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Arunachal Pradesh: केंद्र ने अरुणाचल में चीनी सीमा के पास छह गलियारों को दी मंजूरी

Tue, 25 Oct 2022 07:54 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, ईटानगर
अमर उजाला ब्यूरो, ईटानगर Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 25 Oct 2022 07:54 PM IST
सार

Arunachal Pradesh: फ्रंटियर हाईवे की लंबाई लगभग 1,859 किलोमीटर है। परियोजना के तहत, नफरा (पश्चिम में तवांग के पास) विजयनगर (पूर्व में भारत-चीन-म्यांमार सीमा के ट्राइजंक्शन पर), फ्रंटियर हाईवे का निर्माण 40,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा...

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Arunachal Pradesh: Center approves six corridors near China border
PEMA KHANDU - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश में दो समानांतर राजमार्गों (ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग और पूर्व-पश्चिम कॉरिडाेर) से जुड़ने वाले छह गलियारों को मंजूरी दी है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस पर ट्वीट कर कहा, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से अरुणाचल को बदलने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पीएम का आभार।

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मुख्यमंत्री ने कहा, यह बताते हुए खुशी हो रही है कि 2178 किलोमीटर की कुल लंबाई के 6 कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है, जिसमें से 2,053 किमी अरुणाचल में है। फ्रंटियर हाईवे की लंबाई लगभग 1,859 किलोमीटर है। परियोजना के तहत, नफरा (पश्चिम में तवांग के पास), विजयनगर (पूर्व में भारत-चीन-म्यांमार सीमा के ट्राइजंक्शन पर), फ्रंटियर हाईवे का निर्माण 40,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अब भारत चीन को उपयुक्त जवाब दे पाएगा। ब्यूरो
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भारत-चीन को आपसी बातचीत से सुलझाने चाहिए मतभेद : चीनी दूत
चीन के निवर्तमान राजदूत सन वेइदॉन्ग ने मंगलवार को कहा कि पड़ोसी होने के नाते चीन और भारत के बीच कुछ मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन बातचीत के जरिए लंबित मुद्दों को हल करते हुए विकास के लिए साझा आधार तलाशने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी उनके तीन साल से अधिक के कार्यकाल के अंत में आई, जिसमें भारत और चीन के बीच संबंध 15 जून, 2020 को गलवान घाटी की झड़पों के बाद गंभीर तनाव में आ गए थे।
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सन ने अपनी विदाई टिप्पणी में कहा, चीन और भारत एक-दूसरे के महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं। चीन और भारत के बीच कुछ मतभेद होना स्वाभाविक है। मुख्य बात यह है कि मतभेदों को कैसे संभाला जाए। हमें इस बात से अवगत होना चाहिए कि दोनों देशों के सामान्य हित मतभेदों से अधिक हैं। इस बीच दोनों पक्षों को मतभेदों को प्रबंधित करने और हल करने का प्रयास करना चाहिए।

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