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अरुणाचलः चीनी सीमा पर रहने वालों को सरकार का तोहफा, 55 साल बाद मिलेगा मुआवजा

Wed, 31 May 2017 08:37 PM IST
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला Updated Wed, 31 May 2017 08:37 PM IST
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Arunachal people may get compensation for land acquired during 1962 war with China
Arunachal Pradesh - फोटो : Google Map
केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के चीनी सीमा से लगे लोगों को बड़ा राहत देने का मन बना लिया है। अरुणाचल के लोगों को केंद्र सरकार उन जमीनों के लिए अप्रत्याशित रूप से मुआवजा देने जा रही है, जिनपर 55 साल से सेना अपनी गतिविधियां चलाती आ रही है। स्थानीय लोगों द्वारा ये जमीनें सेना के लिए भारत-चीन युद्ध 1962 के बाद खाली की गई थी, ताकि देश की सीमा सुरक्षित रह सके।
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केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ बड़े अधिकारियों की बैठक में इस बाबत फैसला लिया गया। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अधिकारियों के निर्देश दिए हैं कि वो स्थानीय लोगों द्वारा ली गई जमीनों पर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कराएं। इस पूरी प्रक्रिया पर 3000 करोड़ रुपयों तक का खर्च आ सकता है। इस प्रक्रिया को अधिकारियों द्वारा निश्चित समयसीमा के अंदर पूरा करना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं वो सभी किसानों की सूची और उनके मुआवजे की राशि की जानकारी उपलब्ध कराएं।
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केंद्र सरकार के इस अप्रत्याशित निर्णय से अरुणाचल के उन हजारों परिवारों को फायदा होगा, जिन्होंने भारत-चीन युद्ध 1962 के समय और उसके बाद सेना के इस्तेमाल के लिए अपनी हजारों एकड़ जमीनें दी थी। 
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Arunachal people may get compensation for land acquired during 1962 war with China
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू भी अरुणाचल प्रदेश से आते हैं। उन्होंने कहा कि आप अरुणाचल के लोगों को कट्टर भारतीय देशभक्त कह सकते हैं। उन्होंने अपनी जमीनें सेना को सौंप दी। पर मुआवजा न मिलने की वजह से उन्हें दिक्कतें तो हुई ही। किरेन रिजिजू की मौजूदगी में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि लीज रेट, जमीन के मालिकाना हक, दोहरे मुआवजे और जमीनों के दामों में उतार-चढ़ाव जैसे मुद्दों को जल्द सुलझा लिया जाएगा। पेमा खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश कैबिनेट ने इस मामले पर काम करने के लिए पहले से ही उच्च स्तरीय समिति का गठन कर रखा है। 

गौरतलब है कि चीनी सीमा से लगते अरुणाचल के तवांग, पश्चिमी केमांग, ऊपरी सुबंसिरी, दिबांग घाटी और पश्चिमी सियांग भारत-चीन युद्ध में ज्यादा प्रभावित हुए थे। इन्हीं जिलों की जमीनों का इस्तेमाल सेना अपने लिए कर रही है और सरकार ने सेना द्वारा प्रयोग में लाई जा रही स्थानीय लोगों की जमीनों का मुआवजा देने का ऐलान किया है। इस पूरी प्रक्रिया में सरकार पर लगभग 3000 करोड़ का भार आएगा।
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