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लद्दाख पहुंचे सेना प्रमुख एमएम नरवणे, घायल जवानों से अस्पताल में की मुलाकात
Tue, 23 Jun 2020 03:36 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 23 Jun 2020 03:36 PM IST
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घायल जवानों से मुलाकात करते सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे
- फोटो : अमर उजाला
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चीन के साथ तनाव के बीच मंगलवार को सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे लद्दाख पहुंचे। वह सबसे पहले लेह स्थित सैनिक अस्पताल पहुंचे जहां घायल जवानों का इलाज चल रहा है। उनका यह दौरा दो दिन का है।
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दिल्ली में सैन्य कमांडरों के कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के बाद वह लेह के लिए रवाना हुए थे। वह लद्दाख में उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी के साथ जमीन और परिचालन संबंधी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा सेना प्रमुख ग्राउंड कमांडरों के साथ गतिरोध पर चर्चा करेंगे और फॉरवर्ड स्थानों का भी दौरा करेंगे।
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Delhi: Army Chief General Manoj Mukund Naravane leaves for Ladakh. He will review the on-ground situation with the 14 Corps officials and the progress in talks with the Chinese military. pic.twitter.com/yIyLflkOJ9
— ANI (@ANI) June 23, 2020
गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद सेना प्रमुख पहली बार लद्दाख पहुंचे हैं। इससे पहले वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने रविवार को लद्दाख का दौरा किया था। बता दें कि लद्दाख में हुई हिंसा में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे।
सोमवार को हुई सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता
सोमवार को मोल्डो में दोनों पक्षों के बीच 11 घंटे तक सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। भारत ने अडिग रहते हुए दो टूक कहा था कि गलवां, पेंगोंग त्सो और हॉट स्प्रिंग पर जब तक दो मई से पहले वाली स्थिति बहाल नहीं हो जाती पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हालात नाजुक बने रहेंगे।
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झड़प से पहले छह जून को हुई थी बातचीत
इससे पहले छह जून को दोनों पक्षों के बीच हुई सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोनों पक्ष स्थिति को सुलझाने और सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक जुड़ाव जारी रखेंगे। मंत्रालय ने कहा था कि दोनों पक्ष विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में हुए विवाद को शांतिपूर्वक हल करने के लिए सहमत हुए और नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता समग्र विकास के लिए आवश्यक है।