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वित्त मंत्री जेटली बोले- उद्योगपतियों के किसी भी कर्ज को माफ नहीं किया

Tue, 28 Nov 2017 09:00 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Tue, 28 Nov 2017 09:00 PM IST
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Arun Jaitley said Did not forgive debt of any Industrialists
अरुण जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को पूंजीपतियों के बैंक लोन को माफ करने की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने बड़े एनपीए डिफॉल्टर का कोई कर्ज माफ नहीं किया है।एक ब्लॉग में जेटली ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में अफवाहें फैलाई गईं कि बैंकों द्वारा बड़े पूंजीपतियों के लोन को माफ किया गया है।

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उन्होंने पूछा कि किसके आदेश से साल 2008 से 2014 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा उन कर्जों को डिस्बर्स किया गया, जो एनपीए में तब्दील हो चुके थे।वित्त मंत्री ने कहा कि लोगों को अफवाह फैलाने वालों से यह पूछने की जरूरत है कि किसके आदेश या दबाव के तहत उन कर्जों को डिस्बर्स किया गया।
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उनसे यह भी पूछा जाना चाहिए कि जब इन देनदारों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अपने कर्ज व ब्याज के भुगतान में विलंब किया, तो तत्कालीन सरकार ने क्या कदम उठाए। जेटली ने कहा कि देनदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बजाय तत्कालीन सरकार ने कर्ज के वर्गीकरण मानदंड को आसान कर दिया, ताकि डिफॉल्टरों को गैर-एनपीए खाता धारक में तब्दील कर दिया जाए। 

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उन्होंने कहा कि साल 2015 में स्वच्छ एवं पूरी तरह से प्रावधानित बैंलेंस-शीट के लिए किए गए एसेट क्वालिटी रिव्यू (एक्यूआर) में बेहद अधिक एनपीए का खुलासा हुआ।वित्त मंत्री ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, लगभग 4,54,466 करोड़ के एनपीए सामने आए। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसी भी बड़े एनपीए डिफॉल्टर का लोन माफ नहीं किया है। 

नए दिवाला एवं दिवालियापन संहिता के तहत 12 सबसे बड़े डिफॉल्टरों से समयबद्ध ढंग से कर्ज की रिकवरी के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में मामला पहुंचाया गया है। 

रोजगारों के सृजन के लिए पुनर्पूंजीकरण 
इन 12 डिफॉल्टरों के पास 1.75 लाख करोड़ का एनपीए है। इन बड़े डिफॉल्टरों की संपत्तियों से बकाया एनपीए की वसूली की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। जेटली ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा कर्ज देने तथा रोजगारों का सृजन करने के लिए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण का बड़ा फैसला किया है। इसके तहत दो वित्त वर्षों में बैंकों को 2.11 लाख करोड़ की राशि दी जाएगी।

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