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Hindi News ›   India News ›   Army chief General Bipin Rawat: our job is to separate and target terrorists from Kashmiri people

सेना का काम कश्मीरियों को आतंकियों से बचाना हैः सेना प्रमुख

Sat, 13 May 2017 09:35 AM IST
amarujala.com- Presented by: जया पाण्डेय
amarujala.com- Presented by: जया पाण्डेय Updated Sat, 13 May 2017 09:35 AM IST
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Army chief General Bipin Rawat: our job is to separate and target terrorists from Kashmiri people
सेनाप्रमुख जनरल बिपिन रावत - फोटो : Getty Images

सभी कश्मीरी आतंकवाद में शामिल नहीं हैं इस बात पर जोर देते हुए सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि हमारा काम कश्मीरी लोगों से आतंकवादियों को अलग करना है और फिर आतंकवादियों को निशाना बनाना है। 

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कश्मीर में सेना के प्रति ये धारणा है कि सेना सभी कश्मीरियों के खिलाफ है और सभी कश्मीरियों पर आतंकवादियों की तरह ही कार्रवाई करती है। 
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस बाबत जनरल रावत ने कहा कि हम समझते हैं कि सभी कश्मीरी तथाकथित आतंकवाद में शामिल नहीं हैं। कुछ ही हैं जो आतंक और हिंसा में लिप्त हैं। हमारा काम कश्मीरी लोगों से आतंकवादियों को अलग करना और आतंकवादियों को निशाना बनाना है। 
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उन्होंने इस दावे से भी इंकार किया कि सेना घाटी में आतंकवाद विरोधी रणनीति  कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन(सीएएसओ) के तहत लौटी। पिछले गुरूवार को शोपियां के 15 गांवों में सीएएसओ अभियान के बाद इस आशय से रिपोर्टें थीं। इस अभियान में करीब चार हजार राष्ट्रीय राइफल के जवान शामिल थे। 

उन्होंने कहा कि कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन के तहत कश्मीर में नहीं लौटे थे क्योंकि हमें पता था कि इससे स्थानीय लोगों को कठिनाई होगी। ये केवल सर्च ऑपरेशन क्षेत्र हैं। जनरल रावत ने कहा सेना ने लगभग 15 साल पहले सीएएसओ को बंद कर दिया था क्योंकि इस ऑपरेशन के कम ही परिणाम मिलते हैं। इसके अलावा इस तरह की कार्रवाई से स्थानीय लोगों को भी काफी दिक्कतें होती हैं। 


सूत्रों ने बताया सीएएसओ के विपरीत गांव के लोगों को इकट्ठा करके गांव के बीच में लाया जाएगा। इसके बाद गांव के कुछ घरों में खोज की जाएगी। ऐसे सर्च ऑपरेशन का उद्देश्य आतंकवादियों पर दबाव डालना होगा। इससे आतंकियों को गांव से बाहर करने में मदद मिलेगी। 

सेना के अनुमान के अनुसार, दक्षिण कश्मीर में लगभग 100 सक्रिय आतंकवादी हैं, जिनमें करीब 80 स्थानीय लोग शामिल हैं जो पिछले दो सालों में आतंकवाद में शामिल हो गए हैं। बता दें इस क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति के कारण अनंतनाग में लोकसभा उपचुनाव स्थगित कर दिया गया था। 

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