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Arogya Mandir: आरोग्य मंदिर बनेंगे बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की नई डिजाइन, दुनिया को दिखाएंगे राह

Wed, 18 Jun 2025 05:30 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 18 Jun 2025 05:30 PM IST
सार

रेखा गुप्ता सरकार ने मंगलवार को राजधानी में 33 आरोग्य मंदिरों की शुरुआत कर दी। इन आरोग्य मंदिरों में लोग हल्की-फुल्की बीमारी होने पर मुफ्त डॉक्टरी सलाह और दवाइयां ले सकेंगे। ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के होने पर मुफ्त जांच करा सकेंगे।

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Arogya Mandir will become the new design of better health system, will show the way to the world
सीएम रेखा गुप्ता - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली में आरोग्य मंदिरों की शुरुआत हो गई है। रेखा गुप्ता सरकार ने मंगलवार को राजधानी में 33 आरोग्य मंदिरों की शुरुआत कर दी। इन आरोग्य मंदिरों में लोग हल्की-फुल्की बीमारी होने पर मुफ्त डॉक्टरी सलाह और दवाइयां ले सकेंगे। ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के होने पर मुफ्त जांच करा सकेंगे। सरकार ने लीवर-किडनी से जुड़ी कुछ जांचें भी मुफ्त की हैं। इससे लोग समय रहते अपनी जांच कराकर इन गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से पहले सावधान हो सकेंगे। यदि बीमारी हो भी गई तो समय रहते इलाज शुरू कर उसकी गंभीरता कम करने में मदद मिलेगी। इस दृष्टि से देखा जाए तो आरोग्य मंदिर दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। यदि दिल्ली सरकार का यह मॉडल सफल रहा तो इससे देश के दूसरे राज्य और दुनिया के अन्य देश भी बहुत कुछ सीख सकेंगे। 
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दरअसल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी छोटी-छोटी बीमारियों के कारण ही होती है। लोगों को आए दिन सर्दी-खांसी, बुखार, मलेरिया, एलर्जी और सिर-पेट में दर्द जैसी छोटी-छोटी समस्याएं होती हैं। कभी आंखों की समस्या तो कभी कान-दांत का दर्द लोगों को परेशान करता है। आसपास बेहतर डॉक्टर या अस्पताल न होने पर उन्हें इन छोटी बीमारियों के लिए भी बड़े अस्पतालों में जाना पड़ता है, या महंगे डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। 
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समय नष्ट होने से बचाव
बड़े अस्पतालों में जाने से लोगों का बहुत समय नष्ट होता है। कई बार उन्हें पूरे-पूरे दिन अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। राजधानी के एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया जैसे अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या काफी अधिक होती है। लंबी बारी के इंतजार के कारण लोगों का पूरे दिन का समय नष्ट होता है। श्रमिकों या गरीब वर्ग के लोगों के लिए एक दिन की दिहाड़ी नष्ट होना काफी महंगा पड़ता है। यदि लोगों को उनके घर के आसपास ही उचित इलाज मिल जाए तो समय नष्ट नहीं होगा और उनकी दिहाड़ी भी नहीं मा्री जाएगी। वहीं, ऐसे मरीजों का भार न होने पर बड़े अस्पताल ज्यादा गंभीर मरीजों की देखभाल में ज्यादा समय दे सकेंगे।
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गरीब वर्ग के पैसे की बचत
दिल्ली जैसे शहरों में एक बड़ा तबका निम्न आय वर्ग का होता है। कम सफाईवाले इलाकों में रहने और पानी की साफ व्यवस्था न होने के कारण ये लोग सामान्य बुखार, मलेरिया, डायरिया जैसी बीमारियों के सबसे ज्यादा शिकार भी होते हैं। इनके लिए छोटी बीमारी का इलाज भी बड़ी परेशानी का कारण बनता है। यदि उन्हें यह इलाज मुफ्त और उनके घरों के आसपास ही मिल जाए तो इससे उनके पैसों की बचत होगी और वे अपने बच्चों की शिक्षा और रहन-सहन के सुधार पर ज्यादा खर्च कर सकेंगे। 

महिलाओं के लिए विशेष लाभदायक
ये आरोग्य मंदिर महिलाओं-बच्चों के लिए सबसे ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं। महिलाओं की समस्याएं पुरुषों से अलग और ज्यादा आवृत्ति की होती हैं। समय-समय पर उन्हें उचित चिकित्सकीय सलाह की आवश्यकता होती है। बच्चों को टीके लगाने के लिए भी महिलाओं को कई बार पूरा-पूरा दिन बर्बाद करना पड़ता है। यदि यह सुविधा लोगों के घरों के आसपास मिल सके तो इससे महिला श्रम दिवस बचाने में मदद मिलेगी। 

