मिलने के कारण पैदा हुई थी।



दरअसल, पिछले दिनों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के उच्च अधिकारियों के साथ दिल्ली में बैठक की थी। इस बैठक के बाद यह प्रश्न उठाया गया था कि पंजाब के मुख्य सचिव किसी दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री के सामने एक अधिकारी के रूप में कैसे उपस्थित हो सकते हैं। विपक्षी दलों ने इसे पंजाब को 'ठेके' पर देने की कोशिश करार दिया था। पंजाब कांग्रेस ने इसे 'पंजाबियत' के विरुद्ध बताया था। बाद में चुनाव के समय यह मुद्दा आम आदमी पार्टी के लिए समस्याएं खड़ी कर सकता था। लिहाजा, चर्चा है कि इस नॉलेज शेयरिंग डील के बहाने केजरीवाल की पंजाब के शासन-प्रशासन में दखल को एक कानूनी जामा पहनाने की कोशिश की गई है जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे।


तकनीकी रूप से एक केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री होने के नाते अरविंद केजरीवाल प्रोटोकॉल में पंजाब के मुख्य सचिव से भी नीचे आते हैं। तकनीकी तौर पर वे पंजाब के मुख्य सचिव की बैठक नहीं ले सकते थे। इस तकनीकी खामी को दूर करने के लिए और दिल्ली-पंजाब के अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट को अमल में लाया गया है।

भाजपा ने बताया, पीआर एक्सरसाइज

भाजपा नेता सुमित भसीन ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल केवल खबरों में रहने के लिए इस तरह के आयोजन करते हैं। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने अपने शिक्षा मॉडल को सबसे बेहतर बताने की कोशिश की है, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि दिल्ली सरकार की कितने मंत्रियों और पार्टी के विधायकों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं? इसी से खुलासा हो जाता है कि दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों पर किए गए दावे झूठे हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के 79 फीसदी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई नहीं कराई जाती। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे न डॉक्टर बन सकते हैं, न इंजीनियरिंग कर सकते हैं, वे वैज्ञानिक भी नहीं बन सकते हैं। आज के युग में बच्चों को विज्ञान की शिक्षा से वंचित रखने के बाद भी अपनी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बताने का काम केवल केजरीवाल ही कर सकते हैं।


सुमित भसीन ने कहा कि अरविंद केजरीवाल केवल प्रचार में यकीन रखते हैं और वह काम करने की बजाय हर घटना को एक पीआर एक्सरसाइज बना देते हैं। इस तथाकथित नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट के बहाने भी वे केवल प्रचार पानी की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पांच सितारा होटलों में बैठक कर केजरीवाल और भगवंत मान केवल जनता का पैसा बर्बाद कर रहे हैं। उन्हें इस पैसे को जनता की भलाई में खर्च करना चाहिए।

'केजरीवाल ने केजरीवाल से किया समझौता'

दिल्ली कांग्रेस उपाध्यक्ष मुदित अग्रवाल ने कहा कि यह सभी जानते हैं कि भगवंत मान का पंजाब सरकार पर कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैक डोर से अरविंद केजरीवाल दिल्ली से पंजाब पर शासन कर रहे हैं। अपने इस शासन को ज्यादा वैध बनाने के लिए उन्होंने इस नॉलेज शेयरिंग एग्रीमेंट का ड्रामा किया है। उन्होंने कहा कि यह 'केजरीवाल का केजरीवाल से' किया गया समझौता है। इसका जनता के हित से कोई लेना देना नहीं है।

मुदित अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक फेल साबित हो गए हैं। उनमें से किसी में भी आम आदमी को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। कोविड-19 के दौरान भी दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई थीं और किसी पीड़ित को वेंटिलेटर, आईसीयू और ऑक्सीजन तक की सुविधा नहीं मिल पाई थी। इस कारण हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। दिल्ली की यह सच्चाई सभी जानते हैं, इसलिए अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बताना बंद कर देना चाहिए।

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