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आरा जंक्शन डिरेलमेंट: रेलवे की चेतावनी के बावजूद अधूरी जानकारी के साथ तैनात था लोको पायलट, चार सस्पेंड
Fri, 02 Oct 2026 05:16 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Fri, 02 Oct 2026 05:16 PM IST
सार
आरा में सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस डिरेलमेंट मामले में नई जानकारी सामने आई है। रिकॉर्ड के अनुसार, लोको पायलट को रूट की पूरी जानकारी नहीं थी। नियमों की अनदेखी और हेरफेर के आरोप में 4 रेल कर्मियों को सस्पेंड किया गया है।
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आरा जंक्शन डिरेलमेंट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
दिल्ली जाने वाली सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस सात सितंबर को बिहार के आरा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर पटरी से उतर गई थी। इस मामले में नई जानकारी सामने आई है। रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार, लोको पायलट को इस रूट की पूरी जानकारी नहीं थी। घटना के तुरंत बाद प्रारंभिक जांच कराई गई। इसमें लोको पायलट और सहायक लोको पायलट को पहले लाल सिग्नल पार करने और फिर ट्रेन को वापस उसी स्थिति में लाने के लिए जिम्मेदार पाया गया। इसी दौरान ट्रेन पटरी से उतर गई थी। यह क्रू प्रयागराज डिवीजन से जुड़ा हुआ था। जांच के बाद लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट के साथ-साथ डिप्टी क्रू कंट्रोलर और चीफ लोको इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है।
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रेलवे बोर्ड की क्या थी चेतावनी?
रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार, उचित रूट लर्निंग के बिना चालक दल की तैनाती ने न केवल रेलवे नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि यह हादसे से करीब दो सप्ताह पहले रेलवे बोर्ड की ओर से जारी कड़ी चेतावनी के भी खिलाफ था। बोर्ड ने कहा था कि इस उल्लंघन के लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। बोर्ड की यह चेतावनी आसनसोल डिवीजन में एक लोको पायलट द्वारा लाल सिग्नल पार किए जाने के बाद आई थी। इस लोको पायलट को रूट लर्निंग पूरी किए बिना ट्रेन पर तैनात किया गया था। रेलवे बोर्ड ने 24 अगस्त, 2026 को सभी रेलवे जोन को लिखित रूप में कहा था कि उचित रूट लर्निंग के साथ चालक दल की बुकिंग महत्वपूर्ण है। इस उल्लंघन के लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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क्या है नियम?
देशभर के सभी जोन और डिवीजनों को बोर्ड के पत्र के बावजूद, प्रयागराज डिवीजन ने न केवल लोको पायलट की बुकिंग की, बल्कि कथित तौर पर क्रू मैनेजमेंट सिस्टम में मैन्युअल रूप से हेरफेर भी किया। इस सिस्टम में ऐसी तैनाती को रोकने के लिए पहले से एक व्यवस्था मौजूद है। रिकॉर्ड के अनुसार, लोको पायलट ने आखिरी बार 16 दिसंबर, 2025 को प्रयागराज-पटना रूट पर ट्रेन चलाई थी, जिसके बाद उसे दूसरे रूटों पर तैनात किया गया। रेलवे के नियमों के अनुसार, अगर कोई लोको पायलट छह महीने से दो साल की अवधि के बीच किसी खास रूट पर ट्रेन नहीं चलाता है, तो उसे दो रूट-लर्निंग यात्राएं कराई जानी चाहिए। रिकॉर्ड के अनुसार, सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस के लोको पायलट ने 1 जुलाई, 2026 को इस रूट पर एक रूट-लर्निंग यात्रा की थी। इस दौरान उसके साथ उस रूट पर नियमित रूप से ट्रेन चलाने वाला एक अन्य लोको पायलट भी था।
रिकॉर्ड के मुताबिक, 14 जुलाई, 2026 से उसे इस रूट पर नियमित लोको पायलट के रूप में तैनात कर दिया गया, जबकि उसे एक और रूट-लर्निंग यात्रा पूरी करनी जरूरी थी। एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि रूट में हर छोटी से छोटी जानकारी शामिल होती है, जैसे मोड़, ढलान, सिग्नल की दूरी, अलग-अलग प्रकार के सिग्नल और अन्य चीजें। इसलिए अधूरी रूट लर्निंग का परिणाम खतरनाक हो सकता है और इसी वजह से बोर्ड ने इसे अनिवार्य प्रावधान बनाया है।
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अधिकारियों ने क्या कहा?
