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जाट हिंसा: रिपोर्ट की आलोचना पर कमेटी के मुखिया ने कहा- आधी अधूरी है तो खुद ही लिख लें रिपोर्ट

Sat, 04 Jun 2016 05:12 AM IST
हिमांशू मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशू मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 04 Jun 2016 05:12 AM IST
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answer given by prakash singh who was chairman of jat voilenece report commitee
- फोटो : Getty Images

हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई भीषण हिंसा की जांच करने के लिए बनाई गई कमेटी के मुखिया और बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक ने अपनी रिपोर्ट की राज्य सरकार के मंत्रियों और नौकरशाही की ओर से की गई आलोचना पर तीखा पलटवार किया है। हरियाणा सरकार के एक मंत्री की आधी अधूरी रिपोर्ट संबंधी आरोप से नाराज सिंह ने कहा कि अगर मेरी रिपोर्ट आधी है तो अब वह खुद आधी रिपोर्ट लिख लें। अमर उजाला से बातचीत में सिंह ने कहा कि उन्होंने रिपोर्ट पेश कर अपनी जवाबदेही निभा दी है। अब यह सरकार पर है कि वह इसे ठंडे बस्ते में डाले या गरम बस्ते में। इस दौरान सिंह ने रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई न होने पर भविष्य में आने वाले खतों के प्रति आगाह भी किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई न होने की स्थिति में आंदोलन के बहाने हिंसा की प्रवृत्ति बढने के साथ ही प्रशासन में जातिवाद का जाल और मजबूत होगा। गौरतलब है कि रिपोर्ट पेश होने के बाद न सिर्फ विपक्ष बल्कि सरकार के मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी भी इसकी सार्वजनिक आलोचना कर रहे हैं।

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राज्य सरकार केवरिष्ठ मंत्री अनिल विज की रिपोर्ट कोई गीता का अध्याय नहीं है संबंधी टिप्पणी ने सिंह ने कहा कि मैंने भी अपनी रिपोर्ट को गीता नहीं बताया है। सिंह ने कहा कि मैं इतना मूर्ख नहीं हूं कि खुद को भगवान कृष्ण मान लूं। मैं साधारण इंसान हूं। मगर इतना साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि मैंने हिंसा के कारणों की ईमानदारी से जांच कर अपनी रिपोर्ट दी है। विपक्ष के साथ-साथ सरकार के मंत्री और अधिकारियों की ओर से रिपोर्ट पर सार्वजनिक टिप्पणी के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मेरा काम हिंसा का कारण और इसमें लोगों की संलिप्ता को सामने लाने की थी। न कि किसी की मनमाफिक रिपोर्ट तैयार करने की। मेरा एतराज जताने वालों से कहना है कि कमेटी बनाई है तो उस पर एतबार कीजिये। अगर एतबार नहीं है तो कमेटी गठित करने के बदले खुद ही रिपोर्ट लिख लेनी चाहिए थी।
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बातचीत में सिंह ने सार्वजनिक नहीं की गई रिपोर्ट के 30 पन्नों पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उन्होंने मुरथल में कथित तौर पर हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर यह कहते हुए टिप्पणी से इंकार किया कि यह मामला कमेटी की जांच के दायरे में नहीं था। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य के मुख्यमंत्री रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का सिलसिला भविष्य में भी जारी रखेंगे।

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