{"_id":"5f11a4e06676af44491944c6","slug":"anti-india-elements-can-spread-major-destruction-due-to-cyber-hacking-keep-these-things-in-mind-on-twitter-facebook","type":"story","status":"publish","title_hn":"साइबर हैकिंग से बड़ी तबाही फैला सकती हैं देश विरोधी ताकतें, ट्विटर-फेसबुक पर रखें इन बातों का ध्यान","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
साइबर हैकिंग से बड़ी तबाही फैला सकती हैं देश विरोधी ताकतें, ट्विटर-फेसबुक पर रखें इन बातों का ध्यान
Fri, 17 Jul 2020 06:47 PM IST
Harendra Chaudhary
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 17 Jul 2020 06:47 PM IST
सार
सुरक्षा एजेंसियों को चिंता, सांप्रदायिक, जातिगत-धार्मिक भेद और अलगाववादी सोच की परिस्थितियों के बीच देश विरोधी ताकतें सोशल मीडिया हैकिंग से पैदा कर सकती हैं बुरे हालात...
विज्ञापन
hacking apps
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली हिंसा को भड़काने में सोशल मीडिया ने बड़ी भूमिका निभाई थी। पुलिस जांच में ये बातें सामने आई हैं कि कुछ शरारती तत्वों ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए एक वर्ग विशेष के खिलाफ जमकर जहर उगला, फर्जी फोटोग्राफ्स के जरिए लोगों को भड़काया और हिंसा करने के लिए उकसाया। इन दंगों में 53 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
सोचिए कि अगर ऐसे किसी संवेदनशील माहौल में किसी बड़े नेता का अकाउंट हैक कर किसी समुदाय के खिलाफ बेहद भड़काऊ बयान दे दिया जाए, तो देश-समाज को इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है? यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है और सुरक्षा एजेंसियों को इसी बात की चिंता सता रही है।
विज्ञापन
इस चुनौती से निपटने के लिए कुछ एहतियाती उपाय अपनाए जा रहे हैं। किसी भी संवेदनशील जगह से आ रहे सोशल मीडिया संदेशों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। लोगों को ऐसे किसी भी संदेश से सावधान रहने की अपील की जा रही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे उपाय संवेदनशील समय में बिलकुल नाकाफी साबित होते हैं।
उन्होंने कहा कि मेल-आईडी के इनबॉक्स में आए किसी भी ऐसे ई-मेल को खोलने से बचें, जिसके बारे में आपको जानकारी न हो। अगर गलती से ये ई-मेल खुल भी गया हो, तो इनमें अटैच लिंक को बिलकुल न खोलें। सबसे ज्यादा हैकिंग इन्हीं अटैचमेंट्स के जरिए की जाती है।
राज्यों ने अपने स्तर पर साइबर टीमें गठित कर रखी हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि लगातार बदलती तकनीक के जमाने में उनकी यह तैयारी बिलकुल नाकाफी साबित होती है। पाया गया है कि हमारे साइबर सुरक्षा के अधिकारी भी तकनीकी रूप से उतने दक्ष नहीं होते, जितना कि होनी चाहिए। इनमें काम कर रहे अधिकारियों की समय-समय पर उचित ट्रेनिंग न हो पाना भी देश को साइबर सुरक्षा के मामले में बेहद कमजोर बना देता है।
आशंका जाहिर की गई है कि किसी भी हस्ती के अकाउंट को हैक कर समाज का माहौल खराब करने की कोशिश की जा सकती है, इसलिए किसी भी ‘आपत्तिजनक सामग्री’ के आने पर लोगों को उसे फॉरवर्ड करने से बचने के लिए कहा गया है।
विज्ञापन
सोचिए कि अगर ऐसे किसी संवेदनशील माहौल में किसी बड़े नेता का अकाउंट हैक कर किसी समुदाय के खिलाफ बेहद भड़काऊ बयान दे दिया जाए, तो देश-समाज को इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है? यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है और सुरक्षा एजेंसियों को इसी बात की चिंता सता रही है।
विज्ञापन