हालांकि, प्रयागराज डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन को कम करके दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि लोको पायलट ने 14 जुलाई से 6 सितंबर के बीच इस रूट पर साढ़े पांच यात्राएं पहले ही पूरी कर ली थीं। प्रयागराज डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सात सितंबर को यात्रा से लौटते समय उसने लाल सिग्नल को पार कर दिया और ट्रेन को उसकी मूल स्थिति में वापस लाने की कोशिश के दौरान ट्रेन पटरी से उतर गई। इसका रूट-लर्निंग अभ्यास से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि चूंकि घटना ईस्ट सेंट्रल रेलवे जोन के अंतर्गत हुई, इसलिए मामले की जांच करके उचित कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, सुरक्षा अधिकारियों ने इसे गंभीर अपराध बताया और कहा, 'भले ही अपर्याप्त रूट लर्निंग का पटरी से उतरने की घटना से सीधा संबंध न हो, फिर भी यह नियमों का उल्लंघन है, जो जांच के दौरान सामने आया है और इसे बेहद गंभीरता से देखा जाना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि रेलवे प्रशासन को न केवल लोको पायलट के खिलाफ बल्कि उन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्होंने उसे इस रूट पर तैनात किया। उन्होंने यात्रियों की जान जोखिम में डाली।
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रेलवे बोर्ड की क्या थी चेतावनी?
रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार, उचित रूट लर्निंग के बिना चालक दल की तैनाती ने न केवल रेलवे नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि यह हादसे से करीब दो सप्ताह पहले रेलवे बोर्ड की ओर से जारी कड़ी चेतावनी के भी खिलाफ था। बोर्ड ने कहा था कि इस उल्लंघन के लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। बोर्ड की यह चेतावनी आसनसोल डिवीजन में एक लोको पायलट द्वारा लाल सिग्नल पार किए जाने के बाद आई थी। इस लोको पायलट को रूट लर्निंग पूरी किए बिना ट्रेन पर तैनात किया गया था। रेलवे बोर्ड ने 24 अगस्त, 2026 को सभी रेलवे जोन को लिखित रूप में कहा था कि उचित रूट लर्निंग के साथ चालक दल की बुकिंग महत्वपूर्ण है। इस उल्लंघन के लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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क्या है नियम?
देशभर के सभी जोन और डिवीजनों को बोर्ड के पत्र के बावजूद, प्रयागराज डिवीजन ने न केवल लोको पायलट की बुकिंग की, बल्कि कथित तौर पर क्रू मैनेजमेंट सिस्टम में मैन्युअल रूप से हेरफेर भी किया। इस सिस्टम में ऐसी तैनाती को रोकने के लिए पहले से एक व्यवस्था मौजूद है। रिकॉर्ड के अनुसार, लोको पायलट ने आखिरी बार 16 दिसंबर, 2025 को प्रयागराज-पटना रूट पर ट्रेन चलाई थी, जिसके बाद उसे दूसरे रूटों पर तैनात किया गया। रेलवे के नियमों के अनुसार, अगर कोई लोको पायलट छह महीने से दो साल की अवधि के बीच किसी खास रूट पर ट्रेन नहीं चलाता है, तो उसे दो रूट-लर्निंग यात्राएं कराई जानी चाहिए। रिकॉर्ड के अनुसार, सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस के लोको पायलट ने 1 जुलाई, 2026 को इस रूट पर एक रूट-लर्निंग यात्रा की थी। इस दौरान उसके साथ उस रूट पर नियमित रूप से ट्रेन चलाने वाला एक अन्य लोको पायलट भी था।
रिकॉर्ड के मुताबिक, 14 जुलाई, 2026 से उसे इस रूट पर नियमित लोको पायलट के रूप में तैनात कर दिया गया, जबकि उसे एक और रूट-लर्निंग यात्रा पूरी करनी जरूरी थी। एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि रूट में हर छोटी से छोटी जानकारी शामिल होती है, जैसे मोड़, ढलान, सिग्नल की दूरी, अलग-अलग प्रकार के सिग्नल और अन्य चीजें। इसलिए अधूरी रूट लर्निंग का परिणाम खतरनाक हो सकता है और इसी वजह से बोर्ड ने इसे अनिवार्य प्रावधान बनाया है।
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अधिकारियों ने क्या कहा?
हालांकि, प्रयागराज डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन को कम करके दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि लोको पायलट ने 14 जुलाई से 6 सितंबर के बीच इस रूट पर साढ़े पांच यात्राएं पहले ही पूरी कर ली थीं। प्रयागराज डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सात सितंबर को यात्रा से लौटते समय उसने लाल सिग्नल को पार कर दिया और ट्रेन को उसकी मूल स्थिति में वापस लाने की कोशिश के दौरान ट्रेन पटरी से उतर गई। इसका रूट-लर्निंग अभ्यास से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि चूंकि घटना ईस्ट सेंट्रल रेलवे जोन के अंतर्गत हुई, इसलिए मामले की जांच करके उचित कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, सुरक्षा अधिकारियों ने इसे गंभीर अपराध बताया और कहा, 'भले ही अपर्याप्त रूट लर्निंग का पटरी से उतरने की घटना से सीधा संबंध न हो, फिर भी यह नियमों का उल्लंघन है, जो जांच के दौरान सामने आया है और इसे बेहद गंभीरता से देखा जाना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि रेलवे प्रशासन को न केवल लोको पायलट के खिलाफ बल्कि उन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्होंने उसे इस रूट पर तैनात किया। उन्होंने यात्रियों की जान जोखिम में डाली।