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एंटीलिया मामला: मनसुख की संदिग्ध मौत और वाजे की गिरफ्तारी, लेकिन अब भी कई अनसुलझे सवाल

Tue, 16 Mar 2021 06:59 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 16 Mar 2021 06:59 AM IST
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Antilia case:- Mansukh Hiren suspicious death and Sachin Waje's arrest, more questions are to be answered
Antilia Case: Sachin Vaje and Mansukh Hiren

एंटीलिया मामले में मुंबई पुलिस के सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद मामला लगातार उलझता जा रहा है। जांच अब एनआईए के हाथ में है लेकिन अनगिनत सवाल बने हुए हैं। मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत के बाद एक के बाद एक कई खुलासे हो रहे हैं। वाजे से पूछताछ में भी कई और खुलासे होने की उम्मीद है। इस मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अभी मिलने बाकी हैं। 

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एंटीलिया के बाहर गाड़ी क्यों खड़ी थी 
25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर एक लावारिस वाहन से जिलेटिन की 20 छड़ें बरामद की गई थीं। इसके बाद से ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया था। इस गाड़ी की जानकारी मिलते ही मुंबई पुलिस का बम निरोधक दस्ता एंटीलिया के बाहर पहुंच गया था। 
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स्कॉर्पियो गाड़ी काफी देर तक अंबानी के घर के परिसर के बाहर खड़ी थी। शक होने पर सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस को इसकी जानकारी दी थी। गाड़ी में एक धमकी भरा पत्र भी मिला था। इसके बाद पुलिस कमिश्नर को अंबानी परिवार की सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया था और एंटीलिया के आसपास के इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को भी बढ़ा दिया गया था।
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हाई प्रोफाइल मामला होने के बावजूद अब तक ये पता नहीं चल पाया है कि ये गाड़ी एंटीलिया के बाहर क्यों खड़ी थी? साजिशकर्ताओं का इरादा क्या था? गाड़ी को एंटीलिया के बाहर खड़ी करके साजिशकर्ता क्या साबित करना चाहते थे? क्यों नहीं सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक लग पाई और कैसे इसमें बैठा शख्स आसानी से बचकर निकल गया? क्या वाजे की गिरफ्तारी से इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे।  




सचिन वाजे क्या कर रहे थे? 
सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि क्या वाजे इस गाड़ी के आसपास मौजूद थे। अगर हां, तो वाजे यहां क्या कर रहे थे? बताया जा रहा है कि स्कॉर्पियो से कुछ दूर उनकी कार खड़ी थी। जिलेटिन से लदी स्कार्पियो कार के पीछे एक संदिग्ध इनोवा कार दिखाई दी थी। कहा जाता है कि स्कार्पियो खड़ी करने के बाद चालक इसी इनोवा में बैठकर फरार हुआ था। एनआईए के अधिकारी अब इसकी जांच कर रहे हैं कि क्या सफेद रंग की कार में सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे बैठे थे। सूत्रों का कहना है कि सचिन वाजे से पूछताछ में एनआईए को इस केस से जुड़ी कई अहम जानकारी मिली है। यह भी पता चला है कि सीआईयू जिलेटिन की छड़ से लदी स्कार्पियो और उसके साथ दिखी इनोवा कार मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की सीआईयू ही इस्तेमाल कर रही थी। 

दिल्ली के तिहाड़ जेल से टेलीग्राम ग्रुप क्यों बना?   

जांच के बाद खुलासा हुआ कि दिल्ली के तिहाड़ जेल से एक टेलीग्राम ग्रुप बना था। जिस आतंकी समूह यानी 'जैश उल हिंद' के टेलीग्राम चैनल से विस्फोटक रखने की जिम्मेदारी ली गई थी, वह चैनल दिल्ली के तिहाड़ जेल में बना था।एनआईए ने इस बारे में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल को जानकारी दी थी। 

यह टेलीग्राम चैनल 26 फरवरी को दोपहर 3 बजे 'टार' नेटवर्क के जरिए बनाया गया था, जिसका इस्तेमाल डार्क वेब का उपयोग करने के लिए किया जाता है। डार्क वेब इंटरनेट का एक हिस्सा है, जिसे केवल टार जैसे गुमनाम नेटवर्क के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। इसे पारंपरिक सर्च इंजनों पर एक्सेस नहीं किया जा सकता है। 

28 फरवरी को आतंकी संगठन जैश-उल-हिंद ने एंटीलिया के बाहर गाड़ी पार्क करने की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था- यह सिर्फ ट्रेलर है और पिक्चर अभी बाकी है। रोक सको तो रोक लो। तुम कुछ नहीं कर पाए थे, जब हमने तुम्हारी नाक के नीचे दिल्ली में विस्फोट किया था, तुमने मोसाद के साथ हाथ मिलाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। तुम्हें मालूम है तुम्हें क्या करना है। बस पैसे ट्रांसफर कर दो, जो तुम्हें पहले बोला गया है। 

हालांकि, इसके अगले ही दिन एक और टेलीग्राम चैनल से इसी संगठन ने एक पोस्टर जारी कर इस बात से इनकार कर दिया था। कहा था कि इस घटना से हमारा कोई संबंध नहीं है। 