वेरीफाइड अकाउंट भी सुरक्षित नहीं
सोशल मीडिया के वेरीफाइड अकाउंट अब तक बेहद सुरक्षित समझे जाते थे। उन पर दी गई जानकारी को आधिकारिक समझा जाता था, लेकिन बिल गेट्स और जेफ बेजोस के ट्विटर अकाउंट हैक होने के बाद यह धारणा भी अब टूट गई है। सुरक्षा एजेंसियों को चिंता सता रही है कि किसी संवेदनशील समय पर एक फर्जी भड़काऊ पोस्ट देश को बड़ी मुसीबत में डाल सकती है।
विज्ञापन
इस चुनौती से निपटने के लिए कुछ एहतियाती उपाय अपनाए जा रहे हैं। किसी भी संवेदनशील जगह से आ रहे सोशल मीडिया संदेशों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। लोगों को ऐसे किसी भी संदेश से सावधान रहने की अपील की जा रही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे उपाय संवेदनशील समय में बिलकुल नाकाफी साबित होते हैं।
2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाने की सलाह
दिल्ली पुलिस साइबर सेल के डीसीपी अनीश राय ने अमर उजाला से कहा कि किसी भी तरह की हैकिंग से बचने के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स या मेल आईडी पर ‘2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ अवश्य लगाकर रखना चाहिए। ई-मेल अकाउंट खोलने के लिए फिजिकल-की का इस्तेमाल करने से भी ई-मेल अकाउंट सुरक्षित रखा जा सकता है।उन्होंने कहा कि मेल-आईडी के इनबॉक्स में आए किसी भी ऐसे ई-मेल को खोलने से बचें, जिसके बारे में आपको जानकारी न हो। अगर गलती से ये ई-मेल खुल भी गया हो, तो इनमें अटैच लिंक को बिलकुल न खोलें। सबसे ज्यादा हैकिंग इन्हीं अटैचमेंट्स के जरिए की जाती है।
साइबर कानून, आर्मी नहीं
साइबर सुरक्षा के मद्देनजर अनेक देशों ने अपने यहां साइबर आर्मी तैयार कर रखी हैं। इनका काम विदेशी ताकतों के साइबर हमले से देश को बचाना होता है। लेकिन भारत जैसे देश के पास अभी भी अपनी साइबर आर्मी नहीं है। हमारे देश का साइबर कानून भी मजबूत नहीं है, जिसकी वजह से ऐसे अपराधियों पर पकड़ बनाना बेहद मुश्किल होता है।राज्यों ने अपने स्तर पर साइबर टीमें गठित कर रखी हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि लगातार बदलती तकनीक के जमाने में उनकी यह तैयारी बिलकुल नाकाफी साबित होती है। पाया गया है कि हमारे साइबर सुरक्षा के अधिकारी भी तकनीकी रूप से उतने दक्ष नहीं होते, जितना कि होनी चाहिए। इनमें काम कर रहे अधिकारियों की समय-समय पर उचित ट्रेनिंग न हो पाना भी देश को साइबर सुरक्षा के मामले में बेहद कमजोर बना देता है।
देश के सामने ये है बड़ा खतरा
अभी सबसे ताजा मामले में खालिस्तान समर्थक एक कट्टरवादी नेता ने सोशल मीडिया के जरिए एक समुदाय विशेष के युवाओं से देश के खिलाफ आपत्तिजनक अपील की। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, नागालैंड, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल और अन्य कई राज्यों में अलग-अलग कारणों से स्थिति तनावपूर्ण है। ऐसी किसी भी जगह पर कोई तनावपूर्ण सामग्री समाज के हालात बिगाड़ सकती है।महाराष्ट्र साइबर सेल ने दिए सुझाव
विश्व की नामचीन हस्तियों बिल गेट्स, एलन मस्क और जेफ बेजोस के ट्विटर अकाउंट हैक किए जाने के बाद महाराष्ट्र साइबर सेल ने कुछ एडवाइजरी जारी की हैं। लोगों से किसी वेरीफाइड अकाउंट की बात को भी सीधे न स्वीकार करने को कहा गया है। किसी भी ट्वीट को रिट्वीट करने से पहले चेक करने के लिए कहा गया है।आशंका जाहिर की गई है कि किसी भी हस्ती के अकाउंट को हैक कर समाज का माहौल खराब करने की कोशिश की जा सकती है, इसलिए किसी भी ‘आपत्तिजनक सामग्री’ के आने पर लोगों को उसे फॉरवर्ड करने से बचने के लिए कहा गया है।