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1996 समझौते के अनुच्छेद छह का फायदा उठाकर चीन ने की गलवां घाटी में बर्बरता?

Thu, 18 Jun 2020 06:43 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rohit Ojha Updated Thu, 18 Jun 2020 06:43 PM IST
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Article 6 of 1996 Agreement These agreements apply to border management  in tactical military situation
india china - फोटो : social media

साल 1996 में भारत-चीन के बीच अहम समझौता हुआ था जिसमें सीमा पर शांति कायम रखने की बात कही गई थी। चीन के राष्ट्रपति जिआंग जेमिन ने भारत दौरे पर तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के साथ 'एलएसी पर सैन्य क्षेत्र में भरोसा बनाने' के समझौते पर दस्तखत किए थे। लेकिन इसके आर्टिकल 6 ने हिंसा के लिए एक रास्ता खुला छोड़ दिया था।

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90 के दशक में चीन के साथ रिश्ते सुधारने की बुनियाद 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के चीन दौरे से रखी गई। 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव चीन दौर के बाद से दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय समझौते और प्रोटोकॉल को लेकर बात शुरू हुई ताकि सीमा पर शांति बनी रहे।
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1996 में चीन के राष्ट्रपति जिआंग जेमिन जब भारत आए तो एलएसी को लेकर एक और समझौता हुआ। यह समझौता चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगते हुए सैनिक क्षेत्र में विश्वास पैदा करने के उपायों पर हुआ।
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 क्या-क्या है इस समझौते में 

  • सीमा पर दोनों देशों की ओर से गोलीबारी नहीं की जाएगी। वास्तविक नियंत्रण रेखा से दो किलोमीटर के भीतर किसी भी तरह के खतरनाक रसायनिक हथियार, बंदूक, विस्फोट की अनुमति नहीं होगी। इसका पालन दोनों देश करेंगे। यह प्रतिबंध छोटे हथियारों की फायरिंग रेंज में नियमित फायरिंग गतिविधियों के लिए लागू नहीं होगा।
  • अगर वास्तविक नियंत्रण की रेखा के दो किलोमीटर के भीतर ब्लास्ट ऑपरेशन या विकास से जुड़ी गतिविधियों की जरूरत पड़ती है तो दूसरे पक्ष को राजनयिक माध्यमों से या फिर सीमा कर्मियों की बैठक बुलाकार पांच दिन पहले सूचित करना होगा।
  • वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट क्षेत्रों में गोला बारूद के साथ अभ्यास आयोजित करते हुए यह एहतियात सुनिश्चित करना होगा कि अभ्यास के दौरान बुलेट या मिसाइल गलती से दूसरी तरफ न गिरे।  
  • आगर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ जाएं और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर किसी भी कारण से तनाव पैदा होता है, तो दोनों देशों के सैनिक संयम बरतेंगे। स्थिति और न बिगड़े इसके लिए वे सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। तनाव को रोकने और स्थिति की समीक्षा करने के लिए दोनों देश राजनयिक माध्यम से तत्काल परामर्श ले सकते हैं।
लेकिन इस समझौते के आर्टिकल 6 में सबसे महत्वपूर्ण बात छिपी है। इसमें कहा गया है कि सीमा पर रणनीतिक सैन्य स्थिति के दौरान ये लागू नहीं होगा। अगर जवानों की जान को खतरा होता है या पोस्ट की सुरक्षा खतरे में पड़ती है तो वहां मौजूद कमांडर सभी तरह के हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि 1996 समझौते के आर्टिकल 6 का फायदा उठाकर चीन ने गलवां घाटी में बर्बरता की। 
 
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