आखिर तिहाड़ जेल से टेलीग्राम ग्रुप क्यों बनाया गया, क्या आतंकी तहसीन अख्तर किसी और के इशारे पर काम कर रहा था। और इसकी जिम्मेदारी लेने के बाद जैश-उल-हिंद ने अपने दावे से यू-टर्न क्यों ले लिया। क्या पैसे उगाही की बात सिर्फ दिखावे के लिए थी जबकि मामला कुछ और था। इन सवालों के जवाब मिलने अभी बाकी हैं।
 

मनसुख की हत्या के पीछे कौन   

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ 5 मार्च को आया जब अहम कड़ी मनसुख हिरेन का शव मुंब्रा की खाड़ी में मिला। पहले बताया गया कि मनसुख ने मुंब्रा खाड़ी में छलांग लगाकर आत्महत्या की है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने विधानसभा में कहा था कि कार का मालिक सैम मुटेन था, जिसने मनसुख हिरेन को इंटीरियर सही करने के लिए कार दी थी। जब सैम ने इंटीरियर सही कराने का पैसा नहीं दिया तो हिरेन ने कार अपने पास रख ली थी। मनसुख का यही कदम उनकी मौत की वजह भी बन गया। सवाल बना हुआ है कि क्या मनसुख की हत्या हुई। हालात यही कह रहे कि उनकी हत्या की गई। तो फिर उनकी हत्या के पीछे कौन है? 

परिवारवालों ने भी आरोप लगाया कि मनसुख की हत्या हुई है और इसमें सचिन वाजे का हाथ है। परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि मनसुख हिरेन को मार कर डुबाया गया। परिजनों के मुताबिक, मनसुख की आखिरी मोबाइल लोकेशन पालघर जिले का विरार इलाका था, जबकि उनका शव खाड़ी में मिला। दोनों लोकेशन में इतना अंतर कैसे हो सकता है।

परिवार का आरोप है कि यह बड़ी साजिश है। मनसुख के पड़ोसियों ने भी बताया कि वो सोसायटी के बच्चों को तैरना सिखाते थे, पानी में नहीं डूब सकते थे। मनसुख कुछ दिन से गायब थे और परिवार के लोग थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे। तभी थाने में खबर आई कि खाड़ी में एक शव मिला है। पुलिस उनके परिवार को लेकर वहां पहुंची और शव की शिनाख्त कराई गई। मुंब्रा खाड़ी से जब मनसुख का शव निकाला गया तो वह मास्क पहने हुए थे और मास्क के अंदर छह-सात रुमाल ठूंसे हुए मिले। इससे साफ हो गया कि उनकी हत्या हुई है। 

इस मामले में अहम कड़ी मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत ने मामले को और पेचीदा बना दिया। तब एटीएस से जांच लेकर एनआईए को सौंपी गई। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार भी बैकफुट पर आ गई। सियासत ने भी जोर पकड़ा। भाजपा-शिवसेना आमने-सामने आ गईं। इसकी आंच महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार तक पहुंच गई और नेताओं के मेल-मुलाकातों का सिलसिला तेज हो गया। 

मुंबई पुलिस की जल्दबाजी 

अहम सवाल ये भी है कि आखिर मुंबई पुलिस ने यह कहने में जल्दबाजी क्यों दिखाई कि ये आतंकी साजिश नहीं है। जबकि जांच में खुलासा हुआ कि आतंकी संगठन जैश-उल-हिंद की इसमें संदिग्ध भूमिका है। उसने ही तिहाड़ जेल से टेलीग्राम ग्रुप बनाया। क्या मुंबई पुलिस को पुख्ता जांच से पहले इस तरह का बयान देना चाहिए था?

मामला शुरू से ही हाई प्रोफाइल था। देश के नंबर एक उद्योगपति के घर के बाहर विस्फोटक से भरा वाहन मिलना मामूसी बत नहीं थी। लेकिन मुंबई पुलिस ने वैसी तेजी नहीं दिखाई जिसके लिए वो जानी जाती है। मनसुख हिरेन ने गाड़ी खो जाने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई। इसी गाड़ी में विस्फोटक रखा गया था और ये एंटीलिया के बाहर खड़ी पाई गई।  

सवाल ये भी हैकि स्कॉर्पियो में सवार संदिग्ध कैसे पुलिस को चकमा देकर निकल भागा। उसे अब तक पकड़ा नहीं जा सका है। आखिर वो कैसे गाड़ी में बैठा रहा और आसानी से निकल भी गया।  

मनसुख हिरेन के साथ मुंबई पुलिस के बर्ताव पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों ने बताया है कि किस तरह मनसुख को बार बार थाने बुलाकर परेशान किया जा रहा था। वो मानसिक दबाव से गुजर रहे थे। इस मामले में वो बहुत कुछ  बता सकते थे। 

वाजे पर एक्शन लेने में भी मुंबई पुलिस ने काफी देर की। वाजे पर लगातार सवाल उठ रहे थे, लेकिन मुंबई पुलिस इससे बेफिक्र थी। जब एनआई ने वाजे को गिरफ्तार किया तो मुंबई पुलिस को वाजे को निलंबित करना ही पड़ा। वाजे दूसरी बार पुलिस सेवा से निलंबित हुए हैं। अब मुंबई पुलिस के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। 

बहरहाल, वाजे की गिरफ्तारी से अब कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। हो सकता है कि ये जवाब ऐसे हों जो भूचाल ला दें और सियासत का एक नया दौर महाराष्ट्र में देखने को मिले। 

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