राम जेठमलानी के चुभते सवाल का जेटली ने इस अंदाज में दिया जवाब
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच तीखी तकरार दिल्ली हाईकोर्ट में भी चली। हालांकि केजरीवाल खुद जेटली से सवाल नहीं पूछे बल्कि देश के जाने-माने वकील राम जेठमलानी ने कई उनसे तीखे सवाल किए। लेकिन इन सवालों के जरिए वित्त मंत्री ने केजरीवाल को करारा जवाब भी दिया।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट में जेटली ने कहा कि जब एक मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर किए गए गैर-जिम्मेदाराना बयान का समर्थन करता है, तो यह एक गंभीर मामला बन जाता है।
केजरीवाल के वकील ने जेटली पर तंज कसते हुए कहा था कि पहली बार कोई मंत्री जनता के बीच सीधा चुनाव लड़ता है और वो हार जाता है, इससे उसकी प्रतिष्ठा की जांच हो जाती है। गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर से चुनाव हार गए थे। जेठमलानी के इस सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि कई कारणों से प्रभावित होकर चुनाव के परिणाम आते हैं, इसके लिए उम्मीदवार की प्रतिष्ठा की जांच से नहीं जोड़ सकते।
जेटली यही नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि उसी लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल वाराणसी सीट से करीब 3.5 लाख वोटों से हार गए थे।
जेठमलानी ने जेटली से पूछा कि शिक्षाविद् मधु किश्वर और पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी ने आपके खिलाफ सोशल मीडिया पर संगीन आरोप लगाए हैं? लेकिन आप उनके खिलाफ मुकदमे की हिम्मत नहीं की। इस सवाल का जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि सोशल मीडिया पर बहुत से लोग सार्वजनिक जीनव में रहनेवाले लोगों पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हैं, लेकिन जब एक मुख्यमंत्री उन्हें समर्थन देता है, तो यह एक गंभीर मामला बन जाता है। यहां तक कि झूठे आरोपों से केजरीवाल ने विश्वसनीयता हासिल करने की कोशिश की है।
जब जेठमलानी ने मंत्री को यह कहते हुए कहा कि उनके मुवक्किल अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्विट्टर में केवल किश्वर का किया हुआ ट्वीट को रिट्वीट किया था। तब जेटली ने कहा कि उन्होंने कभी किश्वर पर मुकदमा नहीं लगाया, लेकिन यह ट्वीट बहुत बदनाम करनेवाला है और मुख्यमंत्री द्वारा पुनरावृत्ति करना इसमें निहित झूठ की विश्वसनीयता को और बढ़ा देता है।
गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने केजरीवाल समेत छह आप नेताओं पर 10 करोड़ रुपये का मानहानि दावा ठोका है। जेटली का आरोप है कि केजरीवाल व अन्य नेताओं ने उन पर डीडीसीए अध्यक्ष रहते हुए वित्तीय अनियमितता का झूठा आरोप लगाया।
जेटली 2013 तक 13 साल तक डीडीसीए के अध्यक्ष थे। जेटली ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दिसंबर 2015 में पटियाला हाउस कोर्ट में मानहानि का आपराधिक व हाईकोर्ट में दीवानी मुकदमा दायर किया था।