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अंत्योदय ही सरकार का लक्ष्य और संकल्प: मोदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Wed, 24 Aug 2016 12:22 AM IST
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राज्यों के कोरग्रुप की कार्यशाला में बोले मोदी
- फोटो : ANI
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय और महात्मा गांधी के अंत्योदय के सपने को ही अपनी सरकार का लक्ष्य और संकल्प बताया है। राज्यों के कोरग्रुप के सदस्यों की कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की गरीब केंद्रित योजनाएं गिनाई और संगठन से देश भर में इसके प्रचार प्रसार में जुट जाने का निर्देश दिया। कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संगठन को मजबूत बनाने के साथ-साथ इसके भौगोलिक और सामाजिक विस्तार पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने कश्मीर, दलित उत्पीड़न, गौरक्षा जैसे मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखा।
शाह ने पार्टीशासित राज्यों में केंद्रीय योजनाओं को जहां युद्घस्तर पर लागू करने का निर्देश दिया, वहीं विपक्षशासित राज्यों में योजनाओं की कड़ी निगरानी का भी निर्देश दिया। कार्यशाला में चुनावी राज्यों, विस्तार की संभावना वाले राज्यों और पार्टीशासित राज्यों के कोरग्रुप सदस्यों की अलग-अलग बैठक भी हुई।
कार्यशाला में अपने समापन भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के अपने दम पर सत्ता हासिल करने और विभिन्न राज्यों में पार्टी को मिली सफलता को राजनीति के क्षेत्र में अंत्योदय करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा और सरकार में अभी जो भी चेहरे हैं वे बेहद साधारण पृष्ठभूमि के हैं। पीएम ने कहा कि सत्ता में आते ही सरकार ने सबका साथ सबका विकास की रणनीति अपनाई। खासतौर पर महात्मा गांधी और दीनदयाल के अंत्योदय के सपने को हकीकत में बदलने के लिए कई गरीब केंद्रित योजनाएं शुरू की। उन्होंने इस शताब्दी को समर्पण की शताब्दी बनाने पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय योजनाओं के व्यापक प्रचार प्रसार की रणनीति अपनाने पर भी बल दिया।
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शाह ने पार्टीशासित राज्यों में केंद्रीय योजनाओं को जहां युद्घस्तर पर लागू करने का निर्देश दिया, वहीं विपक्षशासित राज्यों में योजनाओं की कड़ी निगरानी का भी निर्देश दिया। कार्यशाला में चुनावी राज्यों, विस्तार की संभावना वाले राज्यों और पार्टीशासित राज्यों के कोरग्रुप सदस्यों की अलग-अलग बैठक भी हुई।
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कार्यशाला में अपने समापन भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के अपने दम पर सत्ता हासिल करने और विभिन्न राज्यों में पार्टी को मिली सफलता को राजनीति के क्षेत्र में अंत्योदय करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा और सरकार में अभी जो भी चेहरे हैं वे बेहद साधारण पृष्ठभूमि के हैं। पीएम ने कहा कि सत्ता में आते ही सरकार ने सबका साथ सबका विकास की रणनीति अपनाई। खासतौर पर महात्मा गांधी और दीनदयाल के अंत्योदय के सपने को हकीकत में बदलने के लिए कई गरीब केंद्रित योजनाएं शुरू की। उन्होंने इस शताब्दी को समर्पण की शताब्दी बनाने पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय योजनाओं के व्यापक प्रचार प्रसार की रणनीति अपनाने पर भी बल दिया।
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चुनावी राज्यों की अलग से बैठक
उद्घाटन सत्र में शाह ने संगठन की मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूती तब आएगी जब संगठन का भौगोलिक ही नहीं सामाजिक विस्तार भी हो। शाह ने इस दौरान गौरक्षा, दलित उत्पीड़न मामले में विपक्ष के कथित दुष्प्रचार का डट कर मुकाबला करने का आह्वान किया। कश्मीर पर सरकार के द्वारा लिए गए स्टैंड की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह केंद्र की पहली सरकार है जिसने राष्ट्रवाद के मामले में कहीं भी रत्ती भर समझौता नहीं किया।
कार्यशाला में चुनावी राज्यों, पार्टीशासित राज्यों और विस्तार की संभावना वाले राज्यों के अलग-अलग ग्रुप बना कर अलग-अलग चर्चा की गई। चुनावी राज्यों में वर्तमान मुद्दों, चुनावी तैयारियों पर चर्चा हुई, जबकि विस्तार की संभावना वाले राज्यों में संगठन के कामकाज की समीक्षा की गई। इस क्रम में पार्टीशासित राज्यों में केंद्रीय योजनाओं की स्थिति, संगठन और सरकार के बीच तालमेल जैसे मुद्दे पर चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के संदर्भ में सबसे अधिक दलित उत्पीड़न संबंधी विवाद से निपटने पर चर्चा हुई। इस दौरान कोरग्रुप के सदस्यों को जवाबी हमला बोलने के लिए तथ्यों से लैस किया गया। सदस्यों को दलित मुद्दे पर बेहद सावधानी से अपनी बात रखने और विवादास्पद बयानबाजी से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई।
कार्यशाला में चुनावी राज्यों, पार्टीशासित राज्यों और विस्तार की संभावना वाले राज्यों के अलग-अलग ग्रुप बना कर अलग-अलग चर्चा की गई। चुनावी राज्यों में वर्तमान मुद्दों, चुनावी तैयारियों पर चर्चा हुई, जबकि विस्तार की संभावना वाले राज्यों में संगठन के कामकाज की समीक्षा की गई। इस क्रम में पार्टीशासित राज्यों में केंद्रीय योजनाओं की स्थिति, संगठन और सरकार के बीच तालमेल जैसे मुद्दे पर चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के संदर्भ में सबसे अधिक दलित उत्पीड़न संबंधी विवाद से निपटने पर चर्चा हुई। इस दौरान कोरग्रुप के सदस्यों को जवाबी हमला बोलने के लिए तथ्यों से लैस किया गया। सदस्यों को दलित मुद्दे पर बेहद सावधानी से अपनी बात रखने और विवादास्पद बयानबाजी से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई।