जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद अगस्त 2019 से जम्मू और कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंधों और इंटरनेट बंद को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अपना फैसला सुनाएगा। जम्मू-कश्मीर से बीते साल पांच अगस्त को आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद सूबे में कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगाई गई। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद समेत कई याचियों ने सुप्रीम कोर्ट में इन पाबंदियों को चुनौती दी है। जिसपर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा।
Supreme Court will pronounce its verdict tomorrow on a number of petitions challenging the restrictions and internet blockade imposed in Jammu and Kashmir after the abrogation of Article 370 since August 2019. pic.twitter.com/y3uSNOdFmX
— ANI (@ANI) January 9, 2020विज्ञापन
बता दें कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने कश्मीर में तथाकथित पाबंदी लगाने, पत्रकारों की आवाजाही पर रोक और घाटी में बच्चों को नजरबंद रखे जाने सभी याचिकाओं को सुनने के लिए जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली पांच जजों की पीठ के पास मामले को भेज दिया था।
इस संविधान पीठ में जस्टिस एसके कौल, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल थे। इन याचिकाओं में बाल अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली इनाक्षी गांगुली, मोहम्मद तारिगामी, सीताराम येचुरी, गुलाम नबी आजाद, अनुराधा भसीन सहित अन्य की याचिकाएं हैं।
अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ नेशनल कॉन्फ्रेंस, सज्जाद लोन के नेतृत्व वाला जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और वकील एमएल शर्मा समेत कई लोगों ने याचिकाएं दी हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से लोकसभा सांसद मोहम्मद अकबर लोन और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस हसनैन मसूदी ने दी है। इसके अलावा, कई पूर्व नौकरशाहों और सेना के पूर्व अफसरों ने भी याचिकाएं दी हैं। इनके अलावा, नौकरशाह से नेता बने शाह फैसल और जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला राशिद ने भी याचिकाएं दी हैं।
जस्टिस गोगोई की पीठ ने जम्मू-कश्मीर के सभी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में हाई स्पीड इंटरनेट और लैंडलाइन फोन सेवाओं की फौरन बहाली को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। पीठ ने इस याचिका को भी कश्मीर से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ ही संविधान पीठ के पास भेज दिया था।
27 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था
सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद संचार और अन्य प्रतिबंधों को लेकर कश्मीर टाइम्स के संपादक अनुराधा भसीन और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
कपील सिब्बल ने इस मामले पर बोलते हुए कहा था कि तकनीक का बेजा इस्तेमाल होता है। मेरी भी तस्वीर से छेड़छाड़ की जाती है। इसका यह मतलब नहीं है कि माध्यम पर ही पाबंदी लगा दी जाए। हम तकनीक के युग में है। यह नाभिकीय ऊर्जा की तरह है। इससे हिरोशिमा भी होता है और बिजली भी बनती है। उन्होंने कहा था कि धारा-144 लगाने के तमाम आदेश अदालत के समक्ष पेश किए जाना चाहिए।