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Supreme Court: मध्यस्थता और सुलह अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन पर सरकार कर रही परामर्श, नवंबर तक टली सुनवाई
Wed, 13 Sep 2023 03:56 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 13 Sep 2023 03:56 PM IST
सार
मामले पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा, जस्टिस ऋषिकेश रॉय, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस पंकज मितल और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मध्यस्थता और सुलह कानून, 1996 में प्रस्तावित संशोधन के लिए परामर्श प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थतों की नियुक्ति से जुड़े मामले पर सुनवाई टाल दी है। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमाणी कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए और कोर्ट को बताया कि देश में मध्यस्थता कानून के मुद्दे पर गठित की गई विशेषज्ञ समिति का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। ऐसे में अब समिति की रिपोर्ट नवंबर की शुरुआत तक मिल सकती है।
अब नवंबर में होगी सुनवाई
इस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई टाल दी। अब सुप्रीम कोर्ट नवंबर में इस मामले पर सुनवाई करेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट इस कानूनी सवाल पर सुनवाई कर रहा है कि क्या मध्यस्थता के लिए अयोग्य व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को मध्यस्थ नामित कर सकता है या नहीं। इस मामले पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा, जस्टिस ऋषिकेश रॉय, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस पंकज मितल और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं।
क्या है मामला
प्रीम कोर्ट ने साल 2017 में अपनी एक टिप्पणी में कहा था कि कोई व्यक्ति मध्यस्थ बनने के लिए अयोग्य है तो वह किसी अन्य व्यक्ति को मध्यस्थ नामित नहीं कर सकता। हालांकि साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए अयोग्य व्यक्ति द्वारा नामित व्यक्ति को मध्यस्थ बनने की इजाजत दे दी थी। इस मामले पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश ने बीती 26 जून को पांच जजों की संविधान पीठ का गठन किया था।
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अदालतों पर बोझ होगा कम
देश को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के मामले में प्रमुख केंद्र बनाने के मकसद से सरकार ने विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व कानून सचिव टीके विश्वनाथन कर रहे हैं। इस समिति ने मध्यस्थता और सुलह कानून में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिससे अदालतों के बोझ को कम किया जा सके। केन्द्रीय कानून मंत्रालय ने भी एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इसमें भी टीके विश्वनाथन को शामिल किया गया है।
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अब नवंबर में होगी सुनवाई
इस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई टाल दी। अब सुप्रीम कोर्ट नवंबर में इस मामले पर सुनवाई करेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट इस कानूनी सवाल पर सुनवाई कर रहा है कि क्या मध्यस्थता के लिए अयोग्य व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को मध्यस्थ नामित कर सकता है या नहीं। इस मामले पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा, जस्टिस ऋषिकेश रॉय, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस पंकज मितल और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं।
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क्या है मामला
प्रीम कोर्ट ने साल 2017 में अपनी एक टिप्पणी में कहा था कि कोई व्यक्ति मध्यस्थ बनने के लिए अयोग्य है तो वह किसी अन्य व्यक्ति को मध्यस्थ नामित नहीं कर सकता। हालांकि साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए अयोग्य व्यक्ति द्वारा नामित व्यक्ति को मध्यस्थ बनने की इजाजत दे दी थी। इस मामले पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश ने बीती 26 जून को पांच जजों की संविधान पीठ का गठन किया था।
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अदालतों पर बोझ होगा कम
देश को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के मामले में प्रमुख केंद्र बनाने के मकसद से सरकार ने विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व कानून सचिव टीके विश्वनाथन कर रहे हैं। इस समिति ने मध्यस्थता और सुलह कानून में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिससे अदालतों के बोझ को कम किया जा सके। केन्द्रीय कानून मंत्रालय ने भी एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इसमें भी टीके विश्वनाथन को शामिल किया गया है।