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SC: सिख विरोधी दंगों के कई मामलों का ट्रायल ऐसे हुआ, जिससे आरोपी बरी हो गए; सुप्रीम कोर्ट में बोली सरकार
Mon, 27 Jan 2025 10:58 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 27 Jan 2025 10:58 PM IST
सार
1984 Anti-Sikh Riots: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कहा कि कई मामलों में ट्रायल इस तरह से हुआ, जिसके चलते आरोपी दोषी ठहराए जाने के बजाय बरी कर दिए गए।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि रिकॉर्ड से यह साफ है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के कई मामलों में ट्रायल इस तरह से हुआ, जिसके चलते आरोपी दोषी ठहराए जाने के बजाय बरी कर दिए गए। केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ से कहा कि उन्होंने आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर की थी लेकिन देरी के आधार पर उन्हें खारिज कर दिया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की कई अपीलें
उन्होंने कहा कि 11 जनवरी, 2018 को शीर्ष अदालत ने 1984 के दंगों से संबंधित 186 मामलों की जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया था। एसआईटी ने मामलों की जांच की और कई मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर करने की सिफारिश की। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली पुलिस की नवीनतम स्थिति रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि आठ अपीलें दायर की गई थीं जिन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और कुछ मामलों में निर्णय को शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा था।
कई मामलों में ट्रायल की वजह से आरोपी बरी हुए
इस पर पीठ ने कहा कि केंद्र को इस बात पर फैसला लेना होगा कि बरी करने और बर्खास्त करने के सभी आदेशों को अपीलीय अदालतों के समक्ष चुनौती क्यों नहीं दी गई। भाटी ने कहा कि मैं हलफनामे से आगे नहीं जा सकती लेकिन हम यह कह सकते हैं कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि कई मामलों में ट्रायल इस तरह से हुआ जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों को दोषी ठहराने के बजाय बरी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने एसआईटी की सिफारिश के अनुसार अपील दायर की है।
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मामले की सुनवाई अगले सोमवार के लिए स्थगित
पीठ ने कहा कि वह केंद्र की स्थिति रिपोर्ट नहीं ढूंढ पाई है और पहले उसे देखना चाहेगी। इसी के साथ पीठ ने मामले की सुनवाई अगले सोमवार के लिए स्थगित कर दी। पीठ गुरलाद सिंह कहलों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में एसआईटी की सिफारिश को लागू करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। पिछले साल 20 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने केंद्र को 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में मुकदमों की स्थिति पर दो सप्ताह के अंदर एक नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की कई अपीलें
उन्होंने कहा कि 11 जनवरी, 2018 को शीर्ष अदालत ने 1984 के दंगों से संबंधित 186 मामलों की जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया था। एसआईटी ने मामलों की जांच की और कई मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर करने की सिफारिश की। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली पुलिस की नवीनतम स्थिति रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि आठ अपीलें दायर की गई थीं जिन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और कुछ मामलों में निर्णय को शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा था।
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कई मामलों में ट्रायल की वजह से आरोपी बरी हुए
इस पर पीठ ने कहा कि केंद्र को इस बात पर फैसला लेना होगा कि बरी करने और बर्खास्त करने के सभी आदेशों को अपीलीय अदालतों के समक्ष चुनौती क्यों नहीं दी गई। भाटी ने कहा कि मैं हलफनामे से आगे नहीं जा सकती लेकिन हम यह कह सकते हैं कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि कई मामलों में ट्रायल इस तरह से हुआ जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों को दोषी ठहराने के बजाय बरी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने एसआईटी की सिफारिश के अनुसार अपील दायर की है।
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मामले की सुनवाई अगले सोमवार के लिए स्थगित
पीठ ने कहा कि वह केंद्र की स्थिति रिपोर्ट नहीं ढूंढ पाई है और पहले उसे देखना चाहेगी। इसी के साथ पीठ ने मामले की सुनवाई अगले सोमवार के लिए स्थगित कर दी। पीठ गुरलाद सिंह कहलों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में एसआईटी की सिफारिश को लागू करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। पिछले साल 20 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने केंद्र को 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में मुकदमों की स्थिति पर दो सप्ताह के अंदर एक नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।