टीकाकरण से नहीं छूटेंगे बच्चे
दूरी और समय की परेशानी के कारण कई बार महिलाएं बच्चों को टीके लगवाने से चूक जाती हैं। बाद में इसका नुकसान बच्चे को उठाना पड़ता है और वे गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। लेकिन यदि लोगों के घरों के आसपास आरोग्य मंदिर जैसी सुविधा हो तो बच्चों के टीकाकरण छूटने की समस्या से बचा जा सकता है। यही बच्चे कल को देश के नागरिक और कार्यशील बल बनेंगे। यानी देश के लिए स्वस्थ नागरिक तैयार करने में आरोग्य मंदिर जैसी पहल एक बेहतर और सुरक्षित निवेश भी कहा जा सकता है।

आपातकालीन बीमारियों को संभालने में मददगार होगी व्यवस्था
आरोग्य मंदिर किसी आपात स्थिति में लोगों को उनके घरों के आसपास ही वैक्सीन लगाने के लिए उपयोग में लाए जा सकते हैं। कोरोना जैसी महामारियों के दौरान यही पाया गया था कि बड़े अस्पतालों की बजाय लोगों के घरों के आसपास बने सेंटर ज्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं। संक्रामक बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए बड़े अस्पतालों की तुलना में आरोग्य मंदिर ज्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं।

मोहल्ला क्लीनिकों की असफलता से क्या सीखेगी सरकार?
इसके पहले दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने भी इसी तर्ज पर मोहल्ला क्लीनिकों की शुरुआत की थी। शुरुआत में इस योजना को भी एक बेहतर  पहल माना गया था। लेकिन शीघ्र ही इन मोहल्ला क्लीनिकों में बड़े स्तर का भ्रष्टाचार सामने आया। एक ही मोबाइल नंबर पर हजारों मरीजों का रजिस्ट्रेशन करने के दस्तावेज सामने आ चुके हैं। ये यह बताने के लिए पर्याप्त थे कि मोहल्ला क्लीनिकों में इलाज को भी भ्रष्टाचार का माध्यम बना लिया गया था। इस योजना में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ। लोगों के टेस्ट के नाम पर भारी पैसा निजी लैब को दिए जाने के भी आरोप हैं। 

अनेक जगहों पर मोहल्ला क्लीनिकों में आवारा पशुओं के रहने, दवाएं न होने, डॉक्टरों के न होने, कार्यरत डॉक्टरों-सहायकों के वेतन न मिलने की भी शिकायतें आई थीं। इन आरोपों की जांच चल रही है। रेखा गुप्ता सरकार को इन गलतियों से सबक सीखते हुए आरोग्य मंदिरों को एक बेहतर व्यवस्था बना सकेगी तो यह उसकी बड़ी सफलता माना जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो ये आरोग्य मंदिर दुनिया को बेहतर स्वास्थ्य देने के मामले में नई राह दिखा सकते हैं।    

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
मैक्स अस्पताल की स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर ममता त्यागी ने अमर उजाला से कहा कि आरोग्य मंदिर योजना गरीबों को बेहतर  स्वास्थ्य सुविधा देने के मामले में मील का पत्थर सिद्ध होगी। इससे न केवल गरीब वर्ग को मुफ्त इलाज मिलेगा, बल्कि उनके लिए बड़ी आर्थिक बचत भी होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रोग्राम केंद्र सरकार के आयुष्मान योजना को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है। इसके अगले चरण में आरोग्य मंदिरों में बेड्स की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बड़े अस्पतालों में बेड्स की मारामारी को कम करने में मदद मिलेगी। 

डॉक्टर ममता त्यागी ने कहा कि लोगों के घरों के आसपास होने के कारण यह हर वर्ग के लिए सर्वसुलभ होगी। यह लोगों को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की तरफ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। आरोग्य मंदिरों में योग और अन्य उपयोगी स्वास्थ्य प्रशिक्षण भी मिलेंगे। इससे लोगों को बड़ी बीमारियों के होने से फिर ही  बचने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार का लक्ष्य समाज के हर वर्ग के लिए सर्वसुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है। लेकिन यह काम केवल बड़े अस्पतालों के माध्यम से नहीं हो सकता। इसके लिए आरोग्य मंदिर सबसे बेहतर अनुभव साबित होंगे जो अधिकतम लोगों को उनके घरों के करीब ही प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा सकेंगे। 